फूंक मारकर दीपक बुझाना पड़ सकता है भारी, आज ही जान लें इसके पीछे की 3 बड़ी वजह
हिंदू धर्म में पूजा के दीपक को फूंक मारकर बुझाना अशुभ माना गया है। आइए इसके पीछे की वजह जानते हैं - ...और पढ़ें

मुंह से फूंक मारकर दीपक बुझाना क्यों माना जाता है अशुभ? Ai Generated Image
HighLights
अग्नि पंचतत्वों में से एक तत्व है
इसे फूंकना उसका निरादर माना जाता है
मुंह से निकलने वाली हवा को अशुद्ध माना जाता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में दीपक केवल प्रकाश के लिए नहीं, बल्कि साक्षात अग्नि देव का स्वरूप और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। किसी भी शुभ काम, पूजा या अनुष्ठान की शुरुआत दीपक जलाकर ही की जाती है।
दीपक को ज्ञान, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना गया है, लेकिन अक्सर अनजाने में लोग पूजा पूरी होने के बाद या अन्य किसी वजह से दीपक को मुंह से फूंक मारकर बुझा देते हैं। शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है। आइए इस आर्टिकल में इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
फूंक मारकर दीपक बुझाने से पहले जान लें ये बातें

अग्नि देव का अपमान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अग्नि देव को देवताओं का मुख माना जाता है। जब हम मुंह से फूंक मारते हैं, तो हमारे मुंह से अपवित्र हवा अग्नि को छूती है। शास्त्रों में इसे अग्नि देव को झूठा करने के समान माना गया है। ऐसा करने से जातक को दोष लगता है और पूजा का पुण्य फल कम हो जाता है। साथ ही इसे कुल के लिए भी अशुभ माना जाता है।
सुख-समृद्धि में कमी
दीपक को महालक्ष्मी का रूप भी माना जाता है। दीपक को बुझाना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा माना जाता है कि जो लोग बार-बार फूंक मारकर दीपक बुझाते हैं, उनके घर में आर्थिक तंगी आ जाती है और बरकत धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।
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नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
दीपक घर के वास्तु दोषों को दूर करता है। जब इसे अचानक फूंक मारकर बुझाया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली ऊर्जा अचानक नकारात्मक हो जाती है, जो परिवार के सदस्यों की सेहत और मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाल सकती है।
दीपक को शांत करने की सही विधि
- सबसे उत्तम यही है कि दीपक में उतना ही तेल या घी डालें जितना जरूरत हो और उसे अपने आप शांत होने दें।
- किसी फूल या हाथ से जल की बूंदों का सहारा लेकर लौ को शांत किया जा सकता है।
- किसी दीपक की लौ को कम करना हो, तो किसी शुद्ध चम्मच या धातु की वस्तु से धीरे से लौ को दबाकर शांत करें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।