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परिवार की पांचवीं पीढ़ी के सैन्य अफसर बने लेफ्टिनेंट संकल्प सिंह, सेना में हासिल किया कमीशन

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 06 Sep 2026 06:11 AM (IST)

Meerut News: मेरठ के लेफ्टिनेंट संकल्प सिंह ने ओटीए गया से कमीशन प्राप्त कर परिवार की पांचवीं पीढ़ी के रूप ...और पढ़ें

स्‍वजन के साथ लेफ्टिनेंट संकल्प सिंह।

स्‍वजन के साथ लेफ्टिनेंट संकल्प सिंह।  

HighLights

  1. लेफ्टिनेंट संकल्प सिंह ने ओटीए गया से हासिल किया कमीशन

  2. परि‍वार की पांच पीढ़ियों की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ाई।

जागरण संवाददाता, मेरठ। देशसेवा का जज्बा जब पीढ़ियों से परिवार की विरासत बन जाए तो हर नई उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण बन जाती है।

डिफेंस काॅलोनी न‍िवासी लेफ्टिनेंट संकल्प सिंह ने आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) गया से सैन्य कमीशन प्राप्त कर परिवार की पांचवीं पीढ़ी के रूप में देशसेवा की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है। कमीशनिंग समारोह में वियतनाम पीपुल्स आर्मी के डिप्टी चीफ आफ द जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल ले वान हुओंग रिव्यूइंग आफिसर रहे।

संकल्प सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा सेंट मेरीज एकेडमी मेरठ और माउंट सेंट मेरीज दिल्ली कैंट से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बीटेक की पढ़ाई पूरी की और सैन्य प्रशिक्षण के बाद ओटीए गया से सेना में कमीशन हासिल किया। संकल्प का परिवार लंबे समय से भारतीय सेना की सेवा और त्याग की मिसाल रहा है।

उनके पर परदादा कर्नल श्याम सिंह 3 राजरिफ में कमीशन हुए थे। वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने पुंछ क्षेत्र में 3 राजरिफ की कमान संभाली। उनके परदादा सुबेदार कर्म सिंह ने 17 हैदराबाद (4 कुमाऊं) में सेवाएं दीं।

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परिवार की सैन्य परंपरा आगे भी मजबूती से जारी रही

संकल्प के दादा कर्नल नरेंद्र सिंह का भी 3 राजरिफ के साथ जुड़ाव रहा और डोकलाम क्षेत्र में यूनिट की कमान संभालने का गौरव हासिल हुआ। संकल्प के पिता कर्नल रवि राजा भी 3 राजरिफ में कमीशन हुए और करीब 20 वर्षों तक देश की सेवा की। उनके चाचा मेजर डा. तरुण सिंह ने भी 3 राजरिफ में रेजिमेंटल मेडिकल आफिसर (आरएमओ) के रूप में सेवाएं दीं। वहीं चाची वीना सहारन ने भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं देकर परिवार की इस गौरवशाली परंपरा में योगदान दिया।

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संकल्प के कमीशनिंग समारोह में दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची और बहन की मौजूदगी इस उपलब्धि को और भावुक एवं यादगार बना गई। परिवार की पांच पीढ़ियों की देशसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संकल्प का सेना में कदम रखना न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे परिवार के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। यह क्षण उस संस्कार और समर्पण की मिसाल है, जिसमें व्यक्तिगत सपनों से ऊपर राष्ट्रसेवा को स्थान दिया जाता है।

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