राम मंदिर ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति यह बताती है कि इस मंदिर की व्यवस्था के संचालन के लिए किसी कुशल पेशेवर की आवश्यकता थी। अच्छा होता कि इस आवश्यकता की पूर्ति पहले ही कर ली जाती। यह अच्छा नहीं हुआ कि यह काम तब किया गया, जब राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया। इस मामले ने मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था में खामी को उजागर किया और ट्रस्ट की प्रतिष्ठा को भी धूमिल किया। चूंकि जितेंद्र मिश्र आपरेशन सिंदूर समेत कई सैन्य अभियानों में अपनी दक्षता का परिचय दे चुके हैं, इसलिए आशा की जाती है कि वे राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के रूप में भी अपने दायित्वों का निर्वहन अच्छी तरह करेंगे और उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

हालांकि किसी मंदिर ट्रस्ट के सीईओ की भूमिका सैन्य अधिकारी से भिन्न होती है, लेकिन दक्षता और कुशल प्रबंधन की मांग हर कहीं होती है। यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि जितेंद्र मिश्र राम मंदिर की देख-रेख, साफ-सफाई के साथ चढ़ावे का प्रबंध सही तरह कर सकने में समर्थ होंगे और साथ ही लोगों को यह भरोसा दिलाने में सफल होंगे कि उनके नेतृत्व में राम मंदिर का संचालन आदर्श तरीके से होगा। ऐसा होना भी चाहिए, क्योंकि यह एक भव्य मंदिर ही नहीं, आस्था का एक बड़ा केंद्र भी है। ऐसे किसी मंदिर में किसी भी तरह की अव्यवस्था के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को हर क्षण इसकी अनुभूति होनी चाहिए कि यहां सब कुछ विधिवत और धर्मसम्मत है।

चूंकि राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ का कार्यक्षेत्र प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित है और उनका काम मंदिर के दैनिक प्रशासन की देख-रेख के साथ दर्शन की व्यवस्था और भीड़ का प्रबंधन करने के अतिरिक्त दान और वित्तीय गतिविधियों को संचालित करना होगा, इसलिए ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को अपने हिस्से की भूमिका का निर्वाह करने के लिए सजग रहना होगा। इसलिए और भी, क्योंकि धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े मामलों को ट्रस्ट के अन्य सदस्य और विशेष रूप से संतगण देखेंगे।

इन मामलों के समुचित अवलोकन से ही राम मंदिर की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और वह हिंदू समाज की आस्था के एक बड़े स्थल के रूप में सुशोभित होगा। राम मंदिर उन आदर्शों का प्रकाशपुंज बनना चाहिए, जिनके लिए श्रीराम जाने और पूजे जाते हैं। वैसे तो संत समाज की यह मांग रही है कि राम मंदिर का संचालन उनके द्वारा ही हो, लेकिन एक तो इस पर आम सहमति नहीं और दूसरे, इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने और चढ़ावे के लेखा-जोखा के कारण प्रशासनिक मामलों में दक्ष लोगों की भी आवश्यकता है।