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    बढ़ता जलस्तर देख गुरदासपुर में आधी रात खोले गए गलहड़ी हाइडल के गेट, सैकड़ों एकड़ फसल डूबने से बची

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 11:46 AM (GMT+05:30)

    गुरदासपुर के दीनानगर क्षेत्र में आधी रात गलहड़ी हाइडल पर जलस्तर बढ़ने से कई खेतों में पानी घुस गया। समय पर गेट खुलवाने से सैकड़ों एकड़ फसल डूबने से बच ...और पढ़ें

    गुरदासपुर के दीनानगर क्षेत्र में आधी रात गलहड़ी हाइडल के गेट खोलते हुए।

    गुरदासपुर के दीनानगर क्षेत्र में आधी रात गलहड़ी हाइडल के गेट खोलते हुए।

    HighLights

    1. गलहड़ी हाइडल के पास जलस्तर बढ़ा, खेतों में पानी घुसा।

    2. समय पर गेट खुलने से सैकड़ों एकड़ फसलें डूबने से बचीं।

    3. किसानों ने प्रशासन से स्थायी जल प्रबंधन की मांग की।

    जागरण संवाददाता, गुरदासपुर। गुरदासपुर के दीनानगर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में शुक्रवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब गलहड़ी हाइडल के पास पानी का स्तर अचानक बढ़ गया। बढ़ते जलस्तर के कारण कई खेतों में पानी घुस गया, जिससे किसानों को अपनी धान समेत अन्य फसलों के डूबने का डर सताने लगा। हालांकि समय रहते गलहड़ी हाइडल के गेट खुलवाए जाने से संभावित बड़े नुकसान को टाल लिया गया।

    इसके बावजूद कई खेतों में पानी भरने से कुछ किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। जानकारी के अनुसार आधी रात के समय अचानक जलस्तर बढ़ने से आसपास के ग्रामीणों और किसानों में चिंता फैल गई। खेतों में पानी तेजी से पहुंचने लगा तो लोगों ने तुरंत जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को इसकी सूचना दी। हालात बिगड़ने की आशंका के बीच आम आदमी पार्टी के दीनानगर हलका इंचार्ज शमशेर सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

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    सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने रात दिया आदेश

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तुरंत सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों की ओर से तत्काल कार्रवाई करते हुए गलहड़ी हाइडल के गेट खोले गए। गेट खुलते ही पानी की निकासी तेज हो गई, जिससे बढ़ते जलस्तर पर नियंत्रण पाया गया और आसपास के इलाकों में पानी फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो गया।

    गांव मुगलानी चक के सरपंच जोगा सिंह और स्थानीय किसानों ने बताया कि यदि गेट खोलने में थोड़ी भी देर हो जाती तो सैकड़ों एकड़ धान और अन्य फसलें पानी में डूब सकती थीं। उनका कहना है कि समय पर उठाए गए कदम से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सका। हालांकि जिन खेतों में पहले ही पानी भर चुका था, वहां फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।

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    समय पर कार्रवाई से टला बड़ा नुकसान

    किसानों ने त्वरित कार्रवाई के लिए शमशेर सिंह और सिंचाई विभाग का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि प्रशासन की सक्रियता से बड़ी राहत मिली है, लेकिन भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी है।

    ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नहरों और हाइडल परियोजना की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। साथ ही जलस्तर बढ़ने की स्थिति में समय रहते गेट खोलने और पानी के बहाव का वैज्ञानिक प्रबंधन करने की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि बरसात के मौसम में किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। किसानों का कहना है कि समय पर निगरानी और बेहतर जल प्रबंधन से ऐसी आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।

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    जिले के दीनानगर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में शुक्रवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब गलहड़ी हाइडल के पास पानी का स्तर अचानक बढ़ गया। बढ़ते जलस्तर के कारण कई खेतों में पानी घुस गया, जिससे किसानों को अपनी धान समेत अन्य फसलों के डूबने का डर सताने लगा। हालांकि समय रहते गलहड़ी हाइडल के गेट खुलवाए जाने से संभावित बड़े नुकसान को टाल लिया गया। इसके बावजूद कई खेतों में पानी भरने से कुछ किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है।

    जानकारी के अनुसार आधी रात के समय अचानक जलस्तर बढ़ने से आसपास के ग्रामीणों और किसानों में चिंता फैल गई। खेतों में पानी तेजी से पहुंचने लगा तो लोगों ने तुरंत जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को इसकी सूचना दी। हालात बिगड़ने की आशंका के बीच आम आदमी पार्टी के दीनानगर हलका इंचार्ज शमशेर सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तुरंत सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों की ओर से तत्काल कार्रवाई करते हुए गलहड़ी हाइडल के गेट खोले गए। गेट खुलते ही पानी की निकासी तेज हो गई, जिससे बढ़ते जलस्तर पर नियंत्रण पाया गया और आसपास के इलाकों में पानी फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो गया।

    गांव मुगलानी चक के सरपंच जोगा सिंह और स्थानीय किसानों ने बताया कि यदि गेट खोलने में थोड़ी भी देर हो जाती तो सैकड़ों एकड़ धान और अन्य फसलें पानी में डूब सकती थीं। उनका कहना है कि समय पर उठाए गए कदम से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सका। हालांकि जिन खेतों में पहले ही पानी भर चुका था, वहां फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।

    किसानों ने त्वरित कार्रवाई के लिए शमशेर सिंह और सिंचाई विभाग का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि प्रशासन की सक्रियता से बड़ी राहत मिली है, लेकिन भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी है।

    ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नहरों और हाइडल परियोजना की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। साथ ही जलस्तर बढ़ने की स्थिति में समय रहते गेट खोलने और पानी के बहाव का वैज्ञानिक प्रबंधन करने की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि बरसात के मौसम में किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। किसानों का कहना है कि समय पर निगरानी और बेहतर जल प्रबंधन से ऐसी आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।