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    गरीब परिवार की बेटियों के जीवन में उजियारा ला रहीं हैं तारा मां

    Updated: Tue, 24 Mar 2026 04:33 PM (IST)

    तारा मां ने 2012 में ऋषिकेश के हरिपुरकलां में श्री मां कन्या विद्यालय की स्थापना की। यह विद्यालय गरीब परिवारों की 250 बेटियों को पहली से आठवीं तक निःश ...और पढ़ें

    विद्यालय की संस्थापक श्री तारा मां। फोटो साभार जयंती दवाड़ी, प्रधानाचार्य

    विद्यालय की संस्थापक श्री तारा मां। फोटो साभार जयंती दवाड़ी, प्रधानाचार्य

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    दीपक जोशी, रायवाला (देहरादून)। नारी को सशक्त बनाए बिना समाज एवं राष्ट्र की उन्नति संभव नहीं है। इसी भावना के साथ तारा मां ने वर्ष 2012 में ऋषिकेश के हरिपुरकलां गांव में श्री मां कन्या विद्यालय नाम से ऐसे शिक्षण संस्थान की नींव रखी, जिसके जरिये उन सैकड़ों बेटियों को निश्शुल्क शिक्षा दी जा रही है, जो बेहद गरीब परिवारों से हैं।

    पहली से आठवीं कक्षा तक संचालित श्री मां कन्या विद्यालय में प्रत्येक वह लड़की प्रवेश पा सकती है, जिसके परिवार की आर्थिकी कमजोर है।

    वर्तमान में यहां 250 बेटियां मुफ्त शिक्षा पा रही हैं। इन बेटियों को ड्रेस, कापी-किताब आदि सामग्री विद्यालय की ओर से ही मुहैया कराई जाती है। विद्यालय में बच्चों के लिए खेलकूद व मनोरंजन के भी भरपूर इंतजाम हैं।

    Rawala Tara Maa

    बेटियों के सर्वागीण विकास पर ध्यान

    सुबह ध्यान, साधना, योग व प्रार्थना और इसके बाद पूरे दिन पढ़ाई। इंडोर गेम के साथ, कंप्यूटर लैब, टीवी, समाचार पत्र की सुविधा भी विद्यालय में है। संगीत प्रशिक्षक के निर्देशन में यह बच्चे गीत-संगीत में भी पारंगत हो रहे हैं।

    बालिकाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच भी दैनिक गतिविधियों का हिस्सा है। तारा मां की सेवा भावना को देखते हुए सभी लोग उन्हें 'पूज्य माताजी' कहकर पुकारते हैं।

    आध्यात्मिक वातावरण और आधुनिक शिक्षा

    विद्यालय की प्रधानाचार्य जयंती दवाड़ी के मुताबिक बच्चे संस्कारित बनें, इसके लिए उन्हें आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया जाता है। साथ ही कंप्यूटर कक्षा के माध्यम से आधुनिक शिक्षा से भी जोड़ा गया है।

    बताया कि तारा मां की प्रेरणा से कन्या संरक्षण और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की दिशा में भी कार्य हो रहा है।

    श्रीतारा मां मिशन से जुड़ीं मंजू तेजवानी बताती हैं कि तारा मां ने हरिपुरकलां में आश्रम की स्थापना की, जहां आसपास की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र चलाया जा रहा है।

    बताया कि तारा मां का भाव महिलाओं को शिक्षा के साथ आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का है।

    Rawala Tara Maa giving free Education

    ऐसे हुई विद्यालय की स्थापना

    आश्रम के निकट ग्रामीण परिवेश में भ्रमण के दौरान तारा मां को ऐसी कन्याएं दिखीं, जो स्कूल नहीं जाती थीं। वहीं, हरिद्वार से सटे हरिपुरकलां के आसपास स्थित मलिन बस्तियों की बेटियां भी अच्छी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाती थीं।

    तारा मां ने ऐसी कन्याओं के लिए निश्शुल्क पाठशाला चलाने का निर्णय लिया, ताकि वह भी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें।

    इसके लिए उन्होंने हरिपुरकलां में श्री ओंकारानंद ट्रस्ट की स्थापना की, ताकि बच्चों की पढ़ाई विधिवत शुरू कराई जा सके। इसके बाद तारा मां की प्रेरणा से संस्था को दान देने के लिए जागरूक लोग आगे आने लगे। वर्तमान में दान देने वालों की संख्या काफी बढ़ गई है।

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    Rawala School

    70 बेटियां कर चुकीं आठवीं पास

    वर्ष 2012 से सिर्फ पांच छात्राओं से कन्या विद्यालय की शुरुआत हुई थी। तब से अब तक विद्यालय से आठवीं की 70 छात्राएं पास-आउट हो चुकी हैं।

    ऐसे मिलता है प्रवेश

    श्री मां कन्या विद्यालय में गरीब वर्ग की छात्राओं को ही प्रवेश दिया जाता है। विद्यालय की शिक्षक बस्तियों में सर्वे कर गरीब कन्याओं को विद्यालय में प्रवेश लेने के लिए प्रेरित करती हैं।

    इसके लिए उनके बीपीएल राशन कार्ड अथवा आय प्रमाण पत्र को आधार माना जाता है। इसके अलावा विद्यालय की शिक्षक छात्रा के घर जाकर भी परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन करती हैं।

    Tara maa School

    आपदा पीड़ित पांच बच्चों को दिया आश्रय

    वर्ष 2013 में केदारघाटी की आपदा में अनाथ हुए पांच बच्चों को तारा मां ने हरिपुरकलां स्थित अपने आश्रम में न केवल आश्रय दिया, बल्कि उनके पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा और उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का जिम्मा भी उठाया।

    बालिग होने के बाद तीन बच्चे अपने गांव लौट गए। एक बेटी गुरुग्राम स्थित श्री मां मोंटेसरी स्कूल में शिक्षक है, जबकि दूसरी बेटी तारा मां के सानिध्य में हरिपुरकलां स्थित सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध भागीरथी विद्यालय में 12वीं की छात्रा है।

    बचपन में ही ले ली थी संन्यास दीक्षा

    मूलरूप से तमिलनाडु की रहने वाली श्री तारा मां ने छोटी उम्र ही संन्यास दीक्षा ले ली थी। वर्ष 1990 में वह हरिद्वार भ्रमण पर आईं और यहां उनका मन इस कदर रमा कि फिर वापस नहीं लौटीं। इसी वर्ष

    उन्होंने रायवाला में श्री मां मिशन की स्थापना की और इसके जरिये समाज उत्थान के कार्यों में सक्रिय हो गईं। वर्तमान में रायवाला के अलावा गुरुग्राम, मुंबई और चेन्नई में मिशन के विद्यालय संचालित हो रहे हैं।

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