सैनिकों की धरती बिंदुखत्ता को सैनिक पुत्र सीएम धामी से उम्मीदें, यहां के 15 युवाओं ने देश सेवा में दिया सर्वोच्च बलिदान
सैनिक बहुल बिंदुखत्ता के निवासी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राजस्व गांव का दर्जा मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो

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प्रकाश जोशी, लालकुआं। सैनिक बाहुल्य क्षेत्र बिंदुखत्ता की जनता को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से विशेष उम्मीदें हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वयं 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में भाग लेने वाले पूर्व सैनिक स्व. शेर सिंह धामी के पुत्र हैं। ऐसे में वे सैनिकों के त्याग, पहाड़ के संघर्षपूर्ण जीवन और सीमांत क्षेत्रों की पीड़ा को भली-भांति समझते हैं। इसलिए बिंदुखत्ता के पूर्व सैनिकों, शहीदों के स्वजन और क्षेत्रवासियों को उनसे न्याय की अपेक्षा होना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के 15 युवाओं ने देश सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। अनेक पूर्व सैनिक चीन और पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों में लड़ चुके हैं, इसके बावजूद बिंदुखत्ता को उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। वन अधिकार समिति के बैनर तले ग्रामीण कई वर्षों से वनाधिकार अधिनियम के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
19 जून 2024 को बिंदुखत्ता के राजस्व गांव संबंधी दावों को जिला स्तरीय समिति द्वारा स्वीकृत कर शासन को भेज दिया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि 18 माह बाद अधिसूचना जारी करने के बजाय फाइल वापस भेज दी गई, जिससे लोगों में भारी रोष है। उनका कहना है कि पूर्व में की गई राजस्व गांव की घोषणा को निरस्त करना और फाइल लौटाना न्यायसंगत नहीं है।
शहीद की पत्नी की वेदना: “बलिदान का यह कैसा इनाम?”
मेरे पति अशोक चक्र विजेता बलिदानी मोहन नाथ गोस्वामी ने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका विश्वास था कि जिस मातृभूमि के लिए वे शहीद हो रहे हैं, वही मातृभूमि उनके परिवार और उनके गांव का भी सम्मान करेगी। लेकिन आज विडंबना यह है कि उसी गांव के लोग अपने अधिकारों के लिए दर-दर गुहार लगाने को मजबूर हैं। एफआरए के तहत सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद बिंदुखत्ता को आज तक राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिला है। - भावना गोस्वामी, वीरांगना
19 जून 2024 को जब जिला समिति ने दावा स्वीकृत कर दिया था, तो अधिसूचना में देरी क्यों हो रही है? सरकार को वनाधिकार कानून के तहत शीघ्र राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करनी चाहिए। - कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, अध्यक्ष, राजस्व गांव संघर्ष समिति
15 शहीदों की धरती को आज तक राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिला है। तीन पीढ़ी बीत जाने के बाद भी यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। पहले देश की सुरक्षा के लिए युद्ध लड़े, अब अपने हकों के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं।- खिलाफ सिंह दानू, अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संगठन
हम दशकों से राजस्व गांव की मांग कर रहे हैं, लेकिन हमें हमारा जायज हक नहीं दिया जा रहा है। हमें राजस्व गांव चाहिए। चाहे वह एफआरए के तहत मिले या निर्वनीकरण के तहत। - कुंदन सिंह मेहता, पूर्व सैनिक, बिंदुखत्ता
सरकार एफआरए के तहत राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करने के बजाय वन भूमि अनारक्षण का प्रस्ताव केंद्र के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट को भेजकर प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से उलझा रही है। सरकार और जनता को इस स्थिति को गंभीरता से समझना चाहिए। - भुवन भट्ट, सचिव, वनाधिकार समिति, बिंदुखत्ता
यदि अगले दो माह में बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित नहीं किया गया, तो व्यापक आंदोलन होगा। इस बार आंदोलन सरकार के साथ-साथ उन राजनीतिक दलों के खिलाफ भी होगा। - अर्जुन नाथ गोस्वामी, अध्यक्ष, वनाधिकार समिति, बिंदुखत्ता
यदि मुख्यमंत्री का कहना है कि एफआरए के तहत दस्तावेज पूर्ण नहीं हैं, तो सरकार को निर्वनीकरण के माध्यम से राजस्व गांव घोषित करना चाहिए। लेकिन कार्रवाई ईमानदारी और पारदर्शिता से होनी चाहिए। - किशन बघरी, माले नेता
मुख्यमंत्री के नेतृत्व पूरे प्रदेश में विकास कार्य किए जा रहे है, बिंदुखत्ता वासियों को भी उम्मीद है कि जल्द ही वह यहां के लोगो की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए राजस्व गांव की सौगात देंगे। - नवीन पपोला, भाजपा, मंडल अध्यक्ष, बिंदुखत्तापिछले 10 साल से राज्य में भाजपा की सरकार है, हर चुनाव में बिंदुखत्ता वासियों को राजस्व गांव बनाने का वादा कर वोट बटोरे जाते है। लेकिन जीतने के बाद फिर आश्वासनों में पांच साल बीत जाते है। - पुष्कर दानू, कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष, बिंदुखत्ता
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