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प्रयागराज-मुंबई रूट पर 1640 करोड़ रुपये से बिछेगी 87Km लंबी नई रेल पटरी, ट्रेनों की गति व संख्या बढ़ेगी

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 07 Sep 2026 08:00 PM (IST)

मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है, जिससे प्रयागराज-मुंबई रूट पर ट्रेनों की गति ...और पढ़ें

प्रयागराज-मुंबई रूट पर तीसरी रेल लाइन आगामी कुंभ से पहले बिछ जाएगी।

प्रयागराज-मुंबई रूट पर तीसरी रेल लाइन आगामी कुंभ से पहले बिछ जाएगी।

HighLights

  1. मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी लाइन से मुंबई रूट पर बढ़ेगी ट्रेनों की गति व संख्या

  2. 67 कलोमीटर लंबी लाइन पर पहले खड़े होंगे 30 बड़े रेल पुल, फिर बिछेगी पटरी

  3. कुंभ 2031 से पूर्व मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी लाइन पर होगा बिछाई जाएंगी पटरियां

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। उत्तर और पूर्वी भारत को देश के पश्चिमी व मध्य क्षेत्रों से जोड़ने वाले सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर को लेकर केंद्र सरकार और रेलवे ने महा-योजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। वर्ष 2031 में संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित होने वाले आगामी कुंभ मेले से पहले रेलवे ने मुंबई रूट के सबसे बड़े बॉटलनेक (अड़चन) को जड़ से खत्म करने की तैयारी पूरी कर ली है। उत्तर मध्य रेलवे की महत्वाकांक्षी ‘मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी लाइन परियोजना’ पर केंद्र सरकार ने अंतिम कानूनी मुहर लगा दी है।

खर्च होंगे 1640 करोड़ रुपये

कार्ययोजना के तहत इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1640 करोड़ रुपये की लागत आएगी। वहीं, रेल मंत्रालय ने रेलवे अधिनियम के तहत भारत के आधिकारिक राजपत्र में धारा 20 ई का अंतिम गजट भी जारी कर दिया है। इसके तहत प्रयागराज जिले में कुल 3,66,877 वर्ग मीटर (करीब 36.68 हेक्टेयर) निजी कृषि भूमि का अंतिम अधिग्रहण तय हो गया है। गजट प्रकाशित होते ही यह जमीन सभी प्रकार के भारों से मुक्त होकर केंद्र सरकार के अधीन आ चुकी है। 

कुंभ 2031 का 'महा-कवच' बनेगी तीसरी लाइन

वर्ष 2031 में प्रयागराज में लगने वाले कुंभ मेले में देश और दुनिया से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। उस दौरान महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत से प्रयागराज आने वाली नियमित व स्पेशल ट्रेनों का दबाव अपने चरम पर होगा। 

मेला स्पेशल ट्रेनों को पास कराने में परेशानी होती है 

वर्तमान में मानिकपुर से इरादतगंज के बीच केवल दोहरी लाइन होने की वजह से मेला स्पेशल ट्रेनों को पास कराने में रेलवे के पसीने छूट जाते हैं। रेलवे का स्पष्ट लक्ष्य है कि आगामी चार वर्षों के भीतर (2030 तक) इस 84 किलोमीटर लंबे ट्रैक का निर्माण हर हाल में पूरा कर लिया जाए, ताकि कुंभ 2031 के दौरान मुंबई और मध्य भारत से आने वाली श्रद्धालुओं की एक भी ट्रेन आउटर पर न फंसे और सबको निर्बाध ग्रीन सिग्नल मिल सके। 

पहले बनेंगे 30 बड़े पुल, बाद में बिछेगी पटरी

रेलवे प्रशासन ने इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए एक अनोखी और ठोस इंजीनियरिंग रणनीति बनाई है। अक्सर देखा जाता है कि पटरी बिछने के बाद पुलों के काम में देरी होती है, लेकिन इस बार योजना बिल्कुल उलट है। परियोजना के तहत चिह्नित 30 स्थानों पर बड़े रेल पुलों का निर्माण सबसे पहले किया जाएगा। पुलों का ढांचा तैयार होने के बाद ही रेल पटरी बिछाने का काम तेजी से शुरू होगा। 

सुरक्षित क्रॉसिंग नेटवर्क

मार्ग पर आवागमन को पूरी तरह सुरक्षित और जाम-मुक्त बनाने के लिए 19 रेल अंडरब्रिज (RUB) और 6 रेल ओवरब्रिज (ROB) बनाए जाएंगे।

स्टेशनों का कायाकल्प

यह 84 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन कुल 12 रेलवे स्टेशनों को कवर करेगी। सभी स्टेशनों का भी कायाकल्प होगा। यहां यात्री सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

50 नहीं, अब 37 हेक्टेयर जमीन

इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की शुरुआत इसी साल 16 जनवरी को धारा 20 ए के प्रारंभिक गजट के साथ हुई थी। उस समय 25 गांवों से संयुक्त रूप से 5,01,900.80 वर्ग मीटर (लगभग 50.1903 हेक्टेयर) जमीन अधिगृहीत करने का खाका खींचा गया था। इसके बाद 28 जनवरी को समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस जारी कर दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं।

24 आपत्तियों का निस्तारण 

सार्वजनिक सूचना के बाद जमीन मालिकों व किसानों की ओर से कुल 24 आपत्तियां (आक्षेप) दर्ज कराई गईं। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (सक्षम प्राधिकारी) ने सभी 24 आपत्तियों की स्थलीय सुनवाई कर उनका विधिवत निस्तारण किया। आवश्यक संशोधनों और पैमाइश के बाद रकबे को घटाकर 36.68 हेक्टेयर तय किया गया और अब अंतिम गजट जारी कर दिया गया। 

अधिग्रहण के दायरे में आए बारा-करछना के 25 गांव

संशोधित अंतिम गजट के तहत प्रयागराज की दो तहसीलों के 25 गांवों की भूमि को शामिल किया गया है। बारा तहसील के 24 गांव में जसरा, मनकवार, मुण्डेहरा, पिपरांव, अमरेहा, बारा खास, बेरुई, चंद्रा, घुरमी, हरदी, जोरवट, कपारी, खंटगिया, लोहगरा, मतरवार, सेहुड़ा, शंकरगढ़, ताला तालुका लखनपुर, नीबी, पाण्डर, चक घूरपुर, बरना, बुदावा और देवरिया शामिल है। जबकि करछना तहसील का गांव चकसेमरा भी इसमें शामिल किया गया है। 

कुल 149.3 हेक्टेयर भूमि का होगा उपयोग

अंतिम गजट (धारा 20ई) प्रकाशित होते ही इन गांवों के चिन्हित किसानों व जमीन मालिकों को रेलवे के तय नियमों के अनुसार मुआवजा वितरण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। हालांकि पूरी 84 किमी परियोजना में कुल मिलाकर लगभग 149.3 हेक्टेयर भूमि का उपयोग होगा। जिसमें प्रयागराज के अलावा मध्य प्रदेश के हिस्से में भी जमीन अधिग्रहण किया जाएगा।

मुंबई का सफर होगा सुपरफास्ट, खत्म होगा ट्रैफिक दबाव

वर्तमान में प्रयागराज/छिवकी - इरादतगंज - शंकरगढ़ - मानिकपुर - सतना - कटनी - जबलपुर - इटारसी - भुसावल - मुंबई (LTT/CSMT) रेलखंड देश का सबसे व्यस्त रूट है। इस रूट पर वर्तमान लाइन क्षमता 131 फीसदी है, यानी ट्रैक अपनी तय सीमा से कहीं ज्यादा लोड पर चल रहा है। ट्रैक व्यस्त होने के कारण कामायनी एक्सप्रेस, महानगरी एक्सप्रेस, प्रयागराज-LTT सुपरफास्ट और दुरंतो जैसी ट्रेनों को आउटर या छोटे स्टेशनों पर रोक दिया जाता है।

नई ट्रेनों का रास्ता साफ

तीसरी लाइन बिछने से लाइन क्षमता का विस्तार होगा, ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी और मुंबई रूट पर चलने वाली यात्री गाड़ियों के सफर में घंटों की बचत होगी।

बारा थर्मल पावर प्लांट और सीमेंट कॉरिडोर को संजीवनी

यह रेल लाइन केवल यात्रियों की सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक पहिये को भी नई गति देगी। इस तीसरी रेल लाइन का सीधा उपयोग प्रयागराज स्थित बारा थर्मल पावर प्लांट को निर्बाध कोयले की आपूर्ति के लिए किया जाएगा, जिससे बिजली उत्पादन में कोई रुकावट नहीं आएगी।

सीमेंट और क्लिंकर हब

प्रयागराज और मध्य प्रदेश का रीवा जिला भारत के प्रमुख सीमेंट और क्लिंकर उत्पादक क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इस रूट पर जेके, जेजेएस और बिड़ला जैसी दिग्गज कंपनियों के बड़े सीमेंट प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं।

माल ढुलाई में भारी उछाल

इस नई लाइन के शुरू होने से अकेले इस रूट पर 16 मिलियन टन प्रति वर्ष लोडिंग का कार्य बढ़ जाएगा। यह रूट ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) के लिए एक प्रमुख फीडर का काम करेगा, जिससे सीमेंट, क्लिंकर, चूना पत्थर, कोयला और लोहा-इस्पात की ढुलाई बेहद तेज और सस्ती हो जाएगी।

पूर्वांचल-बुंदेलखंड की कृषि अर्थव्यवस्था में आएगा बदलाव

इस रेल परियोजना को सीधे तौर पर कृषि अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया है। पूर्वांचल और विंध्य-बुंदेलखंड क्षेत्र में गेहूं, चावल, अरहर, उड़द और चीनी का बंपर उत्पादन होता है। तीसरी लाइन बनने से किसान और व्यापारी अपने कृषि एवं डेयरी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों (खासकर मुंबई और पश्चिमी भारत) तक बिना किसी देरी के पहुंचा सकेंगे। इससे प्रयागराज, चित्रकूट, रीवा और छतरपुर जिलों में कृषि-आधारित उद्योगों और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण को लाभ व 29 लाख मानव दिवस का रोजगार

यह परियोजना पर्यावरण और रोजगार दोनों के लिहाज से मील का पत्थर बनेगी। तीसरी लाइन पर ट्रेनों की औसत गति बढ़ने और ठहराव खत्म होने से सालाना लगभग 3 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी। इससे वातावरण में 85.6 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जो पर्यावरण की दृष्टि से 3.4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर शुद्ध लाभ देगा। चार वर्षों के निर्माण कार्य के दौरान लगभग 29 लाख मानव दिवस (Man-days) का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा, जिससे स्थानीय श्रमिकों और कामगारों को बड़ा सहारा मिलेगा।

धार्मिक पर्यटन का बनेगा स्वर्णिम गलियारा

इस परियोजना के तैयार होने से उत्तर और मध्य भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच एक मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार हो जाएगा। उत्तर प्रदेश और बिहार के वाराणसी (काशी विश्वनाथ), प्रयागराज (त्रिवेणी संगम), चित्रकूट (भगवान राम की तपोभूमि) और गया (पिंडदान तीर्थ) जैसे पवित्र स्थलों तक देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं का पहुंचना बेहद सुगम, तेज और आरामदायक हो जाएगा।

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