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    अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर; हींग की कीमत बढ़ी, अमृतसर के पापड़ वड़ी उद्योग संकट में

    Updated: Sat, 28 Mar 2026 05:58 PM (IST)

    अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण हींग की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें बढ़ी हैं। अमृतसर का पापड़ वड़ी उद्योग दबाव में है और नकली हींग का कारोबार बढ़ ...और पढ़ें

    अमृतसर स्थित पापड़ वड़ी की मशहूर दुकान। (फाइल फोटो)

    अमृतसर स्थित पापड़ वड़ी की मशहूर दुकान। (फाइल फोटो)

    नितिन धीमान, अमृतसर । अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक साफ दिखाई देने लगा है। एक ओर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता टकराव, वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हालात ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर दिया है। इसका सीधा असर अब हींग जैसी रोजमर्रा की वस्तु पर पड़ रहा है, जो भारतीय रसोई का अहम हिस्सा मानी जाती है।

    अमृतसर में इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है, क्योंकि यहां का प्रसिद्ध पापड़-वड़ियां उद्योग काफी हद तक हींग पर निर्भर करता है। सप्लाई बाधित होने के कारण हींग की उपलब्धता कम हो गई है और इसके दामों में 5 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे स्थानीय उद्योग और उपभोक्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

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    साल में 1500 टन तक हींग होता है आयात

    हींग कारोबारी अमन शर्मा के अनुसार हींग पापड़, वड़ी और दाल के पकौड़ों में स्वाद बढ़ाने में सहाय है। भारत विश्व के सबसे बड़े हींग उपभोक्ताओं में शामिल है और हर साल लगभग 1200 से 1500 टन हींग का आयात करता है। इसका अधिकांश हिस्सा ईरान और अफगानिस्तान से आता है। उन्होंने बताया कि देश में हींग का बाजार करीब 600 से 800 करोड़ रुपये का है।

    पंजाब की इसमें भले ही सीमित हिस्सेदारी हो, लेकिन यहां की फूड प्रोसेसिंग और पापड़-वड़ियां इंडस्ट्री के कारण इसका महत्व काफी अधिक है। अमृतसर में ही हर साल 40 से 60 टन हींग की खपत होती है।

    पापड़-वड़ी निर्माता सुखदेव सिंह का कहना है कि उद्योग को पहले से ही वैश्विक हालात का अंदेशा था। अमृतसर के पारंपरिक उत्पाद देश-विदेश में काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन अब कच्चे माल की बढ़ती लागत से मुनाफे पर असर पड़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में पापड़-वड़ियों के दाम और बढ़ सकते हैं।

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    नकली हींग का कारोबार तेज

    बाजार में नकली हींग के कारोबार जोरों से चल रहा है। असली ईरानी हींग की कीमत करीब 30 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जबकि नकली हींग भी इसी भाव में बिक रहा है। यह नकली हींग आमतौर पर मैदा में कृत्रिम सुगंध मिलाकर तैयार की जाती है, जिससे उपभोक्ताओं के साथ धोखा होने का खतरा बढ़ गया है।

    व्यापारियों ने प्रशासन से अपील की है कि बाजार में मिलावटी हींग की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि अगर जल्द हालात सामान्य नहीं हुए तो इसका असर न सिर्फ रसोई तक सीमित रहेगा, बल्कि अमृतसर के पारंपरिक खाद्य उद्योग पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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