Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ईरान के खिलाफ हमले में अमेरिका का साथ दे रहा पाकिस्तान? ड्रोन हमलों के लिए बेस देकर फंसा PAK

    Updated: Sat, 07 Mar 2026 08:33 AM (GMT+05:30)

    पाकिस्तान ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी ड्रोन हमलों के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। ...और पढ़ें

    ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देकर फंसा पाकिस्तान

    ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देकर फंसा पाकिस्तान

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने हाल में ईरान के खिलाफ अमेरिकी ड्रोन हमलों के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

    अमेरिका का साथ दे रहा पाकिस्तान

    इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स (आइबीटी) की रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई अलग घटना नहीं है। अतीत में भी इस्लामाबाद पर वॉशिंगटन के साथ करीबी तालमेल रखते हुए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाने वाले अमेरिकी अभियानों के लिए खुफिया सहयोग देने के आरोप लगते रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पाकिस्तान ऐसे रणनीतिक धड़े का हिस्सा बनता दिख रहा है जो अल्पकालिक लाभ को क्षेत्रीय स्थिरता से ऊपर रख रहा है।

    रिपोर्ट में पाकिस्तान के उस निर्णय का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें उसने सऊदी अरब और कतर के साथ 'गाजा बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का फैसला किया है।

    रिपोर्ट के अनुसार कागजों पर यह पहल मानवीय और सुलहकारी दिखती है, लेकिन व्यवहार में यह गाजा को लेकर प्रतीकात्मक कूटनीतिक पहल बन सकती है, जबकि वास्तविकता में इजरायल पर जवाबदेही तय करने से बचने वाली शक्तियों के साथ अप्रत्यक्ष तालमेल बना रहता है।

    विश्लेषण में कहा गया है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, इजरायल और अमेरिका के बीच ईरान के खिलाफ उभरते समीकरण के पीछे रणनीतिक हितों की ठंडी गणना काम कर रही है।

    सऊदी अरब लंबे समय से यमन, इराक और लेबनान जैसे क्षेत्रों में ईरान को अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता है और तेहरान की शक्ति कमजोर होना उसके हित में माना जाता है।

    अमेरिका से लाभ कमाना चाहता है पाकिस्तान

    रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक संकट और कूटनीतिक अलगाव से जूझ रहा पाकिस्तान अमेरिका और खाड़ी देशों से आर्थिक सहायता, रक्षा सहयोग और राजनीतिक समर्थन हासिल करना चाहता है।

    अमेरिका लंबे समय से ईरान को नियंत्रित करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जबकि इजरायल इसे अपने सबसे बड़े क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी को कमजोर करने का अवसर मानता है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि इन घटनाक्रमों के बीच जिन सिद्धांतों की बात की जाती है- जैसे इस्लामी एकजुटता, संप्रभुता और मानवीय सरोकार- वे अब चयनात्मक रूप से लागू होते दिख रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता ही नहीं, बल्कि इन देशों की अपनी जनता के बीच भी विश्वास कमजोर पड़ सकता है।

    विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि मौजूदा स्थिति मुस्लिम बहुल देशों के लिए एक कठिन परीक्षा है- क्या वे अल्पकालिक सामरिक लाभ के लिए क्षेत्रीय एकता और स्थिरता को दांव पर लगाएंगे या यह समझेंगे कि बाहरी सैन्य हस्तक्षेप से हासिल होने वाली तात्कालिक जीतें अक्सर लंबे समय में अस्थिरता और संकट को जन्म देती हैं।

    खबरें और भी

    (समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)

    यह भी पढ़ें- कौन है आसिफ रजा मर्चेंट? ईरान के कहने पर रची ट्रंप को मारने की साजिश, अब मिलेगी सजा

    यह भी पढ़ें- पाकिस्तानी में शिया समुदाय ने ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के खिलाफ निकाली रैली