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    पूजा का मिलेगा दोगुना फल, वैशाख पूर्णिमा पर इस आरती से करें श्री हरि और मां लक्ष्मी की पूजा

    Updated: Fri, 01 May 2026 06:30 AM (GMT+05:30)

    वैशाख पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की साथ पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ...और पढ़ें

    वैशाख पूर्णिमा आरती: इस पावन स्तुति से चमक उठेगी आपकी किस्मत। Ai Generated Image

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैशाख पूर्णिमा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख का महीना भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है और इसकी पूर्णिमा तिथि पर दान, स्नान और दीपदान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। अक्सर लोग पूजा तो करते हैं, लेकिन अंत में आरती के समय कुछ गलतियां कर बैठते हैं। वैशाख पूर्णिमा की रात अगर आप श्री हरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आरती करते हैं, तो आपकी पूजा का फल न केवल पूर्ण होता है, बल्कि वह कई गुना बढ़ जाता है, तो आइए यहां आरती पढ़ते हैं।

    वैशाख पूर्णिमा पर आरती का धार्मिक महत्व

    पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं। वैशाख माह विष्णु जी का है और बिना विष्णु जी के लक्ष्मी जी स्थिर नहीं रहती है। इसलिए, इस दिन सत्यनारायण कथा के बाद जब आरती की जाती है। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता ऊर्जा का संचार होता है। आरती के समय शंख और घंटों की ध्वनि से घर का वातावरण पवित्र होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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    ।।भगवान विष्णु की आरती।।

    ॐ जय जगदीश हरे आरती

    ॐ जय जगदीश हरे...

    ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।

    भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

    स्वामी दुःख विनसे मन का।

    सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।

    स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।

    तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

    स्वामी तुम अन्तर्यामी।

    पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

    स्वामी तुम पालन-कर्ता।

    मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

    स्वामी सबके प्राणपति।

    किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

    स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

    अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।

    स्वामी पाप हरो देवा।

    श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

    स्वामी जो कोई नर गावे।

    कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

    ॐ जय जगदीश हरे...

    ।।आरती श्री लक्ष्मी जी।।

    ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।

    तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता॥

    उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।

    सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता॥

    दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।

    जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता॥

    तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।

    कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता॥

    जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।

    सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता॥

    तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।

    खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता॥

    शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।

    रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता॥

    महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई जन गाता।

    उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता॥

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