बुंदेलखंड में फिर पड़ेगा सूखा? अल नीनो के साये में 2026 का मानसून; UP कृषि मंत्री ने कानपुर में जताई बड़ी आशंका
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अल नीनो के प्रभाव से बुंदेलखंड में सूखे की आशंका जताई है। उन्होंने किसानों से कम पानी वाली फसलों, विशेषकर दलहन, और प् ...और पढ़ें

सीएसए के कैलाश भवन में कृषि विभाग द्वारा आयोजित मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी को संबोधित करते कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही । जागरण
HighLights
सीएसए में हुई कानपुर, झांसी एवं चित्रकूट धाम मंडल की संयुक्त मंडलीय गोष्ठी
बुंदेलखंड के किसानों को कम पानी वाली फसलें उगाने की सलाह
प्राकृतिक खेती और दलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया
जागरण संवाददाता, कानपुर। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने शुक्रवार को इस वर्ष मौसम में अल नीनो के असर से सूखा पड़ने की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि किसान पिछले दो माह से मौसम में हो रहे बदलावों को देख रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए विशेषकर बुंदेलखंड के किसानों को चाहिए कि वो कम पानी की लागत वाली फसलों पर जोर दें। वह चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कैलाश भवन में कृषि उत्पादन आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में कानपुर, झांसी एवं चित्रकूट धाम मंडल की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026 को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
कृषि मंत्री ने कहा कि वैदिक काल से प्राकृतिक खेती की जाती रही है, जिससे लोग स्वस्थ रहते थे। लेकिन वर्तमान में रासायनिक खाद के प्रयोग बढ़ने से विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न हो रहे हैं। प्रदेश में 110 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खाद्यान्न उत्पादन का विस्तार किया जाना है और गेंहू व धान आच्छादन कम करना है। प्रदेश में चार लाख हेक्टेयर दलहनी खेती का आच्छादन बढ़ाया जाना है। प्रदेश में इस वर्ष 95 करोड़ रुपये प्राकृतिक खेती योजना के अंतर्गत व्यय किया जाना है।
उन्होंने कहा कि धान की खेती करने की होड़ में ऐसे क्षेत्र जो दलहन फसलों की पहचान हुआ करते थे, वे पीछे हो गए। पूरे प्रदेश के दलहन उत्पादन में अकेले बुंदेलखंड का योगदान अधिक हुआ करता था। ऐसे क्षेत्रों में किसानों ने दलहन की फसलें लगानी कम कर दी। परिणामत: आज दालों का आयात करना पड़ रहा है। उन्होंने कृषि उत्पादकों की प्रदर्शनी का उद्घाटन कर किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती करने और मौसम के अनुसार फसल चयन की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत तभी होगा जब हम हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे। किसानों ने मंत्री के समक्ष कृषि क्षेत्र में आने वाली समस्याओं को बेबाकी से रखा। प्रमुख सचिव रवीन्द्र ने कहा कि किसान अपनी फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से कराएं। गोष्ठी में सीएसए कुलपति डा. संजीव गुप्ता, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, बीज विकास निगम के निदेशक टीएम त्रिपाठी, कृषि निदेशक डा. पंकज त्रिपाठी, आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता योगेश, अपर कृषि निदेशक आशुतोष मिश्रा, अनिल कुमार पाठक, डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह, झांसी मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे, संयुक्त कृषि निदेशक डा. आरएस वर्मा सहित 13 जिलों के सीडीओ व विभागीय अधिकारी व किसान मौजूद रहे।
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अधिकारी जिले की सीमा न स्वागत करने आएं या न छोड़ने
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में जनता से पेट्रोलियम पदार्थ जैसे डीजल, पेट्रोल व गैस व घरेलू गैस और खाद्य तेलों की खपत कम करने की अपील की है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वो कार पूलिंग की व्यवस्था को अपनाएं। आगामी गोष्ठियों और कार्यक्रमों में ये ध्यान रखें कि मंत्री या राज्यमंत्री को रिसीव करने के लिए अधिकारियों को जिले की सीमा पर आकर स्वागत करने और वापस छोड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने प्रदेश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों को सौ-सौ साइकिलें खरीदने को कहा है।
किसान गोपालन और कंपोस्ट बनाने को प्राथमिकता दें
उन्होंने कहा कि किसानों को गोपालन और कंपोस्ट बनाने को प्राथमिकता देनी होगी। किसान को गैस भी बनानी है और जहर मुक्त खेती करनी है। हर किसान को खुद से संकल्प लेना है कि वो खेतों में केमिकल फर्टिलाइजर का प्रयोग कम से कम करेंगे। अच्छे बीजों को लगाना शुरू करेंगे। केंद्र व राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती मिशन शुरू किया।
सूखे और बाढ़ के लिए जिम्मेदार है अलनीनो
अल नीनो एक जलवायु घटना है। इसमें प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इससे दुनियाभर के मौसम का चक्र बिगड़ जाता है, जिसके कारण कुछ इलाकों में भयंकर सूखा पड़ता है और कहीं मूसलाधार बारिश व बाढ़ आती है।
कृषि मंत्री के सामने छलका किसानों का दर्द
मंडलीय खरीफ गोष्ठी में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के सामने किसानों को बोलने का मौका मिला तो उनका दर्द छलक पड़ा। किसानों ने सरकारी सिस्टम में उपेक्षा किए जाने के आरोप लगाए। किसानों ने कहा कि लाइनमैन और बिजली विभाग के लोग आए दिन बिजली कनेक्शन काट जाते हैं। इस वजह से फसलों में समय से सिंचाई नहीं हो पाती है। जालौन के किसान शिवशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि जो गेंहू खरीद केंद्र चल रहे हैं इसमें सभी किसानों की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। न्याय पंचायत स्तर पर मूंग के कांटे नहीं लगे हैं।
महोबा के किसान ने ये बताई समस्या
महोबा से आए किसान महेश चंद ने कहा कि चार साल से गेंहू और मूंगफली नहीं बिक पा रहा है। इसके अलावा, कानपुर देहात के अधिकारी ने जिले में सोलर पंप का सर्विस सेंटर न होने से किसानों को दिक्कतें आने की बात कही। फर्रुखाबाद के अधिकारी ने कहा कि बाढ़ क्षेत्र एरिया है। इससे करीब नौ हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित होती है। तटबंध बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है और सर्वे हो चुका है। एक किसान ने कहा कि मक्का अधिक होने की वजह से बरसात से पहले इन्हें सुखाने में समस्या आती है। अधिकांश किसान सड़क पर मक्का सुखाने को मजबूर होते हैं। किसानों के लिए मक्का सुखाने वाली मशीन उपलब्ध कराई जाए।
इटावा के सीडीओ ने ये कहा
इटावा के सीडीओ ने कहा कि मक्का सुखाने के लिए एक मशीन खरीदने की जरूरत है। इसके लिए जल्द ही प्रस्ताव भेज देंगे। कानपुर नगर के सीडीओ ने कहा कि मोटा अनाज के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट की जरूरत है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने संबोधन में किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान कराने के लिए आश्वस्त किया।