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नाग पंचमी के दिन क्यों होती है सांपों की पूजा? इसके रहस्य और महत्व के बारे में यहां पढ़ें

Published: Wed, 12 Aug 2026 01:59 PM (IST)

नाग पंचमी सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है, जिसमें सांपों की पूजा की जाती ...और पढ़ें

नाग पंचमी पर क्यों पूजे जाते हैं सांप, जानें इसका महत्व और प्राचीन रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

नाग पंचमी पर क्यों पूजे जाते हैं सांप, जानें इसका महत्व और प्राचीन रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में हर त्योहार का अपना एक खास मतलब है। जहां एक तरफ कुछ पर्व देवी-देवताओं को समर्पित होते हैं, वहीं कुछ प्रकृति को सम्मान देने के लिए मनाए जाते हैं।

ऐसे भी कुछ त्योहार हैं जो जीव-जंतुओं के लिए मनाए जाते हैं। ऐसा ही एक पर्व है नाग पंचमी का। इस दिन पूरे देश में लोग सांपों की पूजा करते हैं। यह पर्व सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

इस साल नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाया जाएगा। नाग पंचमी शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें से नाग का अर्थ है सांप जबकि पंचमी का मतलब है चंद्र पखवाड़े का पांचवां दिन।

इस दिन लोग सांपों को दूध, फूल और मिठाइयां अर्पित करते हैं और उनकी पूजा विधि-विधान से करते हैं। पूजा के लिए नाग देवता का चित्र बनाया जाता है फिर उसी को सभी सामग्रियां अर्पित की जाती हैं। आइए आपको बताते हैं नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा के महत्व और इसमें छिपे रहस्य के बारे में।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हर साल नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व नाग देवता को समर्पित होता है और इसे पूरे देश में आस्था के साथ मनाया जाता है। इस पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा है जिसके अनुसार बहुत समय पहले हस्तिनापुर में राजा परीक्षित राज करते थे। एक बार वे शिकार पर गए और जंगल में रास्ता भटक गए। उन्हें प्यास लग रही थी और तभी उन्हें एक आश्रम दिखाई पड़ा। राजा वहां पहुंचे और उन्होंने पानी मांगा।

उस आश्रम में ऋषि श्रमिक गहरे ध्यान में लीन थे और राजा के पानी मांगने पर भी उन्होंने अपना ध्यान नहीं छोड़ा। इस बात पर राजा परीक्षित को क्रोध आ गया और उन्होंने एक मरा हुआ सांप ऋषि के गले में डाल दिया और वहां से चले गए।

कुछ समय बाद ऋषि श्रमिक के पुत्र श्रृंगी आश्रम लौटे और उन्होंने पिता के गले में मरा हुआ सांप देखा और उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप दे दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नाग राजा परीक्षित को डस लेगा और उनकी मृत्यु हो जाएगी। राजा परीक्षित को जब यह बात पता चली तो वे बहुत चिंतित हुए।

उन्होंने बचने के कई उपाय किए लेकिन सातवें दिन तक्षक नाग एक ब्राह्मण का रूप धर कर आया और उसने राजा परीक्षित को डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। उस समय राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने प्रतिज्ञा ली कि वो समस्त नागों का नाश कर देंगे। उन्होंने एक विशाल सर्प यज्ञ का आयोजन किया। जैसे-जैसे यज्ञ में मंत्रोार होता नाग स्वयं आकर अग्निकुंड में गिरने लगे और तक्षक नाग ने भयभीत होकर देवराज इंद्र की शरण ले ली।

नाग पंचमी के दिन क्यों होती है नागों की पूजा?

जिस समय राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय यज्ञ कर रहे थे उसमें तक्षक भी यज्ञ की ओर खींचने लगा और इंद्र भी उसके साथ खींचते हुए आने लगे तो सभी देवता चिंतित हो उठे। उस समय सभी देवता ब्रह्मा जी के पास गए। ब्रह्मा जी ने कहा इस यज्ञ को रोकने के लिए हमें आस्तिक मुनि को बुलाना होगा।

आस्तिक मुनि जो ने यज्ञ स्थल पर आकर राजा जन्मेजय से कहा कि हर प्राणी का अपना धर्म और स्थान होता है। उन्होंने राजा को बताया कि सर्पों को बिना कारण मारे जाने से प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा। राजन आपके पिता की मृत्यु उनके कर्मों का परिणाम थी ना कि केवल तक्षक नाग का दोष था, इस यज्ञ को रोक दें।

उस समय जन्मेजय ने यज्ञ रोक दिया और नागों से क्षमा मांगने के लिए उनकी पूजा की। उस दिन सावन महीने की पंचमी तिथि थी और तभी से हर साल सावन में शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागों की पूजा की जाती है और उन्हें पूजा की सामग्रियां अर्पित की जाती हैं।

धार्मिक ग्रंथों में नागों की पूजा का रहस्य

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, नाग देवता को ब्रह्मांडीय और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं और धर्मग्रंथों में सांपों के प्रति वैदिक सम्मान को दिखाया जाता है।

प्राचीन वैदिक और पौराणिक ग्रंथों में नाग पंचमी के त्योहार का विस्तार से वर्णन मिलता है। ऋग्वेद, महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में भी नाग देवता के महत्व का वर्णन मिलता है। भगवत गीता में एक श्लोक है जिसमें कृष्ण जी ने बताया है कि नागों में भी उनका स्वरूप है-

अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम्।पितॄणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम्।।

नागों में मैं शेषनाग हूं। जल के जीवों में वरुण देव मैं हूं, पितरों में अर्यमा नामक पितर मैं हूं। शासन करने वालों में मैं यमराज हूं। इस श्लोक से पता चलता है कि नागों में भी श्री कृष्ण मौजूद हैं, इसलिए उनकी पूजा का विशेष महत्व है।

हिंदू धर्म में सांपों की पूजा का विशेष महत्व है और आज भी नाग पंचमी के दिन सांपों का चित्र या फिर गोबर से सांप बनाकर उनकी पूजा का विधान है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।