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    सावधान हो जाएं दिल्ली के पेरेंट्स! 11 साल में राजधानी के 5,559 बच्चे हुए लापता, 695 का अब तक सुराग नहीं

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 04:25 PM (IST)

    राजधानी दिल्ली में मानव तस्करी और लापता लोगों की समस्या गंभीर बनी हुई है। 2015 से 2025 के बीच 5559 बच्चों में से 695 बच्चे अब भी लापता हैं, जबकि कुल 5 ...और पढ़ें

    दिल्ली में बढ़ते मानव तस्करी के मामलों से बढ़ी परेशानी। (जागरण ग्राफिक्स)

    दिल्ली में बढ़ते मानव तस्करी के मामलों से बढ़ी परेशानी। (जागरण ग्राफिक्स)

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में मानव तस्करी भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। 2015 से 2025 तक यानी 11 साल के दिल्ली पुलिस के जिपनेट आंकड़ों को देखा जाए तो नवजात से 18 वर्ष तक के 5559 बच्चे अपने-अपने घरों से लापता हो गए, जिनमें 4864 बच्चों को ही पुलिस ढूंढ पाई।

    करीब 695 बच्चों व किशोरों को 11 साल बाद भी पुलिस नहीं ढूंढ पाई है। इन 11 साल के सभी आयु वर्ग के आंकड़ों को देखा जाए तो राजधानी से कुल 2,55,432 लोग लापता हुए, जिनमें 2,01,455 लोगों को पुलिस ने ढूंढ लिया। 53,977 लोग अभी तक लापता हैं।

    यानी नवजात से सभी आयु वर्ग के ओवर आल आंकड़े को देखा जाए तो इन 11 साल के दौरान हर रोज दिल्ली से करीब 63 लोग लापता हुए। ये आंकड़े दिल्ली वासियों के लिए परेशान व हैरान करने वाले हैं। लापता बच्चे अथवा अन्य लोग आखिर कहां गायब हो जाते हैं ? पुुलिस के लिए इस बारे में पता लगाना वर्षों से चुनौती बनी हुई है।

    यह स्थिति तब है जब लापता लोगों को ढूंढने के लिए क्राइम ब्रांच के अंतर्गत मानव तस्करी नाम से एक अलग सेक्शन है जो सालभर गुमशुदा लोगों व मानव तस्करों के बारे में पता लगा उन्हेें पकड़ने के लिए काम करता है।

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    राजधानी से गायब होने वाले अधिकांश बच्चे भले ही मानव तस्करी करने वाले गिरोह के शिकार नहीं होते हैं लेेकिन उन्हें दिल्ली में कई राज्यों से तस्करी करके लाया जाता है।

    लगभग तीन सालों में 6759 नाबालिगों को कराया मुक्त

    बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए काम करने वाली देशव्यापी संस्था जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत की मानें तो एक अप्रैल 2023 से 29 जनवरी 2026 तक दिल्ली में ट्रैफिकिंग के शिकार हुए 6,759 नाबालिगों को मुक्त कराया गया, जिनमें 2,134 लड़कियां और 3,281 लड़के शामिल थे।

    इस अवधि में दिल्ली में 2, 407 मानव तस्करी के केस दर्ज हुए। ये बच्चे, यूपी, बिहार, झारखंड व बंगाल आदि राज्यों से लाए गए थे।

    रविकांत का कहना है कि देशव्यापी आंकड़ा चिंताजनक भी है क्योंकि संस्था के नेटवर्क से जुड़े 250 से ज्यादा सहयोगी संगठनों ने एक अप्रैल 2023 से 29 जनवरी 2026 के बीच 1,25,408 बच्चों को मानव तस्करी गिरोहों के चंगुल से छुड़ाया गया।

    इस दौरान 56,459 मानव तस्करी के केस दर्ज कराए गए। मुक्त कराए गए बच्चों में 28,797 लड़कियां व 67,387 लड़के हैं। ये न तो स्वजन से बिछ़ड़े थे और न ही मर्जी से भागे थे।

    ये लालच, धोखे और धमकी के कारण गिरोहों के जाल में फंस गए थे। ऐसे मामलों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस जरूरी है।

    क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी का कहना है कि दिल्ली में जितने बच्चे लापता होते हैं उनमें करीब 150 से 200 मामलों की जांच में एक मामला ऐसा सामने आता है जिनमें बच्चों की खरीद फरोख्त करने की बात आती है। जिन गिरोहों के बारे में पता चलता है पुलिस उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लेती है।

    पुलिस की तरफ से एसओपी

    लापता बच्चों को ढूंढने के लिए दिल्ली पुलिस की तरफ से एक स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) बनी हुई है। 22 अप्रैल 2022 को बनाई गई एसओपी में निम्न बातें कही गई है-

    • थानों में बच्चों या बड़ों के गायब होने की शिकायत लेकर आने वालों के लिए फैसिलिटेशन डेस्क की सुविधा हो, जिसे जिले के डीसीपी सुनिश्चित करें।
    • सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत खोजबीन शुरू कर दे...क्योंकि शुरूआती 48 घंटे खास होते हैं। नहीं मिलने पर थाना पुलिस गुमशुदगी की रिपोर्ट को अपहरण में तब्दील कर जांच शुरू कर दें।
    • 18 साल से कम उम्र के लापता बच्चाें के मामले में केस दर्ज करना अनिवार्य है।

    केस दर्ज होने के बाद पुलिस की अनिवार्य कार्रवाई

    लापता बच्चे का केस दर्ज होते ही डीडी एंट्री या एफआइआर की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को दी जाती है। इसकी जानकारी स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) को भी अनिवार्य रूप से भेजी जाती है। 24 घंटे के भीतर सभी विवरण जिपनेट पर अपलोड करना जरूरी होता है।

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    12 घंटे के अंदर ऑल इंडिया लेवल पर विस्तृत संदेश फ्लैश किया जाता है, जिसमें बच्चे की पूरी जानकारी और फोटो शामिल होती है। मिसिंग चिल्ड्रेन इन्फॉर्मेशन फॉर्म भरकर 24 घंटे के भीतर जिला मिसिंग पर्सन स्क्वायड और क्राइम ब्रांच की मिसिंग पर्सन स्क्वायड को भेजा जाता है।

    जांच अधिकारी 48 घंटे के भीतर महत्वपूर्ण स्थानों पर नोटिस सर्कुलेट करते हैं, मुखबिरों को सक्रिय किया जाता है और आखिरी बार जहां बच्चा देखा गया, वहां गहन पूछताछ की जाती है।

    चार घंटे के भीतर सभी बॉर्डर चेक पोस्ट को अलर्ट जारी किया जाता है, ताकि संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा सके। एक सप्ताह के अंदर मामले को मीडिया के माध्यम से भी सार्वजनिक किया जाता है, जिससे बच्चे की तलाश तेज हो सके।

    थाने के पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी

    इंस्पेक्टर (इन्वेस्टिगेशन) बच्चे की तलाश में किए गए सभी प्रयासों का रिकॉर्ड संधारित करते हैं। एसएचओ हर सप्ताह और एसीपी प्रत्येक 15 दिन में एक बार मामले की समीक्षा करते हैं, ताकि जांच की प्रगति पर नजर बनी रहे।

    लापता बच्चों की तलाश पर इनाम और प्रमोशन का प्रावधान

    लापता बच्चों को खोजने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने हेतु इनाम और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन का प्रावधान है। सिपाही से लेकर एएसआइ तक के कर्मियों को एक वर्ष में 18 वर्ष से कम आयु के 80 या उससे अधिक बच्चों को ढूंढने पर, जिनमें कम से कम 25 बच्चे 14 वर्ष से कम आयु के हों, आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया जा सकता है।

    लापता बच्चे की शिकायत कैसे करें

    पीड़ित परिवारों के लिए शिकायत दर्ज कराने के कई माध्यम उपलब्ध हैं। 112 या 1090 नंबर पर कॉल कर सूचना दी जा सकती है। इसके अलावा सीधे संबंधित थाने में जाकर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
    नागरिक 23241210 या 1094 पर फोन कर, इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म, फैक्स, ईमेल, एसएमएस, व्हाट्सएप, पुलिस वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

    दिल्ली में नवजात से 18 वर्ष आयु वर्ग के लापता बच्चों के आंकड़े

    वर्ष लड़के लड़कियां
    2020 186 142
    2021 247 210
    2022 246 166
    2023 272 192
    2024 186 128
    2025 217 143

     

    दिल्ली में नवजात से 18 वर्ष आयु वर्ग के बरामद बच्चों के आंकड़े

    वर्ष लड़के लड़कियां
    2020 164 124
    2021 217 174
    2022 204 137
    2023 216 145
    2024 141 189
    2025 124 90

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