कानपुर में सरकारी 'VIP' नंबरों से शौक, अफसरों के नीलाम वाहनों से रौब दिखाने वाले 126 खरीदार ब्लैक लिस्टेड
कानपुर में सरकारी विभागों द्वारा नीलाम किए गए वीआईपी नंबर वाले वाहनों के खरीदार अभी भी उन्हीं नंबरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे टोल बचाने और रौब गा ...और पढ़ें

एआरटीओ कार्यालय में खड़े सरकारी वाहन। जागरण
निर्मल पांडेय, कानपुर। एडीजी (कानून व्यवस्था), लेबर कमिश्नर, श्रम आयुक्त समेत अन्य अफसरों के वीआइपी नंबरों वाले वाहनों से खरीदार सड़क पर रौब गांठ रहे हैं। ये वाहन वर्षों पहले नीलाम हुए, पर उनके न नंबर बदले गए और न ही उनकी लोकेशन ट्रेस की गई है। वाहन पर ''''जी'''' सीरीज का नंबर होने से हाइवे पर टोल भी बचा रहे हैं। ऐसे 145 वाहनों की छटनी कर कार्रवाई के लिए सूची शासन ने एआरटीओ को भेजी है।
इन वाहनों के खरीदारों को नोटिस जारी हो गए हैं। 19 लोगों ने वाहनों के नंबर बदलवा भी लिए हैं। शेष 126 वाहनों को ब्लैक लिस्टेड कर उनके ट्रांसफर, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) व बीमा को प्रतिबंधित कर दिया गया है। परिवहन विभाग के मुख्यालय से नीलाम हुए राजकीय वाहनों सूची मिलते ही आरटीओ-एआरटीओ की सक्रियता बढ़ गई है।
कार्रवाई में तेजी दिखाते हुए एकसाथ और एक ही तारीख में 145 वाहन खरीदारों को नोटिस जारी हुई। इसके बाद अभी कुछ दिनों पहले इन सभी को रिमाइंडर भी जारी हुआ है। इसमें हिदायत दी गई है कि नीलाम राजकीय वाहनों को आवंटित पंजीयन चिह्न निरस्त कराकर नया पंजीयन अगले सात दिन में प्राप्त करें, अन्यथा आपके राजकीय पंजीयन चिह्न निलंबित कर निरस्त कर दिया जाएगा।
कार कमिश्नर के नाम, फर्राटा भर रहा कोई और
अफसरों के नाम पंजीकृत वाहनों को नीलाम करने के बाद स्वामित्व परिवर्तन में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। एआरटीओ के रिकार्ड में कार (यूपी-78-बीजी-0333) आज भी कमिश्नर कानपुर डिवीजन के नाम पंजीकृत है। नीलाम के बाद इसका स्वामित्व परिवर्तन नहीं किया गया है। ऐसे ही कार (यूपी-78-बीजी-0381) सचिव बोर्ड श्रम आयुक्त यूपी के नाम से पंजीकृत है। ये दोनों कारें भी नीलाम हो चुके वाहनों की सूची में दर्ज हैं, पर यह कब नीलाम हुई, किसने खरीदीं। ये विवरण एआरटीओ के पास नहीं है। इसका बीमा है, पर पीयूसी नहीं है।
खबरें और भी
केस-1 :
लेबर कमिश्नर की बोलेरो (यूपी-78-बीजी-0050) 27 जुलाई 2017 को नीलामी में गोपालनगर किदवईनगर के जय कुमार तिवारी ने खरीदी थी। 21 जून 2022 को इसका एचएसआरपी के मामले में 5000 हजार रुपये का चालान भी कट चुका है। वाहन का बीमा है, पर पीयूसी नहीं है।
केस-2 :
अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत की एंबेस्डकर कार (यूपी-78-बीजी-0171) को 21 दिसंबर 2016 को नीलामी में चमनगंज के उजैर अहमद ने खरीदी थी। इस कार का पीयूसी, बीमा अवधि खत्म हो चुकी है।
केस-3 :
रिजर्व बैंक आफ इंडिया के नाम से पंजीकृत कार (यूपी-78-बीजी-0873) को 7 अगस्त 2017 को नीलामी में रेलवे लाइन नवाबगंज के इसरार अहमद ने खरीदा था। कार का बीमा व पीयूसी नहीं है।
नीलामी के बाद वाहन पर जी सीरीज बने रहना नियम विरुद्ध
आरटीओ-एआरटीओ को शासन से निर्देश हुए हैं कि उप्र मोटरयान नियमावली-1998 में निहित प्राविधान के क्रम में जी प्रत्यय वाली वाहन सीरीज केवल राजकीय वाहनों के पंजीयन में आरक्षित है। जी सीरीज का आरक्षण केवल सरकारी स्वामित्व तक सीमित है। यदि कोई राजकीय वाहन कंडम/निस्प्रयोज्य घोषित किए जाने के बाद नीलामी से व्यक्ति के सुपुर्द किया जाता है तो सरकारी स्वामित्व समाप्त होते ही उसे पूर्व से आवंटित राजकीय पंजीयन चिह्न का बना रहना अवैध एवं नियम विरुद्ध है।
नीलाम हुए वाहनों पर 'जी' सीरीज नंबर की जगह निजी स्वामित्व का नया नंबर प्राप्त कर लेने को संबंधित को नोटिस जारी हो चुके हैं। जब तक ये वाहन स्वामी नया नंबर नहीं प्राप्त करते हैं, उस समय तक बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र, ट्रांसफर, फिटनेस प्रतिबंधित कर दिया है। सड़क पर यदि चलते मिलेंगे तो सीज करने के साथ ही वाहन स्वामी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी करेंगे।
- आलोक कुमार, एआरटीओ प्रशासन
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