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सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष और महामंत्री का लाइसेंस निलंबित, बार कौंसिल ऑफ UP की बड़ी कार्रवाई

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 08 Sep 2026 08:35 PM (IST)

बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने लखनऊ सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का अधिवक्ता ...और पढ़ें

बार कौंसिल ऑफ उप्र ने सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष व महामंत्री का लाइसेंस निलंबित कर दिया।

बार कौंसिल ऑफ उप्र ने सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष व महामंत्री का लाइसेंस निलंबित कर दिया।

HighLights

  1. बार कौंसिल ऑफ यूपी की आपात वचुर्अल बैठक में लिया गया यह महत्वपूर्ण निर्णय

  2. अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल व महामंत्री अवनीश दीक्षित को कारण बताओ नोटिस जारी

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का अधिवक्ता पंजीकरण निलंबित करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कौंसिल के सचिव आरके शुक्ल की तरफ से मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।

बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की इसी दिन आपात वर्चुअल बैठक में पूर्व अध्यक्ष देवेन्द्र मिश्र नगरहा के प्रस्ताव पर विचार किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि कौंसिल की सामान्य बैठक (23 अगस्त 2026) में प्रस्ताव पारित हुआ था कि हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के तहत सेंट्रल बार एसोसिएशन के चुनाव के संबंध में जो आदेश पारित किया गया था और जो एल्डर्स कमेटी बनाई गई थी, उसी कमेटी को चुनाव कराने के लिए अधिकृत किया गया था।

चुनाव बार कौंसिल के पांच सदस्यों- श्रीनाथ त्रिपाठी, इमरान माबूद खान, मधुसूदन त्रिपाठी, देवेन्द्र मिश्र नगरहा और शिरीष कुमार महरोत्रा के पर्यवेक्षण में कराया जाना था। आरोप है कि सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और मंत्री ने अपने सदन में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया जो पूर्णतः असंवैधानिक है और इससे बार कौंसिल की गरिमा को ठेस पहुंची है।

यह कृत्य अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत व्यावसायिक कदाचार की श्रेणी में आता है। बहुमत से निर्णय लिया गया कि दोनों पदाधिकारियों का पंजीकरण निलंबित कर नोटिस जारी किया जाए कि क्यों न उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाए।

प्रकरण अनुशासन समिति के अध्यक्ष शिवकिशोर गौड़ और प्रतिनिधि सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी को आवंटित किया गया है, जो सुनवाई कर उचित आदेश पारित करेंगे। सदस्य अखिलेश कुमार अवस्थी और परेश मिश्र का मत था कि केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए।

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