पूजा के बाद दीपक को फूंक मारकर बुझाना सही या गलत, हिंदू धर्म में क्या है इससे जुड़े नियम?
हिंदू धर्म में पूजा के दौरान दीपक जलाने का विशेष महत्व है। जानिए दीपक बुझाने के नियम, घी-तेल का अंतर और शाम को दीया जलाने की वजह।

पूजा के दौरान दीपक बुझ जाए तो क्या करें? (AI-Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे घरों में मंदिर हो या कोई धार्मिक आयोजन, बिना दीपक जलाए पूजा की शुरुआत अधूरी मानी जाती है। सनातन परंपरा में दीपक सिर्फ रोशनी फैलाने का साधन नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, पवित्रता और घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने का माध्यम है।
आपने अक्सर सुना होगा कि बड़े-बुजुर्ग जलते हुए दीपक को मुंह से फूंक मारकर बुझाने से मना करते हैं। शास्त्रों में अग्नि को देवताओं का रूप और बेहद पवित्र माना गया है। जबकि हमारे मुंह से जो हवा निकलती है वो पूरी तरह अशुद्ध होती है। ऐसे में पवित्र अग्नि पर फूंक मारना उसका अनादर माना जाता है। इसलिए, परंपरा यही है कि दीपक को खुद ही शांत होने दिया जाए या फिर हाथ से हवा देकर बुझाया जाए।
अगर पूजा के दौरान दीपक बुझ जाए तो?
कई बार तेज हवा या तेल-घी खत्म होने की वजह से दीया अचानक बुझ जाता है। इसे लेकर मन में बेवजह का डर या अशुभ का विचार लाने की जरूरत नहीं है। अगर ऐसा हो, तो भगवान से मन ही मन क्षमा मांगकर दीपक दोबारा जला लें। भगवान भाव के भूखे हैं और पूजा में भावना और श्रद्धा को सबसे ऊपर रखा गया है।
घी और तेल का दीपक, किसमें क्या अंतर है?
घी का दीपक: देसी घी के दीपक को सात्विक और अत्यंत शुभ माना जाता है। देवी-देवताओं के स्वागत, आरती और विशेष शुभ अवसरों पर घी का दीया जलाया जाता है।
तेल का दीपक: तिल या सरसों के तेल का दीपक विशेष पूजा-पद्धतियों, कष्ट निवारण और शनिदेव या हनुमान जी की आराधना में जलाया जाता है।
शाम को दीया जलाने की वजह
दिन ढलने के समय यानी संध्याकाल (प्रदोषकाल) में घर के मुख्य द्वार और घर के मंदिर में दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के समय घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने और सुख-समृद्धि के आगमन के लिए मुख्य द्वार पर रोशनी होना जरूरी है।
सुरक्षा का भी रखें ध्यान
धार्मिक आस्था के साथ-साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। दीपक को हमेशा ऐसे सुरक्षित स्थान पर रखें जहां हवा से कपड़े या पर्दे में आग न लगें। बच्चों और फालतू जानवरों की पहुंच से जलते दीये को दूर रखें।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
