पंजाब कांग्रेस में बढ़ी गुटबाजी, अब हाईकमान के पाले में फैसला; वड़िंग और चन्नी खेमा आमने-सामने
पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर चन्नी और वड़िंग खेमे के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। ...और पढ़ें
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पूर्व सीएम चन्नी और राजा वड़िंग (फाइल फोटो)
HighLights
पंजाब कांग्रेस में चन्नी और वड़िंग खेमे में बढ़ी गुटबाजी
संगठनात्मक नियुक्तियों और चुनाव समितियों पर विवाद हाईकमान के पास
हाईकमान अगले सप्ताह ले सकता है अंतिम निर्णय, राहुल गांधी की वापसी का इंतजार
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच संगठनात्मक नियुक्तियों और चुनाव संबंधी समितियों के गठन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर गुटबाजी में बदलता दिखाई दे रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री और उनके समर्थकों द्वारा प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए जाने के बाद अब पूरा मामला कांग्रेस हाईकमान के पाले में पहुंच गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर अंतिम फैसला अगले सप्ताह वरिष्ठ नेतृत्व के स्तर पर मंथन के बाद लिया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि वे मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं हैं। बताया जा रहा है कि चन्नी खेमे ने हाईकमान को संगठनात्मक फैसलों पर पुनर्विचार के लिए लगभग एक सप्ताह का समय दिया है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी अगले हफ्ते विदेश से लौटने के बाद इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत चर्चा होगी।
चंडीगढ़ आएंगे पंजाब प्रभारी
पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को देखते हुए पंजाब मामलों के प्रभारी के भी जल्द चंडीगढ़ आने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि वह चन्नी, वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर सकते हैं।
दूसरी ओर, वड़िंग के समर्थन में भी पार्टी के कई नेता खुलकर सामने आने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष अपने समर्थक नेताओं को एकजुट करने में जुटे हैं और जल्द ही उनके साथ बैठक भी कर सकते हैं। दोनों खेमे अब अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में हैं।
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चन्नी के समर्थक पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और अन्य नेता चुनाव समिति की सूची में बदलाव की मांग को लेकर लगातार हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं।
हालांकि पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि चन्नी की नई पार्टी बनाने या किसी अन्य दल में जाने की संभावना फिलहाल बेहद कम है। राजनीतिक जानकार इसे संगठन के भीतर अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और सम्मान सुनिश्चित कराने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
कांग्रेस हाईकमान करेंगे फैसला
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में तेज हुई यह अंदरूनी खींचतान पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई है। यदि विवाद जल्द नहीं सुलझा तो इसका असर पार्टी की चुनावी तैयारियों और वोट बैंक पर पड़ सकता है।
अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान पर टिकी हैं कि वह चन्नी खेमे की मांगों पर नरम रुख अपनाता है या फिर पहले से लिए गए फैसलों पर कायम रहता है।
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