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कोडीन युक्त कफ सीरप की तय मात्रा बिक्री में अपराध नहीं, नशे के लिए भंडारण दंडनीय', इलाहाबाद HC की महत्वपूर्ण टिप्पणी

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 01 Sep 2026 03:45 PM (IST)Updated: Tue, 01 Sep 2026 08:52 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोडीन कफ सीरप मामले में मुख्य आरोपित भोला प्रसाद समेत 19 जमानत अर्जी खारिज कर दी ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. मुख्य आरोपित भोला प्रसाद समेत 19 जमानत अर्जी खारिज

  2. इलाहाबाद हाई कोर्ट में अन्य छोटे कर्मचारियों की अर्जी मंजूर

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सीरप की तस्करी से जुड़े आरोपितों भोला प्रसाद व अन्य 76 की जमानत अर्जियों पर आदेश सुनाते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने कहा है कि यदि 0.2 प्रतिशत तक कोडीन वाला कफ सीरप चिकित्सीय प्रयोग के लिए तय मात्रा में बेचा या एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाया जाता है तो यह एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध नहीं है, लेकिन यही सीरप अगर नशे के लिए भंडारित किया जाए, बेचा जाए या उसका परिवहन किया जाय तो पूरा मिश्रण कोडीन की तैयारी माना जाएगा और ऐसे मामले में एनडीपीएस एक्ट लागू होगा।

यह टिप्पणी करते हुए अदालत ने मास्टरमाइंड और बड़े सिंडिकेट से जुड़े 19 आरोपितों की जमानत अर्जियां खारिज कर दी हैं। ट्रक ड्राइवर, खलासी, गार्ड और गोदाम के छोटे कर्मचारियों को जमानत दे दी गई क्योंकि माल सीलबंद कार्टन में था और उन्हें यह पता होने का कोई सबूत नहीं था कि अंदर कोडीन सीरप है। कोर्ट के समक्ष मुख्य सवाल था कि न्यू फेंसेडिल, एस्कुफ, कोडेक्टस, लाइकारेक्स-टी जैसे कफ सीरप जो चिकित्सा में प्रचलित हैं और जिनमें कोडीन की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर है, क्या वे मैन्युफैक्चर्ड ड्रग की श्रेणी में आते हैं।

याचियों के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का विषय है, एनडीपीएस का नहीं। इस पर अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन कर या नशे के उद्देश्य से बिक्री और परिवहन करने पर एनडीपीएस के प्रावधान लागू होंगे।

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि बिना डाक्टर के पर्चे के सामान्य दवा दुकान से सीरप बेचना केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का उल्लंघन है, एनडीपीएस एक्ट का नहीं। हां, अगर कम समय में असामान्य रूप से भारी मात्रा में बिक्री हुई हो तो दुकानदार की नीयत से यह माना जा सकता है कि बिक्री नशे के लिए की गई।

फैसले में मुख्य आरोपित भोला प्रसाद की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। भोला साईं ट्रेडर्स रांची का प्रोपराइटर है। जांच में सामने आया कि सोनभद्र के लिए भेजी जा रही करीब 7.5 लाख बोतलें फर्जी फर्मों के नाम पर डायवर्ट कर बिहार बांग्लादेश और अन्य राज्यों में नशे के लिए भेजी गईं। कोर्ट ने माना कि इस सिंडिकेट में प्रथम दृष्टया संलिप्तता है और फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। अन्य 76 मामलों में कोर्ट ने अलग-अलग भूमिका के आधार पर जमानत तय की।

भोला प्रसाद (शैली ट्रेडर्स), दिवेश जायसवाल (डीएसए फार्मा), अंकुश सिंह (महाकाल मेडिकल), अभिनव कुमार यादव, बादल आर्य और हर्ष अग्रवाल जैसे आरोपितों को राहत नहीं मिली है। जांच में मिला है कि इन आरोपितों द्वारा करोड़ों रुपये के फर्जी ई-वे बिल और फर्जी फर्में बनाकर लाखों बोतलों को अवैध रूप से खुले बाजार व अन्य राज्यों/देशों में नशे के लिए खपाया जा रहा था।