वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरा बिंदु के करीब तक पहुंचा, तटवर्ती क्षेत्रों में नौका ही आवागमन का साधन
वाराणसी में गंगा और वरुणा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। ...और पढ़ें
HighLights
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचा।
तटवर्ती क्षेत्रों में नाव ही आवागमन का सहारा।
मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह छतों पर।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पूर्वांचल सहित वाराणसी में विभिन्न नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुमानों में बारिश की भी संभावना है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब आगे भी कुछ समय तक जलस्तर में बढ़ोत्तरी का क्रम बना रह सकता है। इसकी वजह से तटवर्ती क्षेत्रों में दुश्वारियां और बढ़ना तय है।
वाराणसी में गंगा में बाढ़ के बाद से ही गंगा आरती स्थल छत पर कुछ लोगों के साथ ही स्थानांतरित की जा चुकी है। जबकि एक दिन पूर्व बुधवार को ही शीतला माता मंदिर के छत पर पानी बहने लगा था। इस लिहाज से सीजन में यह बाढ़ का सर्वाधिक रौद्र रूप सामने आया है। जबकि मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर गंगा का जलस्तर व्यापक रूप से चढ़ने के बाद गलियों और छतों पर शवदाह करने की नौबत आ चुकी है। जबकि कई लोगों को शवदाह के लिए कतार लगानी पड़ रही है।
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वहीं दूसरी ओर गंगा में बाढ़ के बाद पलट प्रवाह से वरुणा भी उफान पर है। सैकड़ों घर और दर्जनों मोहल्लों में पानी प्रवेश करने के बाद लोगों के सामान खरीदने के लिए आवागमन को नाव ही सहारा बची है। नौकाओं पर ही सफर कर लोग बाजार हाट कर पा रहे हैं। स्कूल ना जा पाने से छात्र भी घर में कैद हैं। जबकि जहां निचले स्थानों पर पानी भर चुका है वहां के लोग बाढ़ राहत शिविर या दूसरे किराए के घरों का रुख कर चुके हैं।
जबकि बाढ़ का दौर अब भी लगातार जारी होने से गलियों में नौकाएं ही यातायात का एक मात्र साधन बची हैं। माना जा रहा है कि अब जल्द ही शहर के अन्य निचले क्षेत्रों में भी नौका संचालन की नौबत आ सकती है। इस लिहाज से कुछ वर्षों में बनारस में बाढ़ का यह सबसे अधिक रौद्र रूप माना जा रहा है। जबकि अगस्त माह में यूपी भर में सवा सौ वर्षों में 12 वां मौका है जब भारी बारिश दर्ज की गई है।
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वाराणसी में केंद्रीय जल आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार बीते चौबीस घंटों में वाराणसी में गुरुवार की सुबह आठ बजे तक 28.2 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है। गंगा का यहां चेतावनी बिंंदु 70.262 मीटर है, जिसके ऊपर ही गंगा बह रही हैं। जबकि खतरा बिंंदु 71.262 मीटर है। वहीं अब तक सर्वकालिक जलस्तर अधिकतम 73.901 मीटर दर्ज किया गया है। वहीं गुरुवार की सुबह तक गंगा का जलस्तर 70.56 मीटर हो चुका है। जबकि 1cm/hr की गति से गंगा का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है। वहीं बीते चौबीस घंटों में 28cm तक जलस्तर बढ़ चुका है।
