जागरण संपादकीय: राजमार्गों पर एंबुलेंस
अच्छा हो कि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर कोई ऐसा साझा तंत्र बनाए, जो राजमार्गों में आवागमन को सुरक्षित कर सके। राज्य सरकारों को इसकी भी फिक्र करनी होगी कि उसके अपने मार्गों पर भी दुर्घटनाएं थमें।
HighLights
राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर एंबुलेंस की तैनाती।
राज्यों को एंबुलेंस को हेल्पलाइन से जोड़ना अनिवार्य।
बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना प्राथमिकता।
यह राहतकारी है कि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय राजमार्गों पर स्थित हर टोल प्लाजा पर एक एंबुलेंस तैनात करने की लंबे समय से प्रस्तावित अपनी योजना को अमल में लाने जा रहा है। इस योजना के तहत सड़क एवं परिवहन मंत्रालय राज्यों को एंबुलेंस उपलब्ध कराएगा। वह उनके संचालन का खर्च उठाएगा, लेकिन राज्यों को भी इन एंबुलेंस को हेल्पलाइन से जोड़ने का काम करना होगा।
इसमें राज्यों को कोई समस्या नहीं आनी चाहिए, लेकिन बात तब बनेगी, जब ये एंबुलेंस लगातार गश्त करेंगी और वे सूचना-संचार के सभी आधुनिक उपकरणों से भी लैस होंगी। इन एंबुलेंस की तत्परता की निगरानी करने की भी आवश्यकता होगी। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि शहरों में राजमार्गों के किनारे या उनके निकट ऐसे ट्रामा सेंटर हों, जो घायलों का बिना किसी देरी के उपचार कर सकें।
स्पष्ट है कि इस योजना की सफलता बहुत कुछ राज्यों और विशेष रूप से उनकी पुलिस के सहयोग पर निर्भर करेगी। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को हर टोल प्लाजा पर एंबुलेंस तैनात करने की अपनी योजना को सही ढंग से क्रियान्वित करने के साथ ही राज्यों से मिलकर ऐसे उपाय भी करने होंगे, जिससे दुर्घटना की नौबत ही न आए या उन पर प्रभावी अंकुश लगे।
ऐसे उपायों पर प्राथमिकता से ध्यान देना इसलिए अनिवार्य है, क्योंकि तमाम घोषणाओं और चिंताओं के बाद भी मार्ग दुर्घटनाओं एवं उनमें हताहत होने वालों की संख्या बढ़ती चली जा रही है। इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि भारत में अन्य देशों के मुकाबले कहीं अधिक लोग मार्ग दुघटनाओं में अपनी जान गंवा रहे हैं। यह तब है, जब इन देशों की तुलना में भारत में वाहनों की संख्या कहीं कम है।
मार्ग दुर्घटनाओं का कारण उपयुक्त डिजाइन वाले राजमार्गों का निर्माण न किए जाने के साथ ही उनकी समुचित देखभाल भी न किया जाना है। एक समस्या यह है कि राजमार्गों पर कहीं भी कट बना दिए जाते हैं। इसी तरह यात्री वाहन कहीं पर भी सवारियां उतारने या बैठाने लग जाते हैं। अपने देश में राजमार्गों पर अतिक्रमण के साथ यातायात नियमों की अनदेखी भी आम है।
वास्तव में मार्ग दुर्घटनाओं पर लगाम तब लगेगी, जब सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के साथ राज्य सरकारें भी सुरक्षित आवागमन को प्राथमिकता देंगी। इसी के साथ वाहन चालकों को भी जागरूक करना होगा। यह समझा जाना चाहिए कि लापरवाह वाहन चालकों को केवल मामूली जुर्माने के जरिये नियंत्रित करना कठिन है।
अच्छा हो कि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर कोई ऐसा साझा तंत्र बनाए, जो राजमार्गों में आवागमन को सुरक्षित कर सके। राज्य सरकारों को इसकी भी फिक्र करनी होगी कि उसके अपने मार्गों पर भी दुर्घटनाएं थमें।











