जागरण संपादकीय: रेल सेवा का विस्तार
जापान, चीन और यूरोपीय देश न जाने कब से प्रमुख मार्गों पर बुलेट ट्रेन चला रहे हैं। इसी तरह एक सच्चाई यह भी है कि इन देशों में सामान्य ट्रेनों की औसत गति भारत के मुकाबले कहीं अधिक है।
HighLights
सात व्यस्त रेल मार्ग होंगे चार लेन के।
तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से बढ़ेगा नेटवर्क।
ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी, यात्रा होगी सुगम।
देश के व्यस्त रेल मार्गों पर यातायात के दबाव को देखते हुए सात रेल मार्गों को चार लेन का बनाने का फैसला समय की मांग के अनुरूप है। इस फैसले पर अमल से ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने और यात्रा को ज्यादा सुगम बनाने में तो सहायता मिलेगी ही, ट्रेनों के लेट होने की समस्या का भी समाधान होगा। चूंकि जिन सात रेल मार्गों को चार लेन का करने का निर्णय लिया गया, वे सभी अति व्यस्त रेल रूट हैं, इसलिए देश के अनेक बड़े शहरों को इसका लाभ मिलेगा।
उल्लेखनीय यह भी है कि इससे यातायात के साथ माल ढुलाई भी बेहतर होगी। केंद्रीय कैबिनेट ने रेल सेवा के आधुनिकीकरण को ध्यान में रखते हुए तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनके पूरा होने से भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।
समय के साथ जिस तरह आवाजाही तेजी के साथ बढ़ रही है, उसे देखते हुए रेल सेवा के आधुनिकीकरण और उसके विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह सही है कि सड़क यातायात अपेक्षाकृत सुगम होने के साथ हवाई सेवाएं भी नए-नए शहरों में पहुंच रही हैं, लेकिन भारत सरीखे बड़े और विशाल आबादी वाले देश में रेल सेवा का कोई विकल्प नहीं।
आज भी बड़ी संख्या में लोग रेल से यात्रा करना पसंद करते हैं, लेकिन ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता में कमी के कारण कुछ लोगों को मजबूरी में सड़क या हवाई सेवा का चयन करना पड़ता है। त्योहारों और अन्य विशेष अवसरों पर ट्रेनों में सीटें मिलना अभी भी कठिन बना हुआ है। एक समस्या उनकी लेट-लतीफी भी है। इसका कारण पर्याप्त रेल मार्ग न होना है। देश के अनेक क्षेत्र ऐसे हैं, जो अभी रेल सेवा से नहीं जुड़ सके हैं।
कुछ बड़ी आबादी वाले क्षेत्र ऐसे हैं, जहां तक जाने के लिए ट्रेन कठिनाई से उपलब्ध होती है। इसे देखते हुए रेल सेवा का विस्तार कहीं अधिक तेजी से होना चाहिए। इसके पहले रेल मंत्री ने यह जानकारी दी थी कि स्वदेशी बुलेट ट्रेन का परीक्षण अगले वर्ष मई-जून में होगा और यदि सब कुछ सही रहा तो दिसंबर में उसका संचालन शुरू हो जाएगा। यह एक उपलब्धि तो होगी, लेकिन यह ध्यान रहे कि बुलेट ट्रेन परियोजना को साकार करने में देर हुई है।
जापान, चीन और यूरोपीय देश न जाने कब से प्रमुख मार्गों पर बुलेट ट्रेन चला रहे हैं। इसी तरह एक सच्चाई यह भी है कि इन देशों में सामान्य ट्रेनों की औसत गति भारत के मुकाबले कहीं अधिक है। यह ठीक है कि पिछले कुछ वर्षों में चुनिंदा ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी है, लेकिन अभी कुल मिलाकर उनकी गति सीमा दो सौ किमी प्रति घंटे के अंदर ही है और कुछ ट्रेनों को तो सुरक्षा कारणों से तय गति से कम रफ्तार में ही चलाने की मजबूरी है।











