तीन वर्षीय मासूम के लिए 'सुपरहीरो' बनी प्रयागराज जीआरपी, तीन घंटे में सुरक्षित रेस्क्यू कर पिता को सौंपा
प्रयागराज जंक्शन पर अपने पिता से बिछड़ी तीन साल की बच्ची सविता को जीआरपी ने तीन घंटे के भीतर सुरक्षित ...और पढ़ें

प्रयागराज जंक्शन पर पिता संग मासूम और उसे मिलवाने वाली जीआरपी टीम के सदस्य। सौजन्य : जीआरपी
HighLights
प्रयागराज जंक्शन पर पिता से बिछड़ी तीन वर्षीय सविता भीड़ में गुम हो गई थी
जीआरपी व सीसीटीवी कंट्रोल रूम सक्रिय, इमरजेंसी प्रोटोकाल लागू किया गया
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रेलवे स्टेशन की भीड़, अपनों से बिछड़ने का खौफ और एक बेबस पिता की सिसकियां-लेकिन इस डर और आंसू के बीच जीआरपी प्रयागराज ने जो कर दिखाया, वह लोगों के लिए काबिलेतारीफ था। मिशन शक्ति-पांच के तहत तीन घंटे में तीन वर्षीय मासूम के लिए 'सुपरहीरो' बनी जीआरपी ने न सिर्फ बेटी को सुरक्षित बचाया, बल्कि उस पिता से भी मिलवा दिया।
लापता हो गई थी तीन साल की बेटी
कानपुर के शिवराजपुर से आए बंटी तीन वर्षीय नन्हीं बेटी सविता के साथ प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। उन्हें अपने गांव जाना था। थकान की वजह से पिता की आ्रंख लग गई। इस बीच सविता उठी और खेलते खेलते दूर निकल गई। बंटी की जब आंख खुली तो पास में बेटी नहीं दिखी। परेशान बंटी इधर उधर बेटी को खोजने लगे। स्टेशन की भीड़ में बच्ची को खोजना उनके लिए मुश्किल था।
सीसीटीवी फुटेज देखा गया
जैसे ही सूचना थाना जीआरपी तक पहुंची, प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार सिंह ने बिना एक सेकंड गंवाए 'इमरजेंसी प्रोटोकाल' लागू कर दिया। सीसीटीवी कंट्रोल रूम को सक्रिय किया गया। एक तरफ पुलिस की क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) प्लेटफार्मों पर दौड़ रही थी, तो दूसरी तरफ डिजिटल स्क्रीन पर बच्ची की हर हरकत को ट्रैक किया जा रहा था।
तीन घंटे में मिल गई सफलता
हजारों की भीड़ और दर्जनों सीसीटीवी कैमरों के जाल को खंगालते हुए आखिरकार पुलिस की पैनी नजरों ने सविता को ढूंढ निकाला। एक सीसीटीवी में वह जाते हुए दिखी थी। बस सीसीटीवी के माध्यम से आखिरकार लगभग 500 मीटर दूर सविता को ट्रैक किया गया। तत्काल वायरलेस पर अलर्ट जारी हुआ। क्यूआरटी टीम मौके पर पहुंची। जब पुलिसकर्मियों ने नन्हीं सविता को सुरक्षित अपनी गोद में उठा कर पिता के पास पहुंचाया, तो स्टेशन परिसर में लोगों ने तालियां बजाकर सराहना की।
पिता की भर आई आंखें
जब रोते हुए पिता ने अपनी हंसती हुई बेटी को दोबारा सीने से लगाया, तो वह दृश्य देखकर वहां मौजूद यात्रियों की भी आंखें छलक आईं। पिता ने गदगद होकर कहा- मेरे लिए तो ये पुलिसवाले आज साक्षात भगवान बनकर आए हैं।
टीम में ये रहे शामिल
इस मिशन को अंजाम देने में प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार सिंह, उनि अरविंद यादव, अमर सिंह और उनकी टीम में लल्लन सिंह, विशाल, रवि, मनोज, प्रदीप, सूरज व दीपक का विशेष योगदान रहा।
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