आधिकारिक रिकार्ड में ‘निचली अदालत’ के बजाय ‘ट्रायल कोर्ट’ या ‘संबंधित अदालत’ के प्रयोग करें, इलाहाबाद HC का निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आधिकारिक रिकॉर्ड में 'निचली अदालत' के बजाय 'ट्रायल कोर्ट' या 'संबंधित अदालत' शब्द का उपयोग करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश म ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
महोबा में एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया मुद्दा
हाई कोर्ट ने महानिबंधक कार्यालय को दिया निर्देश, अपील स्वीकार तथा समन रद
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महानिबंधक कार्यालय को निर्देश दिया है कि आधिकारिक रिकार्ड में निचली अदालत अथवा अधीनस्थ अदालत जैसे शब्दों का उपयोग बंद कर इसकी जगह ट्रायल कोर्ट या संबंधित अदालत लिखा जाए। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकलपीठ ने महोबा के महेश तिवारी की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिया है। अपीलार्थी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कोतवाली महोबा में केस दर्ज कार्यवाही कोर्ट ने रद कर दी है।
‘निचली अदालत’ सही कानूनी शब्दावली प्रतीत नहीं होती
एकलपीठ ने कहा, विशेष न्यायालय अन्य न्यायालय के लिए ‘निचली अदालत’ सही कानूनी शब्दावली प्रतीत नहीं होती। सर्वोच्च न्यायालय ने सखावत और अन्य बनाम उप्र राज्य मामले में 2024 में स्पष्ट कर दिया है कि महानिबंधक कार्यालय विचारण न्यायालयों को ‘निचली अदालतें’ कहना बंद कर दें। यहां तक कि विचारण न्यायालय के रिकॉर्ड को भी लोअर कोर्ट रिकॉर्ड (एलसीआर) नहीं कहा जाना चाहिए। इसके बजाय, उसे विचारण न्यायालय रिकार्ड (टीसीआर) कहा जाना चाहिए। रजिस्ट्रार (न्यायिक) इस आदेश को संज्ञान में लें। इस आदेश की प्रति उन्हें भेजी जाए।
क्या है मामला?
कोर्ट का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित उपरोक्त आदेश के दृष्टिगत शब्द ट्रायल कोर्ट से प्रतिस्थापित किया जा सकता है। मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि अपीलार्थी के खिलाफ 28 जून 2025 को जिला पंचायत में निविदा प्रक्रिया के दौरान अंकित शुक्ला व अन्य साथियों के साथ परिसर में घुसकर निविदा पेटी में पानी डालने तथा सरकारी कर्मचारी के विरोध पर उसे धक्का देकर एक तरफ करने का आरोप है।
विशेष न्यायाधीश ने जारी किया समन
अंकित ने कथित तौर पर वादी मुकदमा जय प्रकाश अनुरागी को पीछे से पकड़ लिया और जातिसूचक टिप्पणियों का प्रयोग करते हुए गाली दी। शोर सुनकर बाहर निकले जिला पंचायत सदस्य मृत्युंजय प्रताप अहिरवार के विरुद्ध भी जातिसूचक टिप्पणियां की। कोतवाली में विभिन्न धाराओं के साथ एससीएसटी एक्ट में केस दर्ज किया गया। चार्जशीट के बाद विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अधिनियम)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 14 अक्टूबर 2025 के समन किया।
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केस कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई
पूरी केस कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। आरोप पत्र महेश तिवारी के चालक शैलेंद्र सिंह के विरुद्ध भी दाखिल किया गया है, लेकिन उसकी अपील हाई कोर्ट में नहीं थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सभी तथ्यों कारणों, परिस्थितियों के दृष्टिगत ट्रायल कोर्ट का समन आदेश निरस्त किया जाता है। साथ ही सत्र वाद में अपीलार्थी के विरुद्ध संपूर्ण कार्यवाही रद की जाती है।