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सावन की तीसरी सोमवारी पर 7 साल बाद बना अद्भुत संयोग, शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से मिलेगा कौन सा फल?

Published: Sun, 16 Aug 2026 06:38 PM (IST)

सावन की तीसरी सोमवारी पर 7 साल बाद नागपंचमी का दुर्लभ संयोग बना है, जिसमें श्रद्धालु भगवान शिव और नाग ...और पढ़ें

सावन की तीसरी सोमवारी पर अद्भुत संयोग।

सावन की तीसरी सोमवारी पर अद्भुत संयोग।

HighLights

  1. सावन की तीसरी सोमवारी पर 7 साल बाद नागपंचमी का संयोग।

  2. श्रद्धालु भगवान शिव और नाग देवता का एक साथ पूजन करेंगे।

  3. शिवलिंग पर विभिन्न चढ़ावों से प्राप्त होंगे शुभ फल।

जागरण संवाददाता, पटना। सावन की तीसरी सोमवारी पर सात वर्षों बाद नागपंचमी का संयोग बना है। भगवान शिव के साथ श्रद्धालु नाग देवता का पूजन करेंगे।

सोमवारी पर शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालु सुबह से लेकर शाम तक जलाभिषेक करेंगे। भक्तों की कतार लगने के साथ बोलबम के जयकारे से शिव मंदिर गूंजता रहेगा।

सोमवारी को लेकर शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में खाजपुरा शिव मंदिर, पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर, राजापुर पुल शिव मंदिर, चूड़ी मार्केट शिव मंदिर, कंकड़बाग स्थित शिव मंदिरों में पूरी व्‍यवस्‍था कर ली गई है। 

श‍िव के साथ नाग का पूजन वि‍शेष फलदायी

श्रद्धालु गंगाजल, दूध, दही, गन्ना रस, अनार रस, शहद, घी, पंचामृत, चंदन, अक्षत, इत्र, फूलमाला, बेलपत्र, धतूरा, अकवन आदि से शृंगार कर पूजन करेंगे।

ज्योतिष आचार्य पंडित राजनाथ झा ने बताया कि भगवान शिव और उनके प्रिय नाग की एक साथ पूजन करने से श्रद्धालुओं को अत्यंत शुभ फल मिलेगा।

रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और नाग पूजन का विशेष महत्व रहेगा। नागपंचमी का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि प्रकृति संरक्षण और जैव विविधता के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

भगवान शिव के गले में विराजमान नाग सृष्टि के संतुलन, निर्भयता और जीव जंतुओं के संरक्षण का संदेश देता है।

शिव की पूजा कल्याणकारी

सावन मास में शिव की पूजा करने से चार गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। भक्तों के लिए इनकी पूजा-आराधना सर्वदा कल्याणकारी ही होता है।

महामृत्युंजय मंत्र, वेदोक्त मंत्र एवं गायत्री मंत्र के साथ रुद्राभिषेक करने के बाद उमा-महेश्वर की शृंगार पूजा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

प्रत्येक सोमवारी को रुद्राभिषेक, शिवसहस्रनाम, शिव पंचाक्षर, शिव महिम्न, रुद्राष्टक, शिव कवच तथा शिव तांडव स्त्रोत्र का 108 बार पाठ करने से दरिद्रता का ह्रास और शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।

शिव पर अर्पित करने वाले वस्तुओं का महत्व

  • जल : मंत्रों के साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाने से व्यक्ति का स्वभाव शांत और स्नेहमय होता है।
  • दूध : शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और बीमारियां दूर होती है।
  • दही : जल और दूध के साथ शिवलिंग पर दही चढ़ाने से जीवन में आने वाली परेशानी दूर होती है।
  • घी : शिवलिंग पर घी अर्पित करने से शक्ति में वृद्धि होती है।
  • शहद : भोलेनाथ को शहद चढ़ाने से वाणी में मधुरता आती है।
  • इत्र : शिवलिंग पर इत्र लगाने से विचार पवित्र और शुद्ध होता है।
  • केसर : शिवलिंग पर केसर अर्पित करने से सौम्यता में वृद्धि होती है।
  • चंदन : चंदन चढ़ाने से व्यक्तित्व आकर्षक होता है। समाज में मान सम्मान और यश मिलता है।

भगवान शिव को करें अर्पित

  • दीर्घायु: अकवन के फूल अर्पित करें।
  • सुख प्राप्ति: हरसिंगार का पुष्प अर्पित करें।
  • शत्रु नाश: घी व सरसों तेल से अभिषेक करें।
  • मोक्ष प्राप्ति: आक, अलसी या समीपत्र अर्पित करें।
  • लक्ष्मी प्राप्ति: दूध व ईख रस से अभिषेक करें।