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‘किराये के घर में एक्सीडेंटल डेथ के लिए मकान मालिक जिम्मेदार नहीं’, इलाहाबाद HC ने केस डायरी रद की

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 08 Sep 2026 05:27 PM (IST)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि किराये के घर में आकस्मिक मृत्यु के लिए मकान मालिक जिम्मेदार नहीं होगा, ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. कानपुर के काकादेव में गैस गीजर से छात्र की मौत मामले में मकान मालिक को राहत

  2. याची के खिलाफ थाना काकादेव बीएनएस की धारा 106 में चार्जशीट दाखिल हुई थी

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई लापरवाही नहीं है तो किराये के घर में हुई ‘एक्सीडेंटल’ डेथ के लिए मकान मालिक ज़िम्मेदार नहीं है। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी करते हुए कानपुर में गैस गीजर से कार्बन मोनोऑक्साइड लीक होने के कारण किरायेदार छात्र की मौत मामले में मकान मालिक अवधेश सिंह के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा, सिर्फ मकान मालिक होने के आधार पर हत्या जैसी आपराधिक लापरवाही का केस नहीं चल सकता।

छात्र की बाथरूम में संदिग्ध परिस्थिति में मौत हुई थी 

याची के खिलाफ थाना काकादेव में चार्जशीट दाखिल हुई थी। विपक्षी संतोष कुमार गुप्ता ने नौ जनवरी 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसका बेटा पिछले आठ महीने से याची के मकान में किराये पर रहकर आइआइटी की तैयारी कर रहा था। पहली जनवरी 2025 को उसे सूचना मिली कि उसके बेटे की बाथरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लिया 

आरोप लगाया कि बाथरूम में गैस गीजर लगा था, जिसमें वेंटिलेशन नहीं था और कार्बन मोनोआक्साइड गैस के कारण दम घुटने से मौत हुई। जांच के बाद पुलिस ने सात सितंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल की और मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसे 15 नवंबर 2025 को संज्ञान ले लिया।

कोर्ट ने कहा कि छात्र की मौत दुर्भाग्यपूर्ण

याची के अधिवक्ता ने कहा कि रिकार्ड पर मकान मालिक की कोई घोर लापरवाही नहीं है। सरकारी वकील ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दिया कि मौत कार्बन मोनोआक्साइड से हुई। कोर्ट ने कहा कि छात्र की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन बीएनएस की धारा 106 के तहत आपराधिक दायित्व तय करने के लिए सिर्फ मौत होना काफी नहीं है। यह साबित होना चाहिए कि आरोपित का कोई सीधा और घोर लापरवाही भरा कृत्य दुर्घटना से जुड़ा है। 

महज अंदाजे पर आपराधिक केस नहीं चल सकता 

इस केस में सिर्फ इतना है कि याची मकान का मालिक है और बाथरूम में गीजर लगा था। ऐसा कोई सबूत नहीं कि गीजर सुरक्षा मानकों के खिलाफ लगाया गया था, वह खराब था और इसकी जानकारी मकान मालिक को थी, या पहले कभी लीकेज की शिकायत के बाद भी उसने ठीक नहीं कराया। महज अंदाजे पर आपराधिक केस नहीं चल सकता। मकान के स्वामित्व से आपराधिक जिम्मेदारी नहीं बनती।

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