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मुजफ्फरनगर हिस्ट्रीशीटर मुत्तलिव गुमशुदगी मामला CBI को सौंपा, HC ने पुलिस पर जताई नाराजगी

Published: Wed, 02 Sep 2026 11:55 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के हिस्ट्रीशीटर मुत्तलिव की गुमशुदगी की जांच सीबीआई को सौंप दी है। कोर्ट ने पुलिस ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट। जागरण

इलाहाबाद हाई कोर्ट। जागरण

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने मुत्तलिव गुमशुदगी की जांच सीबीआई को सौंपी।

  2. पुलिस की कार्यप्रणाली पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।

  3. सीबीआइ को तीन हफ्तों में प्रारंभिक रिपोर्ट देनी होगी।

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के हिस्ट्रीशीटर मुत्तलिव की गुमशुदगी के मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने मुत्तलिव के नाम से उसके भाई आलम की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कहा कि याची के गायब होने के दो ही कारण हो सकते हैं।

या तो आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते पुलिस ने उसे मार डाला अथवा वह कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए छिपा हुआ है। दोनों ही स्थितियों में सच्चाई सामने आनी आवश्यक है। सीबीआइ को निर्देश दिया गया है कि वह केस डायरी लेकर जांच शुरू करे और तीन हफ्तों में प्रारंभिक रिपोर्ट दे। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

याची के खिलाफ मुजफ्फरनगर के विभिन्न थानों में लगभग 30 मामले दर्ज हैं। हाई कोर्ट से 17 दिसंबर 2025 को मिली जमानत के बाद चार मई 2026 को उसे रिहा किया गया था। याचिका के अनुसार रिहाई के तुरंत बाद थाना पुरकाजीपुर पुलिस ने मुत्तलिव और उसके पिता को हिरासत में ले लिया। पिता को सात मई 2026 को छोड़ दिया गया, लेकिन मुत्तलिव लापता है।

राज्य सरकार का कहना है कि मुत्तलिव के खिलाफ सत्र परीक्षण संख्या 1344/2012 में गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। वारंट जारी होने की तारीख को लेकर भी विरोधाभास सामने आया। पहले इसे 13 मई 2026 बताया गया, जबकि बाद में रिकार्ड में 18 जून 2026 दर्शाया गया। थाना पुरकाजीपुर के एसएचओ डा. मानवेंद्र सिंह भाटी व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए।

कोर्ट ने पाया कि 15 अगस्त 2026 को गठित विशेष टीम केवल सार्वजनिक स्थानों पर मुत्तलिव की तस्वीर चस्पा करने तक सीमित रही। न तो मुत्तलिव के परिवार, पड़ोसियों और दोस्तों के बयान दर्ज किए गए न ही किसी ने उसे चार मई 2026 के बाद देखा। कोर्ट ने कहा कि यह रवैया दर्शाता है कि पुलिस गंभीरता से जांच नहीं कर रही, बल्कि मामले को लंबा खींच रही है।

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यह भी टिप्पणी की कि रिकार्ड में एक प्रविष्टि को काटकर बदले जाने की बात एसएचओ ने अपने हलफनामे में स्वीकार की है। इसे संबंधित कांस्टेबल की ‘लापरवाही’ बताया गया, लेकिन उस लापरवाह कांस्टेबल के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसएसपी मुजफ्फरनगर को भी आदेश की प्रति भेजने का निर्देश कोर्ट ने दिया है ताकि जिला प्रशासन सीबीआइ को पूरा सहयोग दे।

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