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    बिजली बकाया से जुड़ा नोटिस इलाहाबाद हाई कोर्ट में रद, दिवाला समाधान प्रक्रिया अवधि से संबंधित मामलों में दी राहत

    By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Tue, 28 Apr 2026 01:54 PM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान के बाद पुराने बिजली बकाया की वसूली नही ...और पढ़ें

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

    HighLights

    1. आइबीसी के तहत स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान के बाद पुराने बिजली बकाया की वसूली नहीं

    2. हाई कोर्ट ने कहा- आइबीसी की धारा 238 अन्य सभी कानूनों पर वरीयता रखती है

    विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) 2016 के तहत स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान के बाद पुराने बिजली बकाया की वसूली नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा, आईबीसी की धारा 238 अन्य सभी कानूनों पर वरीयता रखती है।

    हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार की 

    यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने साउथ ईस्ट पावर कारपोरेशन लिमिटेड और टाटा स्टील लिमिटेड की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता शुभम अग्रवाल ,प्रतीक जे नागर और अधिवक्ता नरेंद्र कुमार तिवारी ने तर्क रखा। कोर्ट ने वर्ष 2023 और 2025 में जारी विभिन्न विवादित मांग नोटिसों को अवैध मानते हुए रद कर दिया।

    इन मामलों में आइबीसी के प्रावधान ही प्रभावी होंगे

    अदालत ने माना कि बिजली अधिनियम की धारा 174 अन्य कानूनों पर वरीयता देती है, लेकिन यह भी कहा कि आइबीसी बाद का कानून है और इसकी धारा 238 स्पष्ट रूप से सभी विरोधाभासी कानूनों पर लागू होती है। इसलिए दिवाला प्रक्रिया से जुड़े मामलों में आइबीसी के प्रावधान ही प्रभावी होंगे। यदि कोई बकाया राशि कार्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआइआरपी) अवधि से पहले की है और उसे रेजोल्यूशन प्लान में शामिल नहीं किया गया है तो वह दावा स्वतः समाप्त माना जाएगा।

    अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला 

    सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने दोहराया कि सफल रेजोल्यूशन आवेदक को कंपनी क्लीन स्टेट के साथ मिलनी चाहिए। यदि संबंधित प्राधिकरण (जैसे बिजली विभाग) ने सीआइआरपी के दौरान अपना दावा प्रस्तुत नहीं किया तो बाद में उस बकाया की वसूली नहीं की जा सकती। इस तर्क को कि बिजली बकाया ‘वैधानिक देनदारी’ है और इसलिए समाप्त नहीं हो सकत, कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।

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    नया नोटिस जारी कर सकते हैं

    हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि रेजोल्यूशन प्लान के बाद उत्पन्न होने वाले बकाया की वसूली के लिए संबंधित विभाग कानून के अनुसार नया नोटिस जारी कर सकते हैं। ऐसा करते समय राशि का स्पष्ट विवरण, गणना का आधार और वर्गीकरण की जानकारी देना आवश्यक है। दोनों याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने संबंधित सभी विवादित मांग नोटिस रद कर दिए। साथ ही पोस्ट-रेजोल्यूशन अवधि के वैध बकाया के लिए नए नोटिस जारी करने की स्वतंत्रता भी दी है।

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