जागरण संपादकीय: इसरो का नया अध्याय
इस अंतरिक्ष एजेंसी के लिए यह भी आवश्यक है कि वह हर मामले में आत्मनिर्भर बने और अपनी उत्कृष्टता सिद्ध करती रहे, क्योंकि आने वाले समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है।
HighLights
इसरो ने भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च किया।
यह सैटेलाइट वास्तविक समय की निगरानी और रणनीतिक डेटा देगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरणीय निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा द्वीप पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने सफलता का एक नया अध्याय लिखा। यह देश के पहले इमेजिंग सैटेलाइट के लांच के रूप में सामने आया। यह एक अत्याधुनिक अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है। यह देश को रियल टाइम निगरानी और रणनीतिक डाटा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह सैटेलाइट भारत को ऐसी क्षमता से लैस करेगा, जिसकी आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह सैटेलाइट किसी क्षेत्र पर लगातार नजर रखने की क्षमता से लैस है।
पृथ्वी से हजारों किमी ऊपर से यह सैटेलाइट भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ आसपास के सागरों और रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगाह रख सकेगा। यह बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवातों, जंगलों की आग, पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी में भी सहायक होगा। इसीलिए इसे अंतरिक्ष में भारत की आंख कहा जा रहा है। इसकी महत्ता का अनुमान इससे भी लगाया जा सकता है कि इसके प्रक्षेपण के समय नौसेना और वायुसेना के अधिकारी श्रीहरिकोटा में मौजूद थे। स्पष्ट है कि इस सैटेलाइट का उपयोग केवल नागरिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में भी मदद करेगा।
इसरो की नवीनतम सफलता अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। अंतरिक्ष में भारत की एक और छलांग का महत्व इससे बढ़ जाता है, क्योंकि कुछ समय से इसरो का भरोसेमंद राकेट पीएसएलवी लगातार नाकाम हो रहा था। इसके चलते इसरों की सैटेलाइट लांचिंग क्षमता को लेकर सवाल उठने लगे थे। यह अच्छा हुआ कि इसरो के विज्ञानियों ने इन सवालों का जवाब शानदार तरीके से दिया।
इस सफल मिशन ने भारत की अंतरिक्ष एजेंसी को एक नई ऊर्जा प्रदान की है। इसके बाद भी यह ध्यान रहे कि इसरो को अभी कई चुनौतियों का सामना करना है। इनमें कई सैटेलाइट की लांचिंग के साथ गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन भी है। गगनयान का पहला मानव रहित मिशन इसी वर्ष के अंत तक प्रस्तावित है। चूंकि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए भी खोल दिया गया है, इसलिए इसरो के सामने एक अन्य चुनौती कुशल मानव संसाधन को बनाए रखने की भी है।
सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसरो बजट और संसाधनों की कमी के चलते प्रतिभाओं के अभाव का सामना न करने पाए, क्योंकि यदि ऐसा होता है तो महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्यों पर विपरीत असर पड़ सकता है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए कि इसरो के भावी मिशन तय समय में पूरे हों। इस अंतरिक्ष एजेंसी के लिए यह भी आवश्यक है कि वह हर मामले में आत्मनिर्भर बने और अपनी उत्कृष्टता सिद्ध करती रहे, क्योंकि आने वाले समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है।












