Akshaya Tritiya 2026: परशुराम जयंती 19 को, अक्षय तृतीया का शुभ पर्व 20 तक, पूजा-अर्चना का विशेष संयोग
Akshaya Tritiya date in Bihar: मुजफ्फरपुर में 19 अप्रैल, रविवार को दोपहर 1:01 बजे से तृतीया तिथि शुरू होकर 20 अप्रैल, सोमवार को सुबह 10:39 बजे तक रहेग ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Akshaya Tritiya 2026: इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को दोपहर 1:01 बजे से तृतीया तिथि शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 10:39 बजे तक रहेगी। ज्योतिष मर्मज्ञ पंडित प्रभात मिश्र के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं, जो इसे और अधिक फलदायी बना रहे हैं।
19 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाई जाएगी, जबकि उदयातिथि के आधार पर 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व मनाना श्रेष्ठ माना गया है।
क्यों खास है अक्षय तृतीया
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि इसे चिरंजीवी और सर्वसिद्ध मुहूर्त माना गया है।
उदयातिथि के अनुसार 20 अप्रैल को पर्व
तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 10:39 बजे तक रहेगी। चूंकि 20 अप्रैल को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान है, इसलिए इसी दिन व्रत, दान और पूजा करना अधिक शुभ रहेगा।
पूजा और खरीदारी का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:10 से 04:54 तक
- पूजा मुहूर्त: सुबह 05:25 से 07:27 तक
- सोना खरीदारी: सूर्योदय से 07:27 बजे तक विशेष शुभ, हालांकि पूरा दिन मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल रहेगा
इस बार बन रहा अक्षय योग
इस वर्ष सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे। जब दोनों प्रमुख ग्रह अपनी उच्च राशि में होते हैं, तो इसे ‘अक्षय योग’ कहा जाता है। यह योग जीवन में सुख, समृद्धि और स्थायी लाभ देने वाला माना जाता है।
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सर्वार्थ सिद्धि और त्रिपुष्कर योग का संयोग
20 अप्रैल को सोमवार और रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस योग में किए गए कार्य लंबे समय तक सफल रहते हैं।
साथ ही त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, जिसमें किए गए कार्यों का फल तीन गुना प्राप्त होता है।
बन रहे अन्य राजयोग
इस बार शश योग और मालव्य योग जैसे पंच महापुरुष राजयोग भी बन रहे हैं। ये योग करियर, धन और वैभव में वृद्धि के संकेत देते हैं। इसके अलावा सौभाग्य योग, रवि योग और गजकेसरी योग भी इस दिन को और शुभ बना रहे हैं।
दान-पुण्य का विशेष महत्व
अक्षय तृतीया के दिन गंगा स्नान, जप, तप, हवन और दान का विशेष महत्व है। बिहार में सत्तू, गुड़, मिट्टी का घड़ा, पंखा और फल दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है।
पौराणिक और धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग की शुरुआत इसी तिथि से हुई थी, इसलिए इसे युगादि तिथि भी कहा जाता है। इसी दिन भगवान बद्रीनारायण के कपाट खुलते हैं और वृंदावन में ठाकुर जी के चरण दर्शन होते हैं।
