जागरण संपादकीय: जहरीली शराब का कहर
यह ठीक नहीं कि आज जब देश को विकसित बनाने की बातें हो रही हैं, तब वैसी घटनाएं हो रही है, जैसी कई निर्धन देशों में भी नहीं होतीं।
HighLights
सागर में जहरीली शराब से 20 से अधिक लोगों की मौत।
देशभर में जहरीली शराब की समस्या विकराल और जानलेवा।
प्रशासन की लापरवाही और माफिया पर कार्रवाई की कमी।
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से 20 से अधिक लोगों की मौत यही बता रही है कि अपने देश में समय के साथ कुछ समस्याएं किस तरह विकराल और जानलेवा होती जा रही हैं। यह शर्मनाक है कि रह-रहकर देश के किसी न किसी हिस्से में जहरीली शराब से मौतों का कोई न कोई मामला सामने आता ही रहता है। आम तौर पर शासन-प्रशासन तभी चेतता है, जब मरने वालों की संख्या अधिक होती है।
विडंबना यह है कि इसके बाद भी स्थितियां सुधरती नहीं। जहरीली शराब बनाने-बेचने वालों की गिरफ्तारी के साथ लापरवाह अधिकारियों का निलंबन होता है, लेकिन कुछ समय बाद फिर कहीं और कई बार तो उसी राज्य में जहरीली शराब कहर ढा देती है। मध्य प्रदेश से पहले गुजरात और बिहार में कई लोग जहरीली शराब पीने से मरे थे। इसके पहले महाराष्ट्र में।
आम तौर देसी तरीके से बनाई जाने वाली शराब ही जहरीली शराब में तब्दील हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इसे बनाने वाले ज्यादा कमाई के चक्कर में ऐसे तौर-तरीके अपनाते हैं, जो जानलेवा साबित होते हैं। एक समय था, जब देसी शराब महुआ और कुछ अनाजों के जरिये प्राकृतिक तरीके से बनाई जाती थी, लेकिन अब वह घातक रसायनों के जरिये बनाई जाने लगी है। यही शराब प्रायः जहरीली हो जाती है।
अपने देश में शराब को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताए जाने के बाद भी उसका चलन तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन उसकी गुणवत्ता का कोई भरोसा नहीं। अभी हाल में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआइ ने यह निर्देश दिया कि एक प्रचलित रम को इसी श्रेणी में नहीं बेचा जा सकता, क्योंकि उसे निर्धारित तरीके से बनाने के स्थान न्यूट्रल स्पिरिट में आर्टिफिशियल रम फ्लेवर मिलाकर बनाया और बेचा जा रहा है।
यह गनीमत है कि एफएसएसएआइ को भारत में बनने वाली विदेशी शराब की गुणवत्ता को लेकर चिंता हुई, लेकिन क्या वह देसी शराब की भी गुणवत्ता परखेगा? इससे भी महत्वपूर्ण सवाल यह है कि राज्य सरकारें और उनकी एजेंसियां जहरीली शराब बनाने और बेचने वाले माफिया की कमर तोड़ने में कब कामयाब होंगी? वे इससे अपरिचित नहीं हो सकतीं कि अवैध तरीके से देसी शराब बनाने का काम एक कुटीर उद्योग जैसा रूप ले चुका है।
कभी-कभी ऐसा लगता है कि जहरीली शराब के लगातार कहर ढाने के बाद भी शासन-प्रशासन इसलिए अपने हिस्से की जिम्मेदारी नहीं उठाता, क्योंकि उसकी चपेट में आने वाले आम तौर पर दीन-हीन लोग होते हैं। यह समझा जाए कि इस तरह की घटनाएं केवल कानून के शासन को कमजोर ही नहीं करतीं, बल्कि देश की बदनामी भी कराती हैं। यह ठीक नहीं कि आज जब देश को विकसित बनाने की बातें हो रही हैं, तब वैसी घटनाएं हो रही है, जैसी कई निर्धन देशों में भी नहीं होतीं।











