आरती के समय क्यों बनाई जाती है ‘ॐ’ की आकृति? जानें 14 बार दीपक घुमाने का धार्मिक महत्व
आरती में 14 बार दीपक घुमाने का क्या मतलब है? जानें शास्त्रों में बताए गए नियम और ‘ॐ’ आकृति बनाने का आध्यात्मिक महत्व। ...और पढ़ें

दीपक से ‘ॐ’ की आकृति बनना है बेहद शुभ (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के बाद आरती का विशेष महत्व माना जाता है। मंदिर हो या घर का पूजा स्थान, दीपक जलाकर भगवान की आरती करना श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि शास्त्रों में आरती करने की भी एक खास विधि बताई गई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती केवल दीपक घुमाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भगवान के प्रति समर्पण और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम मानी जाती है।
शास्त्रों में बताया गया आरती का सही नियम
धार्मिक ग्रंथों में एक श्लोक के माध्यम से आरती का क्रम बताया गया है-
आदौ चतुष्पादतले च विष्णोः, द्वौ नाभिदेशे मुखमण्डलेकम्
सर्वेष्वङ्गेषु च सप्तवारं, आरार्त्रिकं भक्तजनः कुर्यात्॥
इस श्लोक के अनुसार, भगवान की आरती एक निश्चित क्रम में करनी चाहिए। मान्यता है कि विधि-विधान से की गई आरती से पूजा पूर्ण मानी जाती है और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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क्या है 14 बार आरती घुमाने का गणित?
शास्त्रों के अनुसार, आरती कुल 14 बार घुमाई जाती है। इसे 4+2+1+7 के क्रम में बांटा गया है।
- सबसे पहले भगवान के चरणों के सामने 4 बार दीपक घुमाया जाता है। इसे समर्पण और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।
- इसके बाद भगवान की नाभि के सामने 2 बार आरती उतारी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में नाभि को जीवन ऊर्जा का केंद्र माना गया है।
- तीसरे चरण में भगवान के मुख के सामने 1 बार दीपक घुमाया जाता है, जो भगवान के तेज और आभा (Aura) का प्रतीक माना जाता है।
- अंत में भगवान के पूरे शरीर के चारों ओर 7 बार आरती की जाती है।
इन सभी चरणों को मिलाकर कुल संख्या 14 होती है, इसलिए इसे 14 बार की आरती कहा जाता है।
क्यों बनाई जाती है ‘ॐ’ की आकृति?
मान्यता है कि आरती करते समय दीपक को इस तरह घुमाना चाहिए कि हवा में ‘ॐ’ जैसी आकृति बने। हिंदू धर्म में ‘ॐ’ को सबसे पवित्र ध्वनि माना गया है। कहा जाता है कि ऐसा करने से पूजा अधिक प्रभावशाली और शुभ मानी जाती है।
आरती का आध्यात्मिक महत्व
धर्म शास्त्रों के अनुसार, आरती की लौ सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का प्रतीक होती है। विधि-विधान से की गई आरती घर में सुख-शांति, सकारात्मकता और समृद्धि लाने वाली मानी जाती है।
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