किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कानपुर पुलिस का एक्शन, निजी अस्पताल का पूर्व ओटी इंचार्ज गिरफ्तार
कानपुर पुलिस ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निजी अस्पताल के पूर्व ओटी इंचार्ज राजेश और गाजियाबाद के निजी अस्पताल के कुलदीप ...और पढ़ें

कानपुर में पकड़ा गया है किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट। फोटो: आर्काइव
HighLights
कानपुर पुलिस ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में दो गिरफ्तारियां कीं
ग्रेटर नोएडा के पूर्व ओटी इंचार्ज राजेश कुमार को पकड़ा गया
गाजियाबाद के कुलदीप सिंह राघव भी इस रैकेट में शामिल
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। कानपुर में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट के मामले में ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित निजी हाॅस्पिटल में तत्कालीन ओटी इंचार्ज के पद कार्यरत राजेश को कानपुर पुलिस ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया। गाजियाबाद के इंदिरानगर स्थित हॉस्पिटल में कार्यरत कुलदीप सिंह राघव को भी गिरफ्तार किया गया।
30 मार्च को हुआ था काले धंधे का पर्दाफाश
बता दें कि कानपुर में 30 मार्च को अवैध तरीके किडनी ट्रांसप्लांट के काले धंधे का पर्दाफाश किया गया था। इसमें कानपुर के तीन अस्पतालों का नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस की जांच में मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद के अलावा अन्य शहरों के अस्पतालों का नाम सामने आया था।
सीडीआर के आधार पर हुई गिरफ्तारी
इसमें बृहस्पतिवार को कानपुर पुलिस ने सीडीआर की मदद से ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित निजी हाॅस्पिटल में तत्कालीन ओटी इंचार्ज राजेश कुमार और गाजियाबाद के इंदिरानगर स्थित निजी हॉस्पिटल में कार्यरत कुलदीप सिंह राघव को गिरफ्तार किया।
देता था 35-40 हजार रुपये और फ्लाइट टिकट
बता दें कि किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट का रैकेट संचालक डाॅ. रोहित 35 से 40 हजार रुपये दोनों को देता था और फ्लाइट की टिकट की सुविधा देता था। जानकारी के अनुसार दोनों फ्लाइट से ही कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए गए हुए थे।
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गाजियाबाद और पिलखुआ के रहने वाले हैं आरोपी
राजेश कुमार मूल रूप से गाजियाबाद का निवासी है। वहीं कुलदीप सिंह राघव हापुड़ के पिलखुआ का रहने वाला है। हॉस्पिटल प्रबंधन ने बताया कि राजेश उनके यहां पर तीन वर्ष से ओटी इंचार्ज पद पर कार्यरत था।
एक महीने पहले दे चुका था इस्तीफा
एक महीने पहले उसने संस्थान में इस्तीफा दे दिया था और बुधवार को उसका नोटिस पीरियड का अंतिम दिन था। इस तरह के कार्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस प्रकरण का अस्पताल से कोई लेना-देना नहीं है। मामला कानपुर से संबंधित है। अस्पताल में किड़नी ट्रांसप्लांट का काम नहीं होता है।