गृह प्रवेश हो या विवाह...नहीं टालें कोई शुभ काम! अक्षय तृतीया का 'स्वयंसिद्ध मुहूर्त' दिलाएगा सफलता
अक्षय तृतीया 2026, जो 19 अप्रैल रविवार को है, को 'स्वयंसिद्ध' या 'अबूझ मुहूर्त' माना गया है। इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता ...और पढ़ें

आखिर बिना पंचांग देखे क्यों होते हैं शुभ कार्य? (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। अक्षय तृतीया के दिन को भारतीय ज्योतिष में 'स्वयंसिद्ध' या 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है। वर्ष 2026 में यह शुभ अवसर 19 अप्रैल, (Akshaya Tritiya 2026) रविवार को पड़ रहा है। 'अबूझ' का अर्थ है जिसे बूझने या दोबारा किसी ज्योतिषी से पूछने की आवश्यकता न हो।
शास्त्रों के अनुसार, इस पूरे दिन ग्रहों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए समय देखने की जरूरत नहीं पड़ती। यह तिथि नकारात्मकता से पूरी तरह मुक्त मानी जाती है, इसलिए गृह प्रवेश, विवाह या मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों के लिए पंचांग देखे बिना इसे सर्वश्रेष्ठ मान लिया जाता है।
यह दिन न केवल सांसारिक सफलताओं के लिए बल्कि आत्मिक शांति और जीवन के सही संचालन के लिए भी वरदान स्वरूप है।
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(Picture Credit- AI Generated)
अबूझ मुहूर्त होने का ज्योतिषीय आधार
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा अपनी सबसे उच्च और शक्तिशाली अवस्था में होते हैं। सूर्य आत्मा का कारक है और चंद्रमा मन का, जब ये दोनों प्रबल होते हैं, तो व्यक्ति का हर निर्णय और कार्य सकारात्मक परिणाम देता है।
इस दिन ग्रहों का कोई भी दोष प्रभावी नहीं रहता, जिससे शुभ कार्यों में बाधाएं नहीं आतीं। रविवार को पड़ने वाली अक्षय तृतीया इस बार ऊर्जा के स्तर को और अधिक बढ़ा रही है। यह ग्रहों का ऐसा अद्भुत संयोग है जो सौभाग्य में वृद्धि करता है। इस समय की गई नई शुरुआत लंबे समय तक लाभ देती है और सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
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बिना पंचांग देखे क्यों होते हैं शुभ कार्य?
किसी भी बड़े कार्य के लिए तिथि, नक्षत्र और योग का गहरा विश्लेषण किया जाता है, लेकिन अक्षय तृतीया स्वयं में एक सिद्ध मुहूर्त है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था, जो इस तिथि की अपार शक्ति को दर्शाता है।
इस दिन ब्रह्मांड से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा इतनी तीव्र होती है कि वह किसी भी सामान्य दोष को निष्प्रभावी कर देती है। यही कारण है कि लोग बिना किसी संकोच के इस दिन व्यवसाय की शुरुआत, विवाह, मुंडन या कोई भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। यह दिन विश्वास और श्रद्धा का प्रतीक है, जो हमें सिखाता है कि सही समय पर लिया गया सही फैसला जीवन को स्थिरता और मजबूती देता है।
सफलता के लिए सरल और प्रभावी नियम
दिन की शुरुआत: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए नए कार्यों का संकल्प लें।
शुभ खरीदारी: इस दिन सोने या चांदी की कोई छोटी वस्तु खरीदना बहुत अच्छा माना जाता है, जो समृद्धि के हमेशा बने रहने का संकेत है।
व्यवहार में सौम्यता: अपनी वाणी और व्यवहार में सहजता रखें और ध्यान रहे कि आपकी बातों से किसी का मन न दुखे।
दान का महत्व: अपनी सामर्थ्य के अनुसार जल या अन्न का दान जरूर करें, जिससे आपके पुण्य कर्मों में बढ़ोतरी होती है।
कार्य के प्रति समर्पण: यदि आप किसी नई योजना पर काम शुरू कर रहे हैं, तो उसे पूरी ईमानदारी से करें; इस मुहूर्त में किया गया निस्वार्थ प्रयास सफल होता है।
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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए [email protected] पर संपर्क करें।