कलम और किताब से क्रांति, बठिंडा के बल्लो गांव में भगत सिंह की सोच; खुला आधुनिक पुस्तकालय और कंप्यूटर सेंटर
बठिंडा के बल्लो गांव की सरपंच अमरजीत कौर ने भगत सिंह के विचारों से प्रेरित होकर सामाजिक बदलाव की मिसाल पेश की है। उन्होंने 'शगुन योजना' शुरू की, जिसके ...और पढ़ें
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गांव बल्लो में बच्चों के लिए बनाया गया शानदार पुस्तकालय (फोटो: जागरण)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
साहिल गर्ग, बठिंडा। शहीद-ए-आजम भगत सिंह का शहादत दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि समाज में बदलाव और जागरूकता का संदेश भी है। इसी भावना को जीवंत करते हुए पंजाब के बठिंडा जिले के गांव बल्लो की महिला सरपंच अमरजीत कौर ने अपने गांव में एक ऐसी पहल की है, जो आज के समय में सामाजिक क्रांति का उदाहरण बन चुकी है।
भगत सिंह ने जिस समाज का सपना देखा था, वह केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक बुराइयों से मुक्त, जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों वाला भारत था। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए करीब दो साल पहले सरपंच अमरजीत कौर ने गांव में ‘शगुन योजना’ शुरू की। इस योजना के तहत यदि कोई परिवार शादी में शराब नहीं परोसता और तेज आवाज में साउंड सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करता, तो पंचायत की ओर से उसे 21 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह पहल केवल आर्थिक प्रोत्साहन नहीं, बल्कि सोच में बदलाव की शुरुआत रही।
गांवों में शादियां लंबे समय से दिखावे और फिजूलखर्ची का माध्यम बनती रही हैं। शराब के कारण कई बार विवाद होते हैं और तेज आवाज में डीजे बच्चों की पढ़ाई में बाधा बनता है। अमरजीत कौर ने इन समस्याओं को जड़ से खत्म करने का प्रयास किया। परिणाम यह रहा कि बल्लो गांव में अब शादियां सादगी और अनुशासन का प्रतीक बन रही हैं। भगत सिंह के विचारों और नारी शक्ति के इस संगम ने बल्लो गांव को एक नई पहचान दी है। अमरजीत कौर ने यह साबित किया है कि नारी केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज को दिशा देने में सक्षम है। उनका यह कदम नशा मुक्ति अभियान को भी मजबूती दे रहा है।
अमरजीत कौर ने गांव के युवाओं और बच्चों के भविष्य को संवारने पर भी बराबर ध्यान दिया। गांव में आधुनिक पुस्तकालय की स्थापना की गई, जिसमें 4,000 से अधिक किताबें रखी गईं और 25 कंप्यूटर लगाए गए। इससे न केवल छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का अवसर मिला, बल्कि हर उम्र के ग्रामीणों के लिए यह पुस्तकालय ज्ञान का केंद्र बन गया।
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गांव का बस स्टैंड भी अब एक नई पहचान लिए हुए है। स्वच्छ और सुव्यवस्थित बस स्टैंड गांव में आने वाले हर व्यक्ति को यह संदेश देता है कि बदलाव केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि सोच और नेतृत्व से आता है। आज बल्लो को आदर्श गांव का दर्जा मिल चुका है। बीते वर्ष स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली में अमरजीत कौर को सम्मानित किया गया।
अमरजीत कौर की इस पहल को अब अन्य गांव भी अपना रहे हैं। बठिंडा के ही गांव मानक वाला और हर रंगपुरा की पंचायतों ने भी इस माडल को अपनाया है। मानक वाला की पूर्व सरपंच सैशनदीप कौर के अनुसार, इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इससे सामाजिक माहौल बेहतर हुआ है।
गांव बल्लो निवासी करमजीत कौर कहती हैं कि पहले शादी-ब्याह में माहौल कई बार बिगड़ जाता था। शराब के कारण झगड़े भी होते थे। अब माहौल बदल गया है। शांति रहती है और महिलाएं भी बिना किसी डर के कार्यक्रमों में शामिल होती हैं। गांव के ही गुरदीप सिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी इसी सादगी से की। शराब और तेज साउंड सिस्टम के बिना शादी में खर्च भी कम हुआ।