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सावन सोमवार व्रत में क्यों खाया जाता है सेंधा नमक? इसके पीछे के धार्मिक और वैज्ञानिक कारण यहां पढ़ें

Published: Mon, 17 Aug 2026 09:21 AM (IST)

सावन के व्रत में साधारण नमक की जगह सिर्फ सेंधा नमक ही क्यों इस्तेमाल होता है? जानिए इसके पीछे छिपी धार्मिक सात्विकता और सेहत से जुड़े वैज्ञानिक फायदे।

व्रत में क्यों खाते हैं सेंधा नमक? (AI-Generated Image)

व्रत में क्यों खाते हैं सेंधा नमक? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना शुरू होते ही चारों तरफ शिव भक्ति का माहौल बन जाता है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान कुछ लोग बिना नमक का फलाहार लेते हैं, तो कुछ लोग नमक वाला भी भोजन करते हैं। लेकिन, आपने ध्यान दिया होगा कि व्रत के खाने में सामान्य सफेद नमक की जगह हमेशा सेंधा नमक (रॉक सॉल्ट) का ही इस्तेमाल किया जाता है।

क्या यह सिर्फ एक पुरानी परंपरा है या इसके पीछे कोई ठोस वजह है? असल में व्रत में सेंधा नमक खाने के पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण भी मौजूद हैं।

सेंधा नमक खाने का महत्व

धार्मिक नजरिए से देखें तो व्रत का मकसद सिर्फ भूखे रहना नहीं, बल्कि मन और शरीर को शुद्ध करना होता है। शास्त्रों में व्रत के दौरान सात्विक और प्राकृतिक चीजें खाने की सलाह दी गई है।

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साधारण समुद्री नमक फैक्ट्रियों में कई तरह के केमिकल प्रोसेस, रिफाइनिंग और ब्लीचिंग से गुजरकर तैयार होता है। इसमें एंटी-केकिंग एजेंट मिलाए जाते हैं, जिससे यह प्राकृतिक नहीं रह जाता।

इसके उलट, सेंधा नमक सीधे पहाड़ों और प्राकृतिक चट्टानों से निकाला जाता है। इसे साफ करने के लिए किसी बड़े रासायनिक प्रसंस्करण (केमिकल प्रोसेस) की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि इसे पूरी तरह शुद्ध और सात्विक माना जाता है।

सेहत के लिए क्यों है बेहतर?

सावन या किसी भी व्रत के दौरान दिन भर अनाज न खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बदलता है। ऐसे में सेंधा नमक सेहत को कई तरह से सपोर्ट करता है।

लंबे समय तक भूखे रहने या कम खाने से शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी हो सकती है। सेंधा नमक शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है, जिससे थकावट और कमजोरी महसूस नहीं होती।

वहीं, सादे नमक की तुलना में सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा संतुलित होती है।

सेंधा नमक की तासीर ठंडी मानी जाती है। व्रत में कुट्टू, सिंघाड़ा या साबूदाना जैसी भारी चीजें खाने के बाद यह पाचन क्रिया को सहज बनाता है और पेट में गैस या जलन की समस्या नहीं होने देता।

खान-पान में सावधानी

फलाहार जैसे दही, साबूदाना खिचड़ी या आलू में सेंधा नमक का सीमित सेवन ही फायदेमंद रहता है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या हाई बीपी के मरीजों को व्रत के दौरान अपने शरीर की जरूरत के हिसाब से ही फलाहार और नमक की मात्रा तय करनी चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।