दिव्य कुमार सोती। देश में आए दिन उन तत्वों की गिरफ्तारी के समाचार आते रहते हैं, जिन पर पाकिस्तान के आतंकी संगठनों या वहां की खुफिया एजेंसी के इशारे पर काम करने के आरोप लगते हैं। यह सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ समय पहले भारतीय खुफिया एजेंसियों द्वारा पूरे भारत में छापेमारी कर पाकिस्तान के शहजाद भट्टी नेटवर्क के 200 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इन लोगों के जरिये पाकिस्तान की भारत में बड़े स्तर पर तोड़फोड़ और अस्थिरता फैलाने वाली कार्रवाइयां जैसे रेल ट्रैक काटकर ट्रेन दुर्घटनाओं को अंजाम देने, सरकारी इमारतों और पुलिस चौकियों पर पेट्रोल बम/ग्रेनेड फेंकने और लक्षित हत्याएं कराने की योजना थी।

यह ऑपरेशन सिंदूर से सहमे पाकिस्तान की भारत के विरुद्ध हाइब्रिड युद्ध की नई रणनीति को परिलक्षित करता है। शहजाद भट्टी नेटवर्क दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी की तरह ही एक माफिया है, परंतु उसके काम करने का तरीका एक आम माफिया नेटवर्क की तरह न होकर इस प्रकार का है कि उसमें कोई केंद्रीकृत कमांड नहीं है, जिस पर नजर रखकर सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों के बारे में सूचना जुटा सकें।

यह युवाओं और विशेष तौर पर जेन-जी के ऐसे युवाओं से डिजिटल मीडिया के जरिये संपर्क साधता है, जो गैंग्सटरों और गन कल्चर से प्रभावित होते हैं या फिर नशे की लत से ग्रसित होते हैं। ऐसे युवा महज रोमांच और नशीले पदार्थों के लिए अपराध करने को तैयार हो जाते हैं, जबकि उन्हें अक्सर यह मालूम तक नहीं होता कि उनसे जो अपराध करने को कहा जा रहा है, वह पाकिस्तान में बैठे किसी व्यक्ति द्वारा कहा जा रहा है और वह आतंकवाद की श्रेणी में भी आ सकता है।

शहजाद भट्टी नेटवर्क 5-10 हजार रुपये देकर युवाओं से किसी पुलिस थाने या अन्य किसी संवेदनशील सरकारी कार्यालय का फोटो लाकर देने या किसी सार्वजनिक स्थान पर भड़काऊ पोस्टर लगा आने या बस, रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट आदि पर बम होने की फर्जी काल करने जैसे काम देता है। इसके अलावा युवाओं को किसी संवेदनशील सार्वजनिक स्थान पर चुपके से कैमरे लगाने और उनकी फुटेज भेजने जैसे काम भी दिए जाते हैं। हिंसक वीडियो गेम्स, ड्रग्स और गन कल्चर की फंतासी दुनिया में जी रहे बहुत से युवा इन गतिविधियों का निहितार्थ समझे बिना भट्टी और इस जैसे अन्य पाकिस्तानी नेटवर्क के प्यादे बन जाते हैं।

उनके द्वारा भेजी गई जानकारियां बाद में भारत के खिलाफ छेड़े गए आतंकी युद्ध के अगले चरण को कार्यान्वित करने में काम आ सकती हैं। भट्टी नेटवर्क का जाल कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उसके नेटवर्क से जुड़े डिजिटल मीडिया अकाउंट को एक करोड़ से अधिक लोग फालो करते हैं। ऐसे में कौन सा आम युवा इनके जाल में फंस जाएगा, इसकी निरंतर निगरानी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस नेटवर्क की दूसरी श्रेणी के प्यादे वे होते हैं, जिनमें आपराधिक पृष्ठभूमि के होते हैं, पर उन्होंने छोटे-मोटे अपराध ही किए होते हैं, इसलिए वे पुलिस की प्राथमिकता सूची में बहुत नीचे होते हैं।

उदाहरण के लिए हथियारों की छोटी-मोटी तस्करी करने वाला विकास प्रजापति मध्य प्रदेश के इंदरगढ़ की अनाज मंडी में मजदूरी करता था। शहजाद भट्टी के वीडियो से वह प्रभावित हुआ और इंस्टाग्राम के जरिये उसके संपर्क में आ गया। भट्टी ने उसे एक पार्सल लेने के लिए पंजाब के गुरदासपुर भेजा। वीडियो काल के जरिये उसने विकास को पार्सल खोलने के लिए गाइड किया, जिसमें ग्रेनेड था। उससे गुरदासपुर सिटी पुलिस थाने और टाउन हाल पुलिस थाना अमृतसर की रेकी कराई गई। इसके बाद विकास से वे ग्रेनेड पंजाब के हनगुनप्रीत सिंह को देने को कहा गया, जिसने उसे गुरदासपुर पुलिस स्टेशन पर फेंका।

शहजाद भट्टी नेटवर्क के काम करने के तरीके से आप समझ सकते हैं कि उसकी गतिविधियों को किसी आतंकी संगठन की गतिविधियों की तरह पकड़ा नहीं जा सकता। पाकिस्तान द्वारा यह रणनीति इसलिए अपनाई गई है, क्योंकि पहले सीमा-पार सर्जिकल स्ट्राइक, फिर बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर हवाई हमले और फिर ऑपरेशन सिंदूर में पूरे पाकिस्तान भर में आतंकी ठिकानों और पाकिस्तानी फौज के सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद पाकिस्तान को फिलहाल लग रहा है कि भारत और विश्व समुदाय द्वारा चिह्नित किए जा चुके उसके आतंकी संगठनों के जरिये सीधे कोई आतंकी हमला किया गया तो उसके परिणाम पाकिस्तानी फौज के लिए भयावह हो सकते हैं, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह अपने ठिकानों की भारतीय हमलों से रक्षा करने में पूरी तरह असफल रही थी।

इतनी जल्दी भारतीय हमलों के विरुद्ध प्रतिरक्षात्मक क्षमता भी पैदा नहीं की जा सकती और न ही ऐसी प्रतिरक्षा प्रणालियों को बड़े पैमाने पर खरीदने की आर्थिक क्षमता पाकिस्तान के पास है, लेकिन अपनी इस बुरी स्थिति में भी पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों से बाज नहीं आना चाहता और भारत के विरुद्ध येन-केन-प्रकारेण आतंकी युद्ध जारी रखे हुए है। ऐसे में स्थानीय थाना पुलिस और बीट ड्यूटी पर लगे पुलिसकर्मियों को भी क्षेत्र के छुटभैये अपराधियों और नशे के आदी युवाओं की गतिविधियों पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता है, क्योंकि मामला अब साधारण अपराध का न होकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ने लगा है।

हाइब्रिड आतंकवाद से निपटने में आम नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी सुरक्षा एजेंसियों की। अगर कोई डिजिटल मीडिया पर संदिग्ध किस्म का कोई भी वार्तालाप या पोस्ट देखे तो उसे तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए। पुलिस को भी ऐसी सूचनाओं को लेकर संवेदनशील होना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सूचनाएं साझा करने वाले नागरिकों को असहज स्थितियों का सामना न करना पड़े। स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने सिविल डिफेंस पर जोर देते हुए सही ही कहा था कि आज का हाइब्रिड युद्ध सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल मीडिया, बैंकिंग आदि क्षेत्रों तक फैल चुका है और उससे लड़ने के लिए देश को सजग नागरिकों की आवश्यकता है।

(लेखक काउंसिल ऑफ स्ट्रैटेजिक अफेयर्स से संबद्ध सामरिक विश्लेषक हैं)