जागरण संपादकीय: स्वदेशी का मंत्र
आम तौर पर ऐसी सुविधाएं भारत में उपलब्ध नहीं होतीं और यदि होती भी हैं तो वे विदेश के मुकाबले महंगी पड़ती हैं। ऐसा क्यों है, इसके कारणों का निवारण करने की आवश्यकता है।
HighLights
PM ने गैर-जरूरी सोने की खरीद और विदेश यात्रा से बचने की अपील की।
स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर जोर दिया गया।
भारतीय कारोबारियों को गुणवत्तापूर्ण स्वदेशी उत्पाद बनाने का आह्वान।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि पर देशवासियों को बधाई देते हुए एक बार फिर गैर जरूरी सोने की खरीद न करने, विदेश यात्रा से परहेज करने और साथ ही विदेश में शादी करने से बचने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने स्वदेशी का मंत्र भी दोहराया और देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता भी रेखांकित की। इस बार उन्होंने यह अपील इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी करके की। इसके पहले उन्होंने ऐसी ही अपील कुछ माह पहले तब की थी, जब पश्चिम एशिया संकट के चलते तेल के दाम बढ़ रहे थे। तब उन्होंने वर्क फ्राम होम को प्राथमिकता देने और पेट्रोलियम पदार्थों की खपत कम करने का भी आग्रह किया था।
देखना है कि उनकी ओर से नए सिरे से की गई अपील आम जनता पर कितना असर दिखाती है या नहीं? चूंकि भारत अपनी आवश्यकता का अधिकांश सोना आयात करता है और इसके चलते चालू खाता घाटा बढ़ता है, इसलिए उसकी खरीद से बचने में ही समझदारी है। ऐसा इसलिए भी किया जाना चाहिए, क्योंकि सोने से कोई नियमित आय नहीं होती। सोने के प्रति तमाम आकर्षण के बाद भी लोगों को यह समझना होगा कि यह निवेश का उचित विकल्प नहीं है, लेकिन इसी के साथ सरकार को भी इस पर चिंतन-मनन करना होगा कि आखिर वोकल फार लोकल यानी स्वदेशी वस्तुओं की खरीद का अभियान गति क्यों नहीं पकड़ पा रहा है?
आज भारत में क्रय क्षमता से लैस एक ऐसा बड़ा मध्यवर्ग है, जो गुणवत्ता वाली वस्तुएं खरीदना पसंद करता है। वह ऐसी वस्तुएं विदेश से इसलिए खरीदता है, क्योंकि भारत में वे या तो आसानी से उपलब्ध नहीं हैं या फिर विदेश के मुकाबले महंगी पड़ती हैं। आज यह अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए कि लोग स्वदेशी के नाम पर देश में निर्मित कम गुणवत्ता वाली वस्तुएं खरीदना पसंद करेंगे। आखिर भारतीय कारोबारी वैसी गुणवत्तायुक्त वस्तुएं क्यों नहीं बना पा रहे हैं, जिनकी भारतीय मध्य वर्ग के बीच मांग है? नीति-नियंताओं को इस प्रश्न पर विचार करने के साथ ही यह जानना होगा कि यदि धनाढ्य भारतीयों का एक वर्ग विवाह के लिए विदेश जाना पसंद कर रहा है तो इसका कारण वहां मिलने वाली सुविधाएं हैं।
आम तौर पर ऐसी सुविधाएं भारत में उपलब्ध नहीं होतीं और यदि होती भी हैं तो वे विदेश के मुकाबले महंगी पड़ती हैं। ऐसा क्यों है, इसके कारणों का निवारण करने की आवश्यकता है। यदि देश को वास्तव में आत्मनिर्भर बनाना है तो भारतीय कारोबारियों को लोगों की आवश्यकता की हर किस्म की वस्तुओं का स्वदेश में निर्माण करना सुनिश्चित करना होगा। उन्हें यह सवाल खुद से करना होगा कि यदि चीन के कारोबारी यह काम कर ले रहे हैं और वे दुनिया के बाजारों में छा गए हैं तो वे ऐसा क्यों नहीं कर पा रहे हैं?












