सरसों के तेल का दीपक: पढ़ें कब और किस देवता के सामने जलाना होता है शुभ?
हिंदू धर्म में पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर ...और पढ़ें

सरसों के तेल का दीपक कब जलाएं? (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि-विधान से दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका शुभ प्रभाव परिवार के सदस्यों पर पड़ता है। पूजा के समय सरसों के तेल का दीपक जलाने का विशेष महत्व है।
क्या आप जानते हैं कि सरसों के तेल का दीपक कब और किस देवता के सामने जलाना चाहिए? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
किस देवता के लिए जलाएं सरसों के तेल का दीपक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सरसों के तेल का दीपक मुख्य रूप से कर्मफल दाता शनिदेव की पूजा-अर्चना के दौरान जलाया जाता है। माना जाता है कि इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है और शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
हनुमान जी- हनुमान जी की पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाना चाहिए और प्रभु से जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करनी चाहिए। मान्यता है कि बजरंगबली के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाने से व्यक्ति को भय और संकटों से मुक्ति मिलती है और रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं।
भैरव बाबा- काल भैरव की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियों और ऊपरी बाधाओं से छुटकारा मिलता है और व्यक्ति को जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं।
कब और किस समय जलाएं?
दिन- शनिवार के दिन शनिदेव और हनुमान जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना अधिक शुभ माना जाता है। इसके अलावा मंगलवार को बजरंगबली और कालाष्टमी के दिन भैरव बाबा की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं।
समय- संध्याकाल में सरसों के तेल का दीपक जलाने का सबसे शुभ समय माना जाता है।
दीपक जलाने के मुख्य नियम
- सरसों के तेल का दीपक सदैव भगवान के बाएं हाथ की तरफ रखना चाहिए।
- दीपक जलाते समय मन को शांत और पवित्र रखें। इस दौरान किसी के गलत विचार न लाएं।
- पूजा के समय किसी से वाद-विवाद न करें।
- दीपक हमेशा साफ-सुथरे स्थान पर ही जलाना चाहिए।
- एक ही दीपक में घी और तेल मिलाकर कभी न जलाएं।
- खंडित दीपक कभी न जलाएं, इससे शुभ फल की प्राप्ति नहीं होती है।
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