संपादकीय: शिक्षकों की योग्यता
शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति ने शिक्षकों को सम्मानित किया, वहीं प्रधानमंत्री ने उनसे छात्रों की ड्रग और मोबाइल लत पर ध्यान देने का आग्रह किया
HighLights
प्रधानमंत्री ने छात्रों की ड्रग व स्क्रीन लत पर ध्यान देने को कहा।
शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा और गुणवत्ता सुधारना आवश्यक है।
योग्य शिक्षक ही भावी पीढ़ी का सही निर्माण कर सकते हैं।
शिक्षक दिवस के अवसर पर परंपरा के अनुसार समाज और देश निर्माण में शिक्षकों की महत्ता को रेखांकित करने के साथ जहां राष्ट्रपति ने देश के 82 शिक्षकों को सम्मानित किया, वहीं प्रधानमंत्री ने उनसे भेंट की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से छात्रों की ड्रग की लत और उनके स्क्रीन टाइम पर नजर रखने का आग्रह किया।
ऐसा किया जाना समय की मांग है, क्योंकि छात्र नशे की चपेट में तो आ ही रहे हैं, वे मोबाइल के भी लती होते जा रहे हैं। इस लत के लिए सोशल मीडिया कहलाने वाले डिजिटल प्लेटफार्म भी जिम्मेदार हैं। यह सरकार को भी देखना होगा कि छात्र मोबाइल की लत का शिकार होने से कैसे बचें? इसी के साथ सरकार को इस पर भी ध्यान देना होगा कि योग्य शिक्षक कैसे तैयार हों?
इसके लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम की समीक्षा की जानी चाहिए। यह देखा जाना समय की मांग है कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान वास्तव में योग्य शिक्षक तैयार कर पा रहे हैं या नहीं?
इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि जिला स्तर पर डायट अर्थात डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन और ट्रेनिंग संस्थान शिक्षकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं और इन संस्थानों की निगरानी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की ओर से की जा रही है, क्योंकि यह बार-बार सामने आ रहा है कि शिक्षकों के प्रशिक्षण का काम सही तरह नहीं हो पा रहा है। बेहतर शिक्षक तब तैयार होंगे, जब उन्हें प्रशिक्षित करने वाले ट्रेनर योग्य होने के साथ अपने दायित्व के प्रति समर्पित होंगे।
एक समय था, जब शिक्षण के प्रति रुचि रखने वाले ही शिक्षक बनने के लिए आगे आते थे, लेकिन आज ऐसा नहीं है। आज जब बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती हो रही है और किसी तरह सरकारी नौकरी पाने की चाह रखने वाले भी शिक्षक बन रहे हैं, तब उनकी योग्यता का ध्यान रखा ही जाना चाहिए। इस उद्देश्य की पूर्ति तभी हो पाएगी, जब शिक्षकों को प्रशिक्षित करने वाले संस्थान उत्तम कोटि के होंगे। यह ठीक नहीं कि ये संस्थान संसाधनों के साथ योग्य प्रशिक्षकों के अभाव का सामना कर रहे हैं।
आखिर जब शिक्षक ही योग्य और सक्षम नहीं होंगे, तब वे भावी पीढ़ी को निखारने का काम कैसे करेंगे? ध्यान रहे कि भावी पीढ़ी तैयार करने में सबसे महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व का निर्वाह अध्यापकों को ही करना है। समाज में नैतिकता और मानवीय मूल्यों की स्वीकार्यता अध्यापकों के अनुकरणीय आचरण से ही आएगी।
यह सही है कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष बल दिया गया है, लेकिन अभी यह काम कागजों पर ही अधिक दिखता है। चूंकि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए राज्यों को भी योग्य शिक्षकों को तैयार करने के लिए सक्रिय होना होगा।












