विचार: तकनीक आधारित विकास को गति
विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन विकसित भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
HighLights
भारत तकनीक आधारित विकास से 'विकसित भारत' की ओर।
ईएसटीआईसी 2026 वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करेगा।
विज्ञान, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग महत्वपूर्ण।
डॉ. जितेंद्र सिंह। फरवरी 2006 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर कहा था, 'समाज में परिवर्तन लाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार मुख्य रूप से विज्ञान से ही आएगा।' लगभग दो दशक बाद कलाम जी के ये शब्द पूरी तरह सही सिद्ध हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तकनीक आधारित विकास को गति देते हुए ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की इस प्रगति पर पूरी दुनिया का ध्यान गया है। वैज्ञानिक प्रगति का वास्तविक मूल्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाने, समस्याओं का समाधान करने और नए अवसर पैदा करने की उसकी क्षमता में निहित है।
भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षाएं केवल आर्थिक विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं हैं। इनमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, अधिक उत्पादक कृषि, मजबूत उद्योग, युवाओं के लिए अधिक अवसर और प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर में सुधार भी शामिल हैं। इन सभी आकांक्षाओं को पूरा करने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारा दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि हम जो ज्ञान विकसित करें, वह सार्थक बदलाव लाने का माध्यम बने। यही उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) 2026 का व्यापक उद्देश्य है। आज से आरंभ हो रहा इसका दूसरा संस्करण ईएसटीआईसी 2025 में शुरू हुए राष्ट्रीय संवाद को ही आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उनके व्यावहारिक उपयोग के बीच संबंधों को और मजबूत करना है। यह सम्मेलन विज्ञानियों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी लोगों, उद्यमियों और युवा शोधकर्ताओं को एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए एक मंच पर लाता है।
आज हमारे सामने कुछ ऐसे सवाल हैं-वैज्ञानिक प्रगति किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में किस तरह मदद कर सकती है? अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है? उद्योग उन्नत प्रौद्योगिकियां विकसित कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कैसे कर सकते हैं और आयात पर निर्भरता कैसे कम कर सकते हैं? युवाओं के लिए नए अवसर कैसे पैदा किए जा सकते हैं? इनके जवाब कोई एक संस्थान या विषय अपने दम पर नहीं दे सकता। इसके लिए विज्ञानियों को उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करना होगा, शोधकर्ताओं को व्यावहारिक जरूरतों को समझना होगा और नीति-निर्माताओं को ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिसमें संभावनाओं से भरे विचारों को परखा और विकसित किया जा सके।
ईएसटीआईसी इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, महासागर विज्ञान एवं समुद्री प्रौद्योगिकी, क्वांटम संचार, सेमीकंडक्टर, कृषि प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, उन्नत स्वास्थ्य सेवा, इमर्सिव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान को समाहित किए हुए है। इनका दायरा प्रयोगशालाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में प्रगति भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकती है। जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण में नई राह खोल सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स में होने वाले विकास औद्योगिक प्रक्रियाओं को बदल सकते हैं, जबकि कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्य अधिक कुशल एवं टिकाऊ कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दे सकते हैं। सबसे बड़ी चुनौती इन संभावनाओं को व्यावहारिक उपयोग में बदलने की है।
भारत की वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाएं अंततः उसके युवाओं की प्रतिभा पर निर्भर करेंगी। किसी शोधार्थी के पास कोई उपयोगी विचार है, तो उसे प्रस्तुत करने, अनुभवी विज्ञानियों से सीखने और ऐसे लोगों से जुड़ने का अवसर मिलना चाहिए, जो उस विचार को उपयोगी रूप देने में मदद कर सकें। ईएसटीआईसी इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करता है। ‘नेक्स्ट-जेन डिस्कवरी एक्सपो’ में देश की अनुसंधान क्षमताओं और उभरते डीप-टेक तंत्र को दिखाया जाएगा, जबकि ‘इनोवेशन एक्सचेंज हब’ तकनीकों और संभावित सहयोग के अवसरों पर संवाद को बढ़ावा देगा।
वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता को तेजी से एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। अनुसंधान संस्थानों के पास वैज्ञानिक विशेषज्ञता है, स्टार्टअप उद्यमशीलता की ऊर्जा लेकर आते हैं, उद्योग जगत उत्पादन संबंधी आवश्यकताओं और बाजार की जरूरतों को समझता है, जबकि निवेशक इस पूरी प्रक्रिया के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। जब ये सभी क्षमताएं एक साथ आती हैं, तो अनुसंधान को उपयोगी उत्पादों और सेवाओं में बदलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ईएसटीआईसी ऐसी साझेदारियों को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करता है। इसके तकनीकी सत्रों और प्रदर्शनियों का उद्देश्य ऐसे संवाद और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना भी है, जिनसे आपसी सहयोग के नए रास्ते खुल सकें।
विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए हमारी सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि हम कौन-सी खोजें करते हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उन खोजों से लोगों के जीवन में कितना बदलाव आता है। यही ईएसटीआईसी के पीछे की व्यापक आकांक्षा है।
(लेखक केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार हैं)

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