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सहारनपुर जाली नोट कांड में नेपाल कनेक्शन, सिद्धार्थनगर के पुराने मामले से जुड़ रहे तार

By Krishnapal SinghEdited By: Vivek Shukla
Published: Fri, 04 Sep 2026 12:35 PM (IST)

सहारनपुर के पीएनबी करेंसी चेस्ट में मिले 17 करोड़ के जाली नोटों का तार नेपाल से जुड़ रहा है, जहां ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. सहारनपुर पीएनबी जाली नोट कांड में नेपाल कनेक्शन की पुष्टि हुई।

  2. सिद्धार्थनगर के छात्र सहित दो लोग नेपाल में नकली नोटों संग गिरफ्तार।

  3. यह घटना 2008 के डुमरियागंज एसबीआई जाली नोट मामले से जुड़ी।

कृष्णपाल सिंह, शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। वर्ष 2008 में सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज में एसबीआइ के करेंसी चेस्ट से चार करोड़ दो लाख के जाली नोट पकड़े गए। तब मामले के पीछे नेपाल में बैठे आइएसआइ के गुर्गों की साजिश सामने आई थी। अब सहारनपुर के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोटों की बरामदगी के तार भी नेपाल से जुड़ रहे हैं।

31 जुलाई को सहारनपुर की ग्लोकल यूनिवर्सिटी में बीएएमएस की पढ़ाई कर रहे दो छात्र नेपाल के रूपन्देही में भारतीय जाली नोटों के साथ पकड़े गए, इनमें से एक सिद्धार्थनगर और दूसरा महाराष्ट्र का रहने वाला है। इसीलिए जांच एजेंसियां अब दोनों मामलों के बीच संबंध तलाश रही हैं। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, सिद्धार्थनगर का अभिषेक कसौधन और महाराष्ट्र का यश बीएएमएस के तीसरे सेमेस्टर के छात्र रहे हैं। दोनों वहां रेलवे स्टेशन के निकट प्रेक्टिस भी करते थे।

20 मई को अभिषेक नेपाल के पशुपतिनाथ दर्शन के लिए घर आया था। नेपाल से लौटने के बाद वह दो दिन घर पर रुका और फिर सहारनपुर जाने की बात कहकर निकला। बाद में नेपाल में 70 हजार रुपये के जाली नोटों के साथ सहपाठी सहित उसकी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।

छात्रों के मोबाइल लोकेशन, काल डिटेल, बैंक खातों के लेन-देन, सहारनपुर में उनके संपर्कों और नेपाल आने-जाने के रिकार्ड की पड़ताल से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों घटनाएं महज संयोग हैं या नकली भारतीय मुद्रा के किसी बड़े नेटवर्क की कोई कड़ी इनके पीछे छिपी है।

सिद्धार्थनगर के लोगों के बीच ताजा हुईं डुमरियागंज एसबीआइ कांड की यादें

सहारनपुर में पकड़े गए जाली नोट और वहां के दो छात्रों की नेपाल में गिरफ्तारी ने सिद्धार्थनगर के लोगों में डुमरियागंज एसबीआइ कांड की यादों को ताजा कर दिया। 29 जुलाई, 2008 को डुमरियागंज एसबीआइ शाखा के करेंसी चेस्ट की जांच में चार करोड़ दो लाख रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे। इससे तीन दिन पहले, 26 जुलाई को एटीएस ने तत्कालीन कैशियर सुधाकर त्रिपाठी, आबिद अली और रामशंकर सिंह के कब्जे से भी जाली नोट पकड़े थे। मामले की जांच सीबीआइ ने की थी।

उस समय नेपाल के रास्ते नकली भारतीय मुद्रा भारत में पहुंचाने और खपाने का मामला सामने आया था। आइएसआइ द्वारा नेपाल के रास्ते जाली नोटों का नेटवर्क संचालित किए जाने की आशंका भी जांच में प्रमुखता से सामने आई थी। विशेष सीबीआइ न्यायालय ने 18 जनवरी, 2012 को तीनों को दोषी ठहराते हुए छह-छह वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

आठ साल पहले भी पकड़ी गई थी नेपाल से आई नकली नोटों की खेप

भारत-नेपाल सीमा से लगे इलाकों में जाली नोट का कारोबार कोई नया खतरा नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में सामने आए मामलों को जोड़कर देखें तो नकली भारतीय मुद्रा के इस कारोबार का नेटवर्क सीमा पार नेपाल से लेकर बिहार और गोरखपुर के बाजारों तक फैला नजर आता है। नेपाल से जाली नोट आने का सिलसिला कितना पुराना है, इसका अंदाजा पांच दिसंबर 2016 के कैंपियरगंज के मामले से लगाया जा सकता है।

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बिजली की दुकान पर 2000 रुपये का नकली नोट चलाने की कोशिश करते एक व्यक्ति को पकड़ा गया था। पुलिस की जांच में सामने आया था कि वह नकली नोट नेपाल से लेकर आया था। वहीं,11 सितंबर 2024 को ठूठीबारी पुलिस ने जाली नोट के साथ रामविनोद शर्मा निवासी हरिहरपुर, सिंदुरिया को गिरफ्तार किया था। उसके पास से 500 रुपये के 10 नए, 90 पुराने और बंद हो चुके 1000 रुपये के 99 नोट के अलावा 100 रुपये का नेपाली जाली नोट और बाइक बरामद हुई थी।

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नेपाल में पकड़े गए दोनों आरोपितों में से एक सिद्धार्थनगर का मूल निवासी है। दूसरा मामला सहारनपुर से जुड़ा है। सहारनपुर पुलिस इसमें जांच कर रही है। इस प्रकरण में यदि वहां की पुलिस कुछ सहयोग मांगेगी तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा।

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-मयंक द्विवेदी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, शोहरतगढ़