शाम के समय घर का मुख्य दरवाजा क्यों नहीं रखना चाहिए बंद? वास्तु में बताई गई है ये खास वजह
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार को बेहद खास माना गया है। जानिए शाम के समय दरवाजे ...और पढ़ें

शाम को मुख्य द्वार खुला रखने की मान्यता (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। घर बनाते समय लोग कमरे, रसोई और पूजा स्थान की दिशा पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार घर के सबसे अहम हिस्से यानी मुख्य दरवाजे को लेकर छोटी-छोटी बातों को नजर अंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को लेकर कई ऐसे नियम बताए गए हैं जिन्हें आप शायद ही मानते होंगे। लेकिन, ये आपके जीवन पर पूरा प्रभाव डालते है। कुछ घरों में मुख्य दरवाजे को लेकर कई ऐसी मान्यताएं हैं, जो आज भी परंपरा के तौर पर मानी जाती हैं।
मान्यता के अनुसार, शाम का समय मुख्य दरवाजे से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि सूर्यास्त के आस-पास का समय घर में शुभता और सकारात्मकता के स्वागत का समय माना जाता है। इसलिए इस दौरान मुख्य द्वार को लंबे समय तक बंद न रखने की सलाह दी जाती है।
शाम को मुख्य द्वार खुला रखने की मान्यता क्यों?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाम का समय मां लक्ष्मी के आगमन का होता है। वास्तु में भी इसको लेकर बड़ी मान्ताएं हैं। इसी वजह से कई घरों में सूर्यास्त के समय मुख्य दरवाजे के आस-पास सफाई करके दीपक जलाने की परंपरा रही है। साफ और रोशन प्रवेश द्वार घर में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी का स्वागत करता है।
वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में भी मुख्य प्रवेश स्थान को ऊर्जा के आवागमन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इन बातों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए, वैज्ञानिक तथ्य के तौर पर नहीं।
शाम को दरवाजे पर जरूर करें ये काम
सूर्यास्त होने के समय ही मुख्य द्वार की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। इसके बाद वहां छोटा सा दीपक जलाने की परंपरा है। कई परिवार मुख्य द्वार पर साफ पानी या गंगाजल का छिड़काव भी करते हैं। मान्यता है कि इससे वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहता है।
मुख्य द्वार को लेकर इन बातों का रखें ध्यान
मुख्य दरवाजे के आसपास कूड़ा, पुराने जूते-चप्पल, बेकार सामान या गंदगी जमा नहीं होने देनी चाहिए। दरवाजे पर पर्याप्त रोशनी रखना भी अच्छा माना जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में साफ-सुथरे और व्यवस्थित प्रवेश द्वार को शुभ माना गया है।
वास्तु शास्त्र और धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, शाम के समय मुख्य द्वार को साफ, रोशन और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। दीपक जलाने और कुछ समय प्रवेश द्वार को खुला रखने को शुभता और सकारात्मकता के स्वागत से जोड़ा जाता है। हालांकि, इसे मान्यता के रूप में ही लेना चाहिए।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
