सुरसा कौन थीं? जानिए नागों की माता का पौराणिक इतिहास, हनुमान जी की परीक्षा और रोहिणी का अवतार
पौराणिक कथाओं में सुरसा का वर्णन बेहद दिलचस्प और रहस्यमयी है। चलिए पढ़ते हैं सुरसा के अलग-अलग अवतार के बारे में।
-1787652964826_m.webp)
सुरसा के जीवन का रहस्य (AI-Generated Image)
HighLights
सुरसा नागों की माता और महर्षि कश्यप की पत्नी थीं
सुंदरकांड में हनुमान जी की बुद्धि और शक्ति की परीक्षा ली
देवी भागवत के अनुसार रोहिणी के रूप में बलराम की माता बनीं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पौराणिक ग्रंथों में सुरसा का विवरण अलग-अलग संदर्भों में एक बेहद महत्वपूर्ण और बहुआयामी पात्र के रूप में मिलता है। विभिन्न पुराणों में उनके जन्म और वंश की कथाएं अलग-अलग तरह से बताई गई हैं। वाल्मीकि रामायण के अरण्य कांड के अनुसार, दक्ष प्रजापति की पुत्री क्रोधवशा की दस कन्याओं में से एक सुरसा थीं। जब महर्षि कश्यप ने उनसे विवाह किया, तो उनसे नागों (नागवंश) का जन्म हुआ। वहीं, महाभारत के आदि पर्व के अनुसार, सुरसा से अनला, रुहा और विरुधा नाम की तीन पुत्रियां भी उत्पन्न हुई थीं।
दूसरी ओर, स्कंद पुराण के असुर कांड में सुरसा के जन्म की एक अलग कथा मिलती है। देवासुर संग्राम के समय जब अधिकांश असुर मारे गए, तब एक असुर मृत्यु के भय से भागकर पाताल लोक चला गया था। सुरसा उसी असुर की पुत्री थीं। महर्षि कश्यप से विवाह के बाद सुरसा ने अंगारका (सिंहिका) और अजमुखी नाम की दो पुत्रियों तथा सुरपद्म, सिंहवक्त्र, तारकासुर और गोमुख नाम के चार पुत्रों को जन्म दिया। इसके अलावा, इसी पुराण के अनुसार दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने सुरसा को सब कुछ नष्ट करने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र भी सिखाया था।
सुंदरकांड में क्या है वर्णन?
सुरसा की सबसे प्रसिद्ध घटना वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में आती है। जब हनुमान जी सीता जी की खोज में समुद्र लांघकर लंका की ओर बढ़ रहे थे, तब देवों और गंधर्वों ने उनकी शक्ति और बुद्धि की परीक्षा लेने के लिए सुरसा को भेजा गया। सुरसा ने पर्वत जैसा विशाल और भयानक रूप धारण कर हनुमान जी का रास्ता रोक लिया। जब सुरसा ने अपना मुंह सौ योजन तक चौड़ा फैला लिया, तब हनुमान जी ने बुद्धिमानी से अपना शरीर एक उंगली जितना छोटा कर लिया, वे तुरंत सुरसा के मुंह में प्रवेश करके उनके कान से बाहर निकल आए। हनुमान जी की इस चतुराई और सामर्थ्य से प्रसन्न होकर सुरसा ने उन्हें कार्य में सफलता का आशीर्वाद दिया।
देवी भागवत का रहस्य
सुरसा के जीवन का एक और बड़ा अध्याय देवी भागवत चौथे स्कंध और श्रीमद्भागवत पुराण के 10वें स्कंध में दर्ज है। एक बार कश्यप ऋषि ने यज्ञ के लिए वरुण देव की गाय चुरा ली और सुरसा तथा अदिति ने उस गाय को अपने आश्रम में छिपाकर रखा। वरुण और ब्रह्मा जी के श्राप के कारण 28वें द्वापर युग में कश्यप ऋषि को वसुदेव, अदिति को देवकी और सुरसा को रोहिणी के रूप में गोकुल में जन्म लेना पड़ा। इसी अवतार में सुरसा (रोहिणी) भगवान बलराम (बलभद्रराम) की माता बनीं। इसके अलावा, महाभारत के सभा पर्व के अनुसार सुरसा ब्रह्मा जी की सभा में विराजमान होकर उनकी उपासना भी करती हैं।
यह भी पढ़ें- 12वां ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर: जानें इस प्राचीन शिव मंदिर का रोचक इतिहास और पौराणिक कथा
यह भी पढ़ें- मां लक्ष्मी ने भगवान गणेश को क्यों बनाया अपना दत्तक पुत्र? पढ़ें इस अनोखे रिश्ते की पौराणिक कथा
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
