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'आकृति ने पत्थरबाजी के लिए उकसाया तो वीडियो कहां है?' नोएडा हिंसा मामले में HC ने सरकार से मांगा जवाब

Published: Wed, 02 Sep 2026 11:16 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा हिंसा मामले में डीयू छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ पत्थरबाजी के लिए उकसाने के वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

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विधि संवाददाता, प्रयागराज। नोएडा में अप्रैल में श्रमिक प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी और आगजनी के लिए लोगों को उकसाने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत निरुद्ध दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा है।

कोर्ट ने पूछा कि आखिर वह वीडियो कहां है, जिसमें आकृति प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाती दिखाई दे रही हैं। 25 वर्षीय आकृति की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर बुधवार दो सितंबर को फिर सुनवाई होगी।न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से तीखे सवाल किए।

पीठ ने पूछा कि पुलिस रिकार्ड में कहां दर्ज है कि आकृति ने भीड़ को बुलाकर पत्थर फेंकने या वाहनों में आग लगाने के लिए कहा था। सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद यह देखना जरूरी है कि किस गवाह ने विशेष रूप से आकृति का नाम लिया है।सरकार ने कुछ गवाहों के बयानों का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ।

पीठ ने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने मीडिया में आरोपितों के खिलाफ मजबूत इलेक्ट्रानिक और वीडियो साक्ष्य होने की बात कही थी। यदि ऐसा है तो वह वीडियो अदालत में पेश किया जाए और उसमें वह स्थान भी चिह्नित किया जाए, जहां आकृति को प्रदर्शनकारियों को भड़काते हुए दिखाया गया है।

राज्य सरकार ने वीडियो साक्ष्य हासिल कर अदालत में पेश करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने समय देने से इन्कार करते हुए कहा कि आकृति पांच महीने से जेल में हैं। हालांकि सरकार के अनुरोध पर मामले को बुधवार सुबह 10 बजे फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया।

पीठ ने मौखिक टिप्पणी में यह भी कहा कि यदि रिकार्ड से अधिकारियों द्वारा शक्तियों के मनमाने इस्तेमाल की पुष्टि हुई तो संबंधित जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पर हर्जाना लगाया जा सकता है।

गौतमबुद्धनगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने 13 मई को पत्रकार सत्यम वर्मा, आकृति चौधरी समेत सात कार्यकर्ताओं पर रासुका लगाने की जानकारी दी थी। पुलिस ने इनके खिलाफ ठोस वीडियो साक्ष्य होने का दावा किया था। हाई कोर्ट अब उसी साक्ष्य की पड़ताल कर रहा है।

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