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    कानपुर IIT के साथ मिलकर सोनल ने कचरे को बना दिया 'सोना', बेकार प्लास्टिक से बनया सबसे मजबूत टाइल्स और फर्नीचर

    Updated: Sat, 09 May 2026 06:54 AM (IST)

    सोनल शुक्ला ने आईआईटी कानपुर से जुड़कर गैर-पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक कचरे से टिकाऊ फुटपाथ टाइल्स और फर्नीचर बनाए हैं। उनके स्टार्टअप 'ई-कांशियस' ने 1 ...और पढ़ें

    नवाचार करने वाली सोनल शुक्ला। स्वयं

    नवाचार करने वाली सोनल शुक्ला। स्वयं

    HighLights

    1. आइआइटी से जुड़ री-सायकल नहीं होने वाली प्लास्टिक को भी नवाचार करने वाली सोनल ने बना डाला उपयोगी 

    2. बनाए फुटपाथ में लगाने वाले टाइल्स, 5000 से ज्यादा उपयोगी वस्तुएं, पार्क बेंच, स्कूल फर्नीचर व डस्टबिन बेचे

    अखिलेश तिवारी, कानपुर। प्लास्टिक वेस्ट को बेस्ट बनाने का प्रयास तो कई लोग कर रहे हैं, लेकिन आइआइटी से जुड़ नवाचार करने वाली सोनल शुक्ला ने प्लास्टिक के सर्वाधिक वेस्ट को भी अत्यधिक उपयोगी बना डाला है। आइआइटी से जुड़ीं सोनल ने री-सायकल नही होने लायक प्लास्टिक से भी पेवमेंट यानी फुटपाथ टाइल्स बना डाली हैं।

    इसका उपयोग सड़क के किनारे फुटपाथ व पार्कों में रास्ते में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उनके स्टार्टअप की सराहना अपने नियमित कार्यक्रम मन की बात के अगस्त, 2024 में 113वें संस्करण में कर चुके हैं।

    आईआईटी के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर एसआइआइसी के माध्यम से अपने स्टार्टअप ई-कांशियस से नवाचारों को नया आयाम दे रहीं कोयला नगर निवासी इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन में बीटेक सोनल बताती हैं कि प्लास्टिक को री-सायकल करने के दौरान एक स्तर आता है, जहां खराब हो चुकी प्लास्टिक की मदद से कोई नया उत्पाद तैयार नहीं हो पाता।

    iit kanpur innovation with sonal

    प्लास्टिक वेस्ट से तैयार फुटपाथ टाइल। जागरण


    उन्होंने ऐसे ही प्लास्टिक वेस्ट से पेवमेंट टाइल्स बनाई हैं, जो सीमेंट व मिट्टी से बनी टाइल्स से ज्यादा टिकाऊ हैं। दाम भी सीमेंट टाइल्स के लगभग बराबर है। प्लास्टिक वेस्ट से तैयार पेवमेंट टाइल्स को प्लास्टो-ऐश टाइल्स या प्लास्टिक स्टोन टाइल्स भी कहा जाता है। ये पर्यावरण अनुकूल सामग्री के रूप में अनुपयोगी या सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरे व फ्लाई ऐश, रेत, या पत्थर की धूल के मिश्रण को उच्च तापमान पर पिघलाने के बाद सांचे में डालकर बनाई जाती हैं।

    वह प्लास्टिक वेस्ट से सजावटी वस्तुएं भी तैयार कर रही हैं। इसमें फर्नीचर के आकर्षक डिजाइन लोग खूब पसंद कर रहे हैं। सर्कुलर इकोनामी व पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य के साथ ही उन्होंने अपने स्टार्टअप की शुरुआत की है। प्लास्टिक वेस्ट की सर्वाधिक उपलब्धता दिल्ली-एनसीआर में होने के कारण उन्होंने अपनी यूनिट भी हरियाणा के सोनीपत में लगाई है। वहां प्लास्टिक एकत्र कर श्रेडर मशीन के माध्यम से छोटे-छोटे फ्लेक्स में बदला जाता है।

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    फ्लेक्स को कंप्रेस (दबाव) कर मजबूत बोर्ड तैयार किए जाते हैं, जिन्हें सुंदर बेंच, कुर्सियों व प्लांटर्स में बदलते हैं। अब तक वह 1000 टन से ज्यादा प्लास्टिक को री-सायकल कर लैंडफिल में जाने से रोकने में सफल रही हैं। 5000 से ज्यादा उपयोगी वस्तुएं, पार्क बेंच, स्कूल फर्नीचर व डस्टबिन बनाकर बेच चुकी हैं। )।