किस श्राप की वजह से हुई थी राजा परीक्षित की मौत? सिर्फ 7 दिन में खत्म हुआ जीवन
राजा परीक्षित की मृत्यु एक श्राप के कारण हुई थी, जब उन्होंने क्रोध में श्रृंगी ऋषि का अपमान किया था। ...और पढ़ें
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राजा परीक्षित की मृत्यु की कहानी (Picture Credit- AI)
HighLights
राजा परीक्षित ने श्रृंगी ऋषि का अपमान किया था
ऋषि पुत्र ने परीक्षित को 7 दिन का श्राप दिया
तक्षक नाग के डंसने से राजा परीक्षित की मृत्यु हुई
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत के बारे में हम अक्सर सुनते और पढ़ते आए हैं। इसमें हुए युद्ध और उस समय की सारी घटनाएं महाभारत ग्रंथ में शामिल हैं। एक ऐसी रहस्यमयी घटना भी है, जिसके बारे में शायद ही कोई जानता होगा। साथ ही इसके बारे में किसी ने पढ़ा होगा। अर्जुन के पोते, यानी अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित से जुड़ी कथा भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें एक श्रापित मृत्यु का उल्लेख किया गया है। यह घटना भागवत पुराण के स्कन्ध 1 अध्याय 16-19 में लिखी गई है। ऐसे में आप भी इस कहानी को जानने के लिए इसे जरूर पढ़ें।
राजा परीक्षित और उनकी भूल
अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित हस्तिनापुर के राजा थे। वह न्यायप्रिय शासक थे। एक बार वो वन में शिकार खेलने गए थे। शिकार करते-करते वे पूरी तरह से थक गए और प्यासे हो गए। प्यास इतनी ज्यादा लगी थी कि वो पानी की तलाश करते-करते ऋषि शमीक के आश्रम में पहुंचे। उस समय ऋषि ध्यान कर रहे थे।
राजा परीक्षित ने उन्हें कई बार पुकारा, लेकिन उनका ध्यान नहीं टूटा। जब उन्होंने राजा परीक्षित का जवाब नहीं दिया, तो उन्होंने क्रोध में आकर ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया और वहां से चले गए। दरअसल, राजा परीक्षित ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनके सिर पर कलियुग सवार हो गया था, जिसकी वजह से वह अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे और अनजाने में उन्होंने ऋषि का अपमान किया।
जब ऋषि शमीक के पुत्र श्रृंगी ऋषि ने अपने पिता का यह अपमान देखा, तो उन्होंने श्राप देते हुए कहा कि जिस किसी ने भी मेरे पिता का यह अपमान किया है, वह आज से सातवें दिन तक्षक नाग के डंसने से मृत्यु को प्राप्त होगा।
राजा परीक्षित को मिला 7 दिनों का श्राप
बाद में ऋषि ने राजा परीक्षित को दिए हुए श्राप के बारे में जानकारी देने के लिए अपने शिष्य को उनके पास भेजा, ताकि वो सावधान हो जाएं। जैसे ही राजा परीक्षित को इसके बारे में पता चला, तो वो इस बात को सुनकर विचलित नहीं हुए बल्कि कर्मों का फल मानकर इसे स्वीकार किया और राजपाठ अपने पुत्र जनमेजय को सौंप दिया और गंगा घाट पर जाकर मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे।

तक्षक नाग ने किया राजा परीक्षित का अंत
सातवें दिन श्राप के अनुसार तक्षक नाग ने ब्राह्मण का वेश धारण कर राजा परीक्षित को डंसने का पूरा प्रयास किया। मार्ग में उन्होंने कश्यप ऋषि को भी देखा, लेकिन वो राजा का अंत करने के लिए महल में पहुंच गया। इसके बाद उसने रजा परीक्षित को डंस लिया। इस तरह से राजा ने प्राणों का त्याग दिया और उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ।
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