बिंदुखत्ता में 25 साल बाद फिर दिखी पुरानी एकजुटता, राजस्व गांव के लिए संघर्ष
लालकुआं के बिंदुखत्ता में 25 साल बाद राजस्व गांव के मुद्दे पर लोगों ने एकजुटता दिखाई, जिसने 90 के दशक ...और पढ़ें

राजस्व गांव के मुद्दे पर लोगों ने दिखाई एकजुटता। फाइल

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, लालकुआं। बुधवार को बिंदुखत्ता वासियों ने 25 वर्ष बाद एकजुटता का परिचय दिया। मुद्दा भले ही राजस्व गांव का रहा लेकिन इस आंदोलन ने लोगो के जेहन में 90 के दशक की याद ताजा कर दी।
दरअसल उत्तराखंड राज्य गठन से पूर्व क्षेत्र की विधानसभा और लोकसभा सीटों का दायरा अत्यंत विस्तृत हुआ करता था। उस समय बिंदुखत्ता मूलभूत सुविधाओं के लिहाज से काफी पिछड़ा क्षेत्र माना जाता था। बिजली, सड़क और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।
बिंदुखत्ता में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों से आकर लोग बसे है। विविध पृष्ठभूमि से आने के बावजूद लोगों के बीच गहरा भाईचारा विकसित हुआ। राजनीतिक दलों की सक्रियता सीमित होने के कारण स्थानीय नागरिक हक-हकूक और मूलभूत समस्याओं के समाधान के साथ ही एक दूसरे में हक हकुक के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठाते थे। इसी सामाजिक एकजुटता के बल पर बिंदुखत्ता ने बिना राजस्व गांव का दर्जा प्राप्त किए भी विकास के कई मानकों पर स्वयं को स्थापित किया।
राज्य गठन के बाद विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का दायरा अपेक्षाकृत छोटा हुआ। इसके साथ ही क्षेत्र में जनसंख्या और बसासत तेजी से बढ़ी। राजनीतिक गतिविधियों में वृद्धि हुई और विभिन्न दलों एवं संगठनों की सक्रियता गांव-गांव तक पहुंची।
सोशल मीडिया के विस्तार के साथ लोग घरों में कैद रहने लगे। परिणामस्वरूप स्थानीय स्तर पर गुटबाजी बढ़ी और सामाजिक एकजुटता प्रभावित हुई। विश्लेषकों का मानना है कि इस विखंडन के कारण एकजुटता मंद पड़ गई।
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