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क्या युवराज की मौत के असल दोषियों को दे दी क्लीन चिट? 3 कंट्रोल रूम कर्मियों पर फोड़ा ठीकरा; सवालों में एक्शन

Updated: Sun, 26 Apr 2026 09:11 PM (IST)

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एसआईटी ने पुलिस कंट्रोल रूम के तीन कर्मियों पर कार्रवाई की है। यह कार्रवाई जिला स्तरीय रिपोर्टों पर आधारित है, जबकि अन्य विभागों की लापरवाही को नजरअंदाज किया गया है।

मौके दमकल और पुलिस के 80 लोग युवराज को मौत के मुंह में जाते देखते रहे, बचाने नहीं गए। फोटो: आर्काइव

मौके दमकल और पुलिस के 80 लोग युवराज को मौत के मुंह में जाते देखते रहे, बचाने नहीं गए। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. एसआईटी ने तीन पुलिस कंट्रोल रूम कर्मियों को निलंबित किया

  2. इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के 98 दिन बाद कार्रवाई

  3. जिला स्तरीय रिपोर्टों पर आधारित, अन्य लापरवाही नजरअंदाज

 

गजेंद्र पांडे, ग्रेटर नोएडा। सिस्टम की नाकामी से पिता राजकुमार मेहता की आंखों के सामने करीब पौने दो घंटे मौत को मात देने के लिए संघर्ष करने वाले इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की घटना देशभर में चर्चित रही थी।

घटना से आक्रोशित लोगों ने नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस, दमकल और एनडीआरएफ के जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने मामला संज्ञान में लेकर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।

घटना के करीब 98 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। फिलहाल घटना वाली रात पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात तीन कर्मियों पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ कर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की गई है।

जबकि घटना के समय मौके पर मौजूद रहे दमकल, एसडीआरएफ व पुलिस विभाग के करीब 80 कर्मियों ने मौके पर पहुंच कर युवराज को बचाने का प्रयास नहीं किया था।

रिपोर्ट में कंट्रोल रूम के तीन कर्मियों को ही आरोपित बनाया गया 

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने जिन तीन कर्मियों को दोषी ठहराया, जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा अपनी रिपोर्ट में उन्हीं को आरोपित बनाया गया था। उक्त कार्रवाई की अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद ने भी पुष्टि की है।

बता दें नालेज पार्क कोतवाली अंतर्गत सेक्टर 150 स्थित बेसमेंट के लिए खोदे प्लाट में भरे पानी में कार समेत डूबकर करीब 98 दिन पहले यानी 17 जनवरी की रात यूरेका सोयायटी निवासी इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी।

घटना का कारण खतरनाक मोड़ पर यातायात से संबंधित संकेतक बैरिकेडिंग आदि नहीं होना। महज 70 फीट दूरी पर पानी में कार पर जान बचाने की गुहार लगा रहे युवराज को बचाने के लिए रस्सी, ट्यूब, स्टीमर आदि संसाधन नहीं मंगाए गए।

जो युवराज को मरते देखते रहे, उन पर काेई कार्रवाई नहीं 

जबकि मौके पर दमकल और पुलिस विभाग के 80 कर्मी मौजूद थे, उसे बचाने इसमें से किसी ने ठोस उपाय नहीं किए। करीब पौने दो घंटे संघर्ष के बाद पिता राजकुमार मेहता की आंखों के सामने युवराज डूब गया था।

युवराज को निकालने करीब साढ़े चार घंटे चले रेस्क्यू आपरेशन के दौरान प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस, दमकल और एनडीआरएफ विभाग का कोई बड़ा अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा था।

घटना के बाद सोसायटी वासियों ने नाराजगी जताते हुए बताया था कि वह कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से मोड़ पर सुरक्षा के इंतजाम कराने की मांग कर चुके थे, लेकिन सुनवाई नहीं की गई। इसी के चलते युवराज को जान गंवानी पड़ी।

अभी तक एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई 

एसआईटी से लोगों को उम्मीद थी, लेकिन अभी तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर घटना वाली रात पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात रहे असिस्टेंट रेडियो आफिसर ऐशपाल सिंह और रिजर्व सब इंस्पेक्टर देवेंद्र शर्मा समेत तीन कर्मियों को दोषी ठहराते हुए निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

प्रकरण से संबंधित विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा सौंपी अपनी-अपनी रिपोर्ट में इन्हीं तीन कर्मियों को आरोपित बनाया था। उसी को आधार पर एसआईटी ने भी शासन को जांच रिपोर्ट सौंप दी।

बाकी अन्य विभागों के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही को नजर अंदाज कर दिया। उधर, बेटी के पास लंदन में मौजूद पिता राजकुमार मेहता से संपर्क का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं की।

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