चित्रकूट में रानीपुर टाइगर रिजर्व में दो किमी तक फैली भीषण आग, लपटों से घिरा आनंदी माता जंगल, वन्यजीवों पर संकट
चित्रकूट के रानीपुर टाइगर रिजर्व में भीषण आग ने आनंदी माता जंगल के दो किलोमीटर क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। हजारों पेड़-पौधे और वन संपदा जलकर ...और पढ़ें

जंगल में लगी आग से उठता धुआं। जागरण
HighLights
रानीपुर टाइगर रिजर्व में दो किमी तक फैली आग।
आनंदी माता जंगल में हजारों पेड़-पौधे जलकर राख।
छोटे वन्यजीवों और पक्षियों पर गहराया संकट।
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। चित्रकूट के रानीपुर टाइगर रिजर्व में आग ने विकराल रूप ले लिया है। मानिकपुर भाग-एक क्षेत्र के आनंदी माता जंगल में बुधवार सुबह करीब 11 बजे लगी आग शाम तक लगभग दो किलोमीटर के दायरे में फैल गई। देखते ही देखते लपटों ने जंगल के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे हजारों पेड़-पौधे, झाड़ियां और बहुमूल्य वन संपदा जलकर राख हो रही है। आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई किलोमीटर दूर से धुएं के गुबार साफ दिखाई दे रहे हैं। 15 दिन के अंदर सात बार टाइगर रिजर्व के जंगल में आग लगी है।
अप्रैल के दूसरे सप्ताह की तेज गर्मी, सूखी पत्तियां और तेज हवाएं आग को और अधिक खतरनाक बना रही हैं। हवाओं के कारण आग तेजी से एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फैलती जा रही है, जिससे हालात काबू से बाहर होते नजर आ रहे हैं। इस भीषण आग का सबसे अधिक असर छोटे वन्यजीवों, पक्षियों और सरीसृपों पर पड़ रहा है। कई जीव-जंतु आग में झुलस रहे हैं, जबकि कई अपने सुरक्षित ठिकाने छोड़कर भागने को मजबूर हैं। इससे पूरे जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पड़ गया है।
घटना ने वन विभाग की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि बार-बार आग लग रही है और विभाग बाद में लकीर पीट रहता है। मानिकपुर भाग-एक रेंज के रेंजर सुशील श्रीवास्तव ने रेंज से बाहर होने की बात कही और टीम को आग बुझाने के निर्देश देने की जानकारी दी। हालांकि, मौके पर प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था नजर न आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
हर वर्ष गर्मियों में जंगलों में आग की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद ठोस रोकथाम और त्वरित कार्रवाई के इंतजाम कमजोर दिखाई देते हैं। यदि जल्द ही आग पर काबू नहीं पाया गया, तो यह आपदा और भी भयावह रूप ले सकती है, जिससे न केवल वन संपदा बल्कि पूरे पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।