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प्रयागराज में बढ़ा स्पेशल मैरिज का चलन, दूसरे धर्म और जाति के लोग आगे, क्या है 'विशेष विवाह', कैसे होता है?

By Gyanendra Singh Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 12 May 2026 02:17 PM (IST)

प्रयागराज में जाति और धर्म बदले बिना शादी करने के लिए स्पेशल मैरिज का चलन बढ़ रहा है। इस वर्ष ...और पढ़ें

प्रयागराज में जाति-धर्म और पहचान न बदले, इसलिए प्रेमी युगल अब स्पेशल मैरिज कर रहे हैं।

प्रयागराज में जाति-धर्म और पहचान न बदले, इसलिए प्रेमी युगल अब स्पेशल मैरिज कर रहे हैं।

HighLights

  1. जाति और धर्म व पहचान न बदले, इसलिए प्रेमी युगल कर रहे स्पेशल मैरिज

  2. इस वर्ष अब तक 8 जोड़ों ने की ऐसी शादी, कल भी एक युगल ने किया विवाह

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। शहर में स्पेशल मैरिज का चलन बढ़ता जा रहा है। जाति-धर्म और पहचान न बदले, इसलिए प्रेमी युगल अब स्पेशल मैरिज करने लगे हैं। सोमवार को भी कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम वित्त एवं राजस्व के कार्यालय में एक जोड़े ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी की। इस दौरान जोड़े के कुछ परिचित ही थे। जनवरी से अब तक कुल आठ जोड़ों ने इस तरह से विवाह किया। वहीं पिछले वर्ष 2025 में 21, 2024 में 28 तो 2023 में 15 जोड़ों ने स्पेशल मैरिज किया था।

विशेष विवाह अधिकारी हैं एडीएम वित्त एवं राजस्व

वैसे तो ज्यादातर लोग शादी करने के बाद उपनिबंधक कार्यालय में जाकर विवाह पंजीयन कराते हैं, जबकि स्पेशल मैरिज की प्रक्रिया विशेष विवाह अधिकारी के कार्यालय में पूरी होती है। विशेष विवाह अधिकारी का दायित्व एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह के पास है।

करेली के युवक व लखनऊ की युवती का स्पेशल मैरिज

सोमवार यानी 11 मई को जीटीबी नगर करेली निवासी एक ई-कामर्स कंपनी में कार्यरत युवक और लखनऊ के आशियाना में रहने वाली युवती ने विशेष विवाह अधिकारी की मौजूदगी में उनके कार्यालय में स्पेशल मैरिज की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद उन्हें इसका प्रमाण पत्र दिया गया। इस वर्ष जिन युगल की स्पेशल मैरिज हुई है, उसमें पांच युवक और युवतियां अलग धर्म की हैं।

विशेष विवाह कैसे होता है?

विशेष विवाह अधिकारी ने बताया कि यह कानून दो अलग-अलग धर्म, जाति या राष्ट्रीयता के व्यक्तियों को बिना अपना धर्म बदले विवाह करने की अनुमति देता है। यह एक सिविल मैरिज (कोर्ट मैरिज) है, जिसमें धार्मिक रीति-रिवाजों के बजाय कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके विवाह संपन्न होता है और इसे सरकारी अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाता है।

मैरिज आफिसर को 30 दिन पहले नोटिस देना होता है

उन्होंने बताया कि इसके तहत विवाह के लिए मैरिज आफिसर को 30 दिन पहले नोटिस देना होता है। फिर 30 दिनों के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय में गवाहों के साथ हस्ताक्षर करके शादी पूरी होती है। इस शादी में युवक और युवती तथा उनके परिजनों की सहमति के लिए पुलिस, प्रशासन व एलआइयू की रिपोर्ट लगती है। बताया कि यह कानून अंतर-धार्मिक और प्रेम विवाह के लिए एक सुरक्षित और कानूनी विकल्प प्रदान करता है।

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